मेरी माँ (बाल कथा, रोचक जानकारियों पर आधारित) A story for children based on Olive ridley sea turtle

The Olive Ridley sea turtle nests at several sites in the western Indian Ocean, Indian subcontinent and Southeast Asia. The single most important breeding area for olive ridleys in the Indian Ocean along the Bay of Bengal is Orissa. Olive ridleys get their name from the coloring of their heart-shaped shell, which starts out gray but becomes olive green once the turtles are adults. This story  is based on child Psychology  and life cycle of Olive Ridley sea turtle.


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(यह कहानी  बच्चों के बाल मनोविज्ञान पर आधारित है। यह कहानी ऑलिव रीडले कछुओं के बारे में भी बच्चों को जानकारी देती है।” ऑलिव रीडले” कछुओं की एक दुर्लभ प्रजाति है। प्रत्येक वर्ष उड़ीशा के समुद्र तट पर लाखों की संख्या में ये अंडे देने आतें हैं। यह एक रहस्य है कि ये कछुए पैसिफ़िक सागर और हिन्द महासागर से हजारों मील की यात्रा कर इस तट पर ही क्यों अंडे देने आते हैं?)

गुड्डू स्कूल से लौट कर मम्मी को पूरे घर मे खोजते- खोजते परेशान हो गई। मम्मी कहीं मिल ही नहीं रही थी । हाँ, आज पापा जरुर घर में हीं थे । वह रोते-रोते पापा के पास पहुँच गई। पापा ने बताया मम्मी अस्पताल गई है। कुछ दिनों में वापस आ जाएगी। तब तक वे उसका ख्याल रखेगें। शाम में पापा के हाथ से दूध पीना उसे अच्छा नहीं लग रहा था। दूध पी कर,वह बिस्तर में रोते- रोते न जाने कब सो गई। रात में पापा ने उसे खाना खाने उठाया। वह पापा से लिपट गई। उसे लगा, चलो पापा तो पास है। पर खाना खाते-खाते पापा ने समझाया कि मम्मी अस्पताल में हैं। रात में वे अकेली न रहें इसलिए पापा को अस्पताल जाना पड़ेगा। गुड्डू उदास हो गई। वह डर भी गई थी। वह जानना चाहती थी कि मम्मी अचानक अस्पताल क्यों गई? पर घर में कोई कुछ बता हीं नहीं रहा था।

उसकी आँखों में आँसू देख कर पापा उसके बगल में लेट गए। उन्होंने गुड्डू से पूछा- ‘ गुड्डू कहानी सुनना है क्या?’ अच्छा, मै तुम्हें कछुए की कहानी सुनाता हूँ।’ गुड्डू ने जल्दी से कहा- ‘ नहीं, नहीं,कोई नई कहानी सुनाओ न ! कछुए और खरगोश की कहानी तो स्कूल में आज ही मेरी टीचर ने सुनाई थी।”

पापा ने मुस्कुरा कर जवाब दिया- ” यह दूसरी कहानी है।”  गुड्डू ने आँखों के आँसू पोँछ लिए। पापा ने उसके बालों पर हाथ फेरते हुए कहा- ” बेटा, यह पैसेफिक समुद्र और हिंद महासागर में रहने वाले कछुओं की कहानी हैं। ये आलिव रीडले कछुए के नाम से जाने जाते हैं। हर साल ये कछुए सैकड़ो किलोमीटर दूर से अंडा देने हमारे देश के समुद्र तट पर आते हैं। गुड्डू ने हैरानी से पापा से पूछा- ये हमारे देश में कहाँ अंडे देने आते हैं? ” पापा ने जवाब दिया- ये कछुए हर साल उड़ीसा के गहिरमाथा नाम के जगह पर लाखों की संख्या में आते हैं। अंडे दे कर ये वापस समुद्र में चले जाते हैं। इन छोटे समुद्री कछुओं का यह जन्म स्थान होता है। फिर पापा ने कहानी शुरू की।

