धरती के दिल का दर्द जब फूट निकलता है। उबलते दर्द से पत्थर भी मोम सा पिघलता है। माणिक-पोखराज जैसे ख़ूबसूरत रंग लिए, आतशीं-लावा दमकता है। पास जाओ तो गरमाहट और आग बताती है, ज़मीं का क़तरा-क़तरा दर्द से लरज़ता है। दर्द भरा हर वजूद ऐसे हीं सुलगता है।

धरती के दिल का दर्द जब फूट निकलता है। उबलते दर्द से पत्थर भी मोम सा पिघलता है। माणिक-पोखराज जैसे ख़ूबसूरत रंग लिए, आतशीं-लावा दमकता है। पास जाओ तो गरमाहट और आग बताती है, ज़मीं का क़तरा-क़तरा दर्द से लरज़ता है। दर्द भरा हर वजूद ऐसे हीं सुलगता है।



कहते हैं ग़र अफ़सानों को अंजाम तक मौन रख कर ले जाये तो कोशिशें कामयाब होतीं है। ना राज़ खोलें ज़बान से, ना नज़रों से। तो नज़रें नहीं लगेंगी। लक्ष्य पाना है, तो बातों को अपनों से और ग़ैरों से राज़ बना सीने में छुपा रखना हीं मुनासिब है।

एक दिन मिली राहों में उलझन बेज़ार, थोड़ी नाराज़ सी।
बोली – बड़े एहसान फ़रामोश हो तुम सब।
मैं ज़िंदगी के सबक़ सिखातीं हूँ
और तुम्हें शिकायतें मुझ से है?
जीना तुम्हें नहीं आता,
एक उलझन कम नहीं होती, दूसरी खड़ी कर देते हो।
हाँ! एक बात और सुनो –
ज़िंदगी है तो उलझने हैं! ना रहेगी ज़िंदगी ना रहेंगीं उलझने।
# this post is written on YourQuote topic.
दिया तुमने दर्द औ तकलीफ़।
ज़रूर कुछ सिखा रहे हो,
कुछ बता रहे हो।
डिग्री नहीं, सच्चे सबक़ नज़रों
के सामने ला रहे हो।
जानते हैं गिरने ना दोगे।
हाथ पकड़ कर चलना सीखा रहे हो।


#topic given by YourQuote.

ख़ामोशी की क़दर करने वाले लोग,
हर लम्हें जीते हैं।
सही वक़्त मिले, दिल मिलें।
गुलिस्ताँ में गुलाब से लगाने वाले
अपने जैसे लोग मिलें।
दिल की बातें दिलों तक जाए।
तब कम बोलने वाले भी क्या ख़ूब बोलते हैं।
Psychological Fact- Quiet people are actually very talkative around the right people.

कुछ आवाज़ें कभी नहीं मरती
सुर साम्राज्ञी, माँ शारदा की पुत्री,
शारदेय आराधना कर
स्वयं भी विसर्जित हो रहीं,
सरस्वती संग।

अपने दर्द औ तकलीफ़ को बहाना ना बनाओ,
दूसरों के ठेस पहुँचाने का।
वरना ना तुम्हारा चोट ठीक होगा ना दर्द जाएगा।
यह अपने घाव को कुरेदते रहने जैसा है।

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