हजारों मीलों से लाखों कछुए समुद्र के किनारे आने लगे। जैसे वहाँ उनका मेला लगा हो।  धीरे-धीरे वे बाहर बालू पर आने लगे  अौर बालू  में बङे-बङे गड्ढ़ों की खुदाई   करने लगे।  उन गड्ढ़ों में  उन्हों ने  बहुत सारे अंडे दिये।  फिर सावधानी से उसे बालू से ढँक कर छुपा दिया अौर चुपचाप गहरे सागर  की खुबसूरत नीली लहरों में जा कर खो गये। अब यहाँ, बालू के नीचे  कछुओं के सैकङों घोसलें थे । पर ऊपर से सिर्फ सुनहरे बालुअों का सागर तट  हीं दिखता था। कोई नहीं कह सकता था कि यहाँ बालुअों के नीचे  इतने सारे आलिवे रीडले कछुए के घोंसले  हैं  अौर इन में  कछुओं के ढेरो अंडे हैं।  कुछ समय,  लगभग दो महीने के बाद एक  जादू सा  हुआ। रात के समय बालू के नीचे से कछुए के अनेकों बच्चे निकलने लगे। सागर तट कछुए के छोटे-छोटे  बच्चों से भर गया।

सभी  बच्चों ने घोसलें से निकालने के बाद  घोसलें के चारो ओर चक्कर लगाया। जैसे वे कुछ खोज रहे हो। शायद  वे अपनी माँ को खोज रहे थे। पर वे अपनी माँ को पहचानते ही नहीं थे।  क्योंकि जब वे घोसलें  से निकले तब उनकी  माँ वहाँ थी हीं नही। माँ को खोजते -खोजते वे सब धीरे-धीरे सागर की ओर बढ़ने लगे। सबसे आगे हल्के हरे रंग का ‘ऑलिव’ कछुआ था। उसके पीछे ढेरो छोटे-छोटे कछुए थे। वे सभी उसके भाई-बहन थे।

‘ऑलिव’ ने थोड़ी दूर एक सफ़ेद बगुले को देखा। उसने पीछे मुड़ कर अपने भाई-बहनों से पूछा- वह हमारी माँ है क्या? हमलोग जब अंडे से निकले थे, तब हमारी माँ हमारे पास नहीं थी। हम उसे कैसे पहचानेगें? पीछे आ रहे गहरे भूरे रंग के कॉफी कछुए ने कहा- भागो-भागो, यह हमारी माँ नहीं हो सकती है। इसने तो एक छोटे से कछुए को खाने के लिए चोंच में पकड़ रखा है। थोड़ा आगे जाने पर उन्हे एक केकड़ा नज़र आया। ऑलिव ने पास जा कर पूछा- क्या तुम मेरी माँ हो? केकड़े ने कहा- नहीं मै तुम्हारी माँ नहीं हूँ।वह तो तुम्हें समुद्र मे मिलेगी।

सभी छोटे कछुए तेज़ी से समुद्र की ओर भागने लगे। वहाँ पहुँचते,  नीले पानी की लहरे उन्हें अपने साथ सागर मे बहा ले गई। पानी में पँहुचते ही वे उसमे तैरने लगे। तभी एक डॉल्फ़िन मछली तैरती नज़र आई। इस बार भूरे रंग के ‘कॉफी’ कछुए ने आगे बढ़ कर पूछा- क्या तुम हमारी माँ हो? डॉल्फ़िन ने हँस कर कहा- अरे बुद्धू, तुम्हारी माँ तो तुम जैसी ही होगी न? मै तुम्हारी माँ नहीं हूँ। फिर उसने एक ओर इशारा किया। सभी बच्चे तेज़ी से उधर तैरने लगे। सामने चट्टान के नीचे उन्हे एक बहुत बड़ा कछुआ दिखा। सभी छोटे कछुआ उसके पास पहुच कर माँ-माँ पुकारने लगे। बड़े कछुए ने मुस्कुरा कर देखा और कहा- मैं तुम जैसी तो हूँ। पर तुम्हारी माँ नहीं हूँ। सभी बच्चे चिल्ला पड़े- फिर हमारी माँ कहाँ है? बड़े कछुए ने उन्हें पास बुलाया और कहा- सुनो बच्चों, कछुआ मम्मी अपने अंडे, समुद्र के किनारे बालू के नीचे घोंसले बना कर देती है। फिर उसे बालू से ढ़क देती है। वह वापस हमेशा के लिए समुद्र मे चली जाती है। वह कभी वापस नहीं आती है। अंडे से निकलने के बाद बच्चों को समुद्र में जा करअपना रास्ता स्वयं खोजना पड़ता है। तुम्हारे सामने यह खूबसूरत समुद्र फैला है। जाओ, आगे बढ़ो और अपने आप जिंदगी जीना सीखो। सभी बच्चे ख़ुशी-ख़ुशी गहरे नीले पानी में आगे बढ़ गए।

कहानी सुन कर गुड्डू सोचने लगी, काश मेरे भी छोटे भाई या बहन होते। कहानी पूरी कर पापा ने गुड्डू की आँसू भरी आँखें देख कर पूछा- अरे, इतने छोटे कछुए इतने बहादुर होते है। तुम तो बड़ी हो चुकी हो। फिर भी रो रही हो? मै रोना नहीं चाहती हूँ । पर मम्मी को याद कर रोना आ जाता है। आँसू पोंछ कर गुड्डू ने मुस्कुराते हुए कहा। थोड़ी देर में वह गहरी नींद मे डूब गई।

अगली सुबह पापा उसे अपने साथ अस्पताल ले गए। वह भी मम्मी से मिलने के लिए परेशान थी। पास पहुँचने  पर उसे लगा जैसे उसका सपना साकार हो गया। वह ख़ुशी से उछल पड़ी। मम्मी के बगल में एक छोटी सी गुड़िया जैसी बेबी सो रही थी। मम्मी ने बताया, वह दीदी बन गई है। यह गुड़िया उसकी छोटी बहन है।

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अपनी जङें मजबूत करें – बांस की तरह प्रेरक लेख (Chinese Bamboo-motivational thought )

 

बांस एक तरह का घास है। चीनी बांस के पेड़ छह सप्ताह में 80 फुट लम्बे हो जाते है। यह बङी हैरानी की बात है। पर सच्चाई यह है कि इसे लगाने के चार वर्ष बाद तक इस में विकास के कोई चिन्ह नहीं दिखते। पर इसे पानी अौर पोषण उपलब्ध कराया जाता है। चार वर्ष के बाद पांचवें वर्ष में एक चमत्कार की तरह बांस के पेड़ सिर्फ छह सप्ताह में 80 फुट बढ़ जाते हैं।

यह चमत्कार नहीं है। इतने समय यह निष्क्रिय नहीं रहता। चार वर्षौं के दौरान बांस अपने अस्सी फुट ऊँचाई को संभालने के लिये अपनी जङों को बनाता अौर मजबूत करता रहता है। वर्ना यह अचानक अपनी 80 फुट लम्बी काया को संभाल नहीं सकेगा।

हम भी थोङे मेहनत के बाद हीं सफलता की कामना करने लगते हैं। जब कि जड़ें मजबूत बनने के लिये धैर्य अौर परिश्रम की जरुरत होती है। प्रतिकूल परिस्थितियों और चुनौती का सामना करने की शक्ति अौर सफलता संभालने के लिए मजबूत नींव बनने में समय लगता है। इस लिये असफलता से ङरने के बदले इसे जङों या आधार अौर नींव का निर्माण काल मानना चाहिये। जब एक घास में इतना सामर्थ है तब हम तो ईश्वार की सर्वौत्तम रचना हैं।

Source: अपनी जङें मजबूत करें – बांस की तरह (प्रेरक लेख / motivational thought )

Psychology #understandyourbehavior /मनोविज्ञान #अपने व्यवहार को समझने का विज्ञान

मनोविज्ञान – क्या यह मन का विज्ञान है? इसके नाम से लगता हे, जैसे यह मन का विज्ञान है। यह अनुभव अौर व्यवहार का विज्ञान है। यह एक एेसा विषय है जो हमारे व्यवहार को समझने में मदद करता है। यह हमारी मानसिक प्रक्रियाओं, अनुभवों अौर व्यवहार का अध्ययन करता है। हम कब, क्या , क्यों, अौर कैसे य्यवहार करते हैं। इसे समझने का विज्ञान है।

आज के समय में मनोविज्ञान बङा महत्वपुर्ण हो गया है। यह विज्ञापन, व्यावसाय, लोगों के प्रतिक्रियाओं, जनमत या बाजार का रुझान, खेल अौर खिलाङियों , अपराध का व्यवहार सब कुछ समझने के काम आता है।

क्यों नहीं अपने व्यवहार को समझा जाये?– विचार, चिन्तन, भाव ,आसपास के वातावरण अौर घटनाअों का असर हम पर पङता है। हमारा व्यक्तित्व , बौद्भिकता, संवेदन, सीखना, स्मृति, चिन्तन हमारे व्यवहार पर असर ङालतें हैं। दरअसल, हमारे व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाएं आपस में जुटे होते हैं। अतः अपने व्यक्तित्व को समझना जरुरी है। ताकि अपने व्यवहार को समझा जा सके।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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मक्के की रोटी और सरसों का साग

मक्के की रोटी 
250 ग्राम मक्के का आट्टा
4 चम्मच सरसों तेल
नमक
मुली,  गाजर, अौर 1 टुकड़ा अदरक, कद्दूकस किया हुआ।
धनिया पत्ता, हरी मिर्च, मेथी/ मुली साग कतरी हुई।
आटे में सभी सामाग्री मिला लें। जब रोटी बनानी हो तब एक-एक लोईया सान कर प्लास्टिक पेपर के बीच रख कर पतला बेले। तवा पर देर तक ( अच्छे से पकने तक, क्योकि यह पकने मे समय लेता है) करारा सेंके। चाहे तो रिफाइंड ड़ाल कर भी तवा पर सेक सकते है। चटनी, दही, आचार सॉस या साग के साथ सर्व करे।

 सरसों का साग 
सरसों के साग  में   थोङा मुली पत्ता, पालक, बथुआ साग और गोभी के मुलायम पत्ते  साफ कर काट ले। अदरक, हरी मिर्च थोड़ा हरा गोटा मूंग ( चाहे तो 2-3 घंटे फुला ले) ड़ाल कर प्रेशर कुकर मे अच्छे से गला ले। मिक्सी मे पीस ले।
3-4 प्याज़, 1 लहसुन, 2-3 टमाटर, 4-5 हरी मिर्च बारीक काटे थोड़ा अदरक कद्दूकस करे। तेल/ रिफाइंड मे मिर्च , अदरक ड़ाल कर 1-2 मिनट चलाये।फिर बाकी सभी सामग्री डाल कर गुलाबी भुने। पिसा साग और 2-3 चम्मच सत्तू ड़ाल कर चलाते रहे। नमक डाले। नमक अंत मे डालने से साग का हरा रंग बरकरार रहेगा। गाढ़ा होने पर उतार ले।

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Bloggers Recognition Award# 2

Again I have been nominated by two bloggers. I am taking the liberty to nominate more than 15 bloggers as I love encouraging my blogger buddies .

Thanks a lot for Bloggers Recognition Award. It’s so nice to know that there are fellow bloggers who really appreciate and believe in my work. I have been nominated by a very dedicated and talented blogger  Sakshi , Rising Phoenix   and Jitendra Mathur Ji

Thanks for thinking of me and nominating my name Sakshi.  I am sure you all will love her blog on Rising Phoenix. I really appreciate my nomination and am grateful to have been thought of.

The rules for accepting this award are as follows –

Give thanks to the person who had nominated you and a link to their blog.
Write a post to show your award.
Briefly tell how you started blogging.
Give two pieces of advice to new bloggers.
Nominate 15 other bloggers for this award.
Comment on the nominated blogs and let them know you have nominated them and give a link to the post you have created.

The Beginning of my Blog-Writing –

My interest in writing is something that happened subconsciously. I love writing for children. I find it refreshing and heartening to write about their innocence, faith, fears and fearlessness. One thing I find surprising about myself – I never thought of myself writing poetry, but now I am enjoying it too.

Give two pieces of advice to new bloggers:

I always believed in two things – Keep reading lots of good write-ups of your interest and keep writing regularly.

This is the list of some of my favourite bloggers. I nominate them for the Award –

Anoop

healthflix

Confused Thoughts

sunainabhatia

Jyoti

Abhay

Hemdiva Dev

Shaded Views

Pawan Belala

Amit Misra

sahil1137

Sachin patel

Pramod Kharkwal

deepsingh9796

Aneesh

yourshonestlyblog

susmitamukherjee

Amit kumar

Anupriya

NAREN

Daily Psychology

nidhee26

unfoldingenlightenment

Amit Agarwal

ChallengingEm

Fairy Kumar

Abhi Raj

Aanchal

Purba Chakraborty

Kiran Goswami

 

 

 

 

Enjoy blogging and Keep Smiling.

Bloggers Recognition Award!

  Bloggers Recognition Award!

I have been nominated by two bloggers. I am taking the liberty to nominate 30 bloggers as I love encouraging my blogger buddies .

Thanks a lot for  Bloggers Recognition  Award. It’s so nice to know that there are fellow bloggers who really appreciate and believe in my work. Thanks for thinking of me and nominating my name Savita and Jyotirmoy . 

I have been nominated by a very dedicated and talented blogger –  Savita and Jyotirmoy    I am sure you all will love Savita’s blog on   Fascinating World an Jyotirmoy’s blog on  A Wolverine’s World .  I really appreciate my nomination and am grateful to have been thought of.

 

The rules for accepting this award are as follows –

Give thanks to the person who had nominated you and a link to their blog.
Write a post to show your award.
Briefly tell how you started blogging.
Give two pieces of advice to new bloggers.
Nominate 15 other bloggers for this award.
Comment on the nominated blogs and let them know you have nominated them and give a link to the post you have created.

 

The Beginning of my Blog-Writing –

My interest in writing is something that happened subconsciously. I love writing for children. I find it refreshing and heartening to write about their innocence, faith, fears and fearlessness. One thing I find surprising about myself  – I never thought of myself writing poetry, but now I am enjoying it too.

 

 Give two pieces of advice to new bloggers:

I always believed in two things  – Keep reading lots of good write-ups of your interest and keep writing regularly.  

This is the list of  some of my  favourite bloggers.  I nominate them  for the Award:

Saurav

Trayee

Geethica

Kiran

rashishree

अजय बजरंगी

Arohii

Shalinisaraf

Ravindra More

novelistbaba

shivendrasinghrajput1

राकेश गुप्ता

HindIndia

RAKESH KUMAR SRIVASTAVA “RAHI”

Camilla

theonlysup

mihirtrada

AV

Amee

SunDeepKullu.com

theorangutanlibrarian

drwomer

abhiray59

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Joker Shayar

jmathur

Sunith

Yogi Saraswat

misstalkaholic

radhikasreflection

Kavita Chavda

 

Enjoy blogging and  Keep Smiling.

 

 

 

 

मेरा ब्लॉग -नरेटिवे ट्रांसपोटेशन या परिवहन कल्पना My Blog-Narretive Transportation


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About the name of my blog – 

     Narrative transportation theory proposes that when people lose themselves in a story  or write-up,  their attitudes and intentions change to reflect that story.

          According to Psychology this theory can be used to explain the persuasive effect of what    people read. Stories, poetry and write-ups may have a huge influence on  the readers mind .

 मेरे ब्लॉग के नाम के विषय में –

मेरे ब्लॉग का नाम नरेटिवे ट्रांसपोटेशनया परिवहन कल्पना है। यह  नाम कुछ अलग सा है। इसलिए मैं इस बारे में कुछ बातें करना चाहूंगी। कभी-कभी हम किसी रचना को पढ़ कर उसमें डूब जाते हैं। उसमें खो जाते हैं। उस में कुछ अपना सा लगने लगता है।  ऐसी कहानी या गाथा जो आप को अपने साथ बहा ले जाये। हमारा मन  उसमें ङूब जाये  । इस प्रभाव को   कथा परिवहन अनुभव  या  नरेटिवे ट्रांसपोटेशन कहते हैं।  यह एक मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है। 

मैं चाहती हूँ कि मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले पाठक भी ऐसा महसूस करें। इसमें हीं मेरे लेखनी की सार्थकता है। शब्दों का ऐसा मायाजाल बुनना बहुत कठिन काम है। फिर भी मैं प्रयास करती रहती हूँ। अगर मेरा यह प्रयास थोड़ा भी पसंद आए। तब बताएं जरूर। यह मेरा हौसला बढ़ाएगा।

मौसम के साथ उङते प्रवासी परिंदे- कविता Migratory birds – Poem

Research reveals that global warming is compelling birds into early migration. Migrating birds are arriving at their breeding grounds earlier as global temperatures rise.

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मौसम के साथ उङते रंग- बिरंगे परिंदे,
कुदरत के जादुई रंगों के साथ,

जहाँ का मौसम माकूल – माफिक हो 

वहीं चल देते हैं। 

हमारी तरह बंधनों से बंधे नहीं हैं। 

ये बंधनों से ऊपर, घुमक्कड़  बंजारों से।

थके,-हारे, हजारों मीलों से उङ कर आते हैं।

हम आशियाना  अौर समाज के बंधन से बंधे लोग

इन की प्राकृतिक जीवन को समझे बिना।

नैसर्गिक सृष्टि के नियम से छेङ-छाङ कर,

इन्हें तकलीफ पहुँचाते हैं। 

शब्दार्थ- Word meaning

घुमक्कड़, बंजारा – gypsy

माकूल,  माफिक – suitable

कुदरत,सृष्टि – nature,

सृष्टि – Creation

नैसर्गिक – Natural

प्रवासी – Migratory

Image from internet.

Images courtesy  Chandni Sahay.

कीमा – पत्ता गोभी रोल Keema-Cabbage rolls

 

Healthy, tasty and easy  Recipe

सामान-

कीमा- १०० ग्राम

पिसा लहसुन अौर अदरक – १ चम्मच

चाट मसाला – 1 चम्मच

पत्ता गोभी –  आधा

सॅास – ४ चम्मच

अोलिव आॅयल – २ चम्मच

नमक –

हरी मिर्च- २

बनाने का तरीका-

कीमा, पिसा लहसुन – अदरक,   चाट मसाला अौर नमक अच्छी तरह  मिलाए । आधा कटे  पत्त्ता गोभी  के  ऊपर के कुछ पत्ते  हटायें। अब सावधानी से मुलायम पत्त्ते निकालें ताकि वे टूटें नहीं। चार पत्त्ते लें। प्रत्येक पत्ते के एक तरफ  १-१ चम्मच सॅास, चाट मसाला अौर नमक लगायें। अब  पत्ते के बीच एक लाईन में कीमा रखें, पत्ते को मोङे अौर सावधानी से रोल करें। चारो रोल प्लेट में  इस तरह रखें जिस से वह खुलने नहीं पाये। हरी मिर्च में चीरा लगा कर  नमक ङालें । रोल अौर हरी मिर्च  माइक्रोवेव में ४-५ मिनट पकायें। रोल पर थोङा अोलिव आॅयल ङालें। साॅस ङाल कर गर्म सर्व करें।

 

 Ingredients  –

Keema- 100g

garlic- ginger paste – 1 tablespoons

chat mashala – 1 tablespoons

Cabbage – half

tomato Sauce – 4 tablespoons

olive Oil – 2 tsp

Salt –

Green chille – 2

Method

Mix   Keema, garlic- ginger paste, chat masala and salt.

Take 4 soft leaves of Cabbage. brush tomato Sauce,chat mashala and Salt on it.

Put keema mix  on cabbage leaves and roll carefully. Prepare all four rolls. Slit green chillies and sprinkle some salt.

Cook rolls and chilli for 4-5 minutes in microwave. Brush olive Oil. Serve hot with tomato sauce.

विज्ञान की नई खोज- किमेरा भ्रूण(chimera embryos -growing spare human organs in other animals)

Scientists Create First Human-Pig Chimeric Embryos  – Researchers may one day overcome the problem of organ shortages for transplantation by growing spare human organs in other animals. A group led by scientists at the Salk Institute for Biological Studies has taken the first big step toward making this a reality  (on January 26 , 2017 ) in Cell, they report having grown the first human-pig chimeric embryos.

हर साल दुनिया में हजारों लोगों की मृत्यु मानव अंगों की कमी की वजह से होती हैं। लगभग हर दस मिनट में  एक न एक व्यक्ति  अंग प्रत्यारोपण के लिए  प्रतीक्षा सूची में जोड़ा जाता है और हर दिन, उस सूची में 22 लोगों को अंग की जरूरत पूरी नहीं होने से  मर जाते हैं।

कैलिफोर्निया में सॉल्‍क इंस्‍टीट्यूट फोर बायलॉजिकल स्‍टडीज, अमेरिका के वैज्ञानिकों ने  सुअरों के अंदर इंसानी अंग उगाने के प्रयोग कि‍या हैं । 26 जनवरी, २०१७ को   वैज्ञानिकों ने एक उल्लेखनीय घोषणा की ।  वे पहली बार सफल मानव पशु संकर बनाने में सफल हुए हैं। पहला मानव-सुअर संकर भ्रूण प्रयोगशाला में बनाया गया है।  अभी प्रयोग शुरुआती दौर में है। पर वैज्ञानिकों  विश्वास है कि एक दिन प्रयोगशाला में मानव अंग  विकसित  अौर प्रत्यारोपित किये जा सकगें।

इस प्रक्रिया के तहत मरीज के ही शरीर की मूल कोशिकाओं को सूअर  के शरीर में विकसित किया जा सकेगा। एक बार अंगों के विकसित हो जाने पर उसे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट  किया जा सकता है। ये अंग मरीज की अपनी कोशिकाओं से विकसित होने केी वजह से शरीर द्वारा स्वीकार किए जाने की ज्यादा संभावना रहेगी ।

 

 

 

 

 

Image from internet.