Search a beautiful heart,
not a beautiful face.
Beautiful things are
not always good,
but
good things are always beautiful.
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Source: मौन (कविता)
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मेरे एम ए की पढ़ाई के दौरान एक दिन हमारे एक शिक्षक ने एक प्रयोग दिया, पर उसके बारे में कुछ नहीं बताया । अगली क्लास में , कुछ दिनों बाद उन्होंने सभी से उस एक्सपेरिमेंट का नतीजा जानना चाहा।
मेरे क्लास के सभी स्टूडेंट्स के रिजल्ट लगभग एक समान थे और मेरा रिजल्ट बिल्कुल उल्टा था। शिक्षक ने कुछ देर में पूछा कि सारी रिजल्ट एक जैसे हैं या किसी का रिजल्ट इससे अलग आया है? मैं अपने अलग रिजल्ट से थोड़ा परेशान थी फिर भी मैं अपनी कॉपी के साथ अपनी टीचर के पास पहुंची।
तब उन्होंने बताया कि वह ऐसे रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे । उन्हों ने बताया कि इसे कहते हैं. जिसका अर्थ है कि अक्सर कुछ लोग अधूरे या बीच में रोक दिए गए काम को ज्यादा याद रख हैं। यह मनोविज्ञान का एक फिनोमिना हैं। इसका बहुत अधिक इस्तेमाल मनोरंजन की दुनिया में अधूरे सीरियल या अधूरी कहानियों के रूप में किया जाता है जिससे उनके प्रोग्राम की पॉपुलैरिटी बनी रहे । इसका लाभ हम भी उठा सकते हैं।
पढ़ाई – जिन विद्यार्थियों में यह स्वभाव है वह अपनी पढ़ाई को बीच बीच में रोक कर कुछ अन्य काम कर सकते हैं(जैसे- खेलना, मनोरंजन या अपनी हॉबी वाले काम ) और फिर पढ़ाई आगे बढ़ा सकते हैं । उन्हें पढ़ाई बेहतर याद रहेगी। यह उन्हें अच्छी याददाश्त प्रदान करेगा।
मल्टीटास्किंग – वे एक साथ में दो तरह के काम करने का फायदा उठा सकते हैं जिसमें एक काम के बाद कोई दूसरा अन्य काम करें और फिर वापस पहले काम पर आएं तो इस तरह से दो या तीन काम होते रहते हैं और चूँकि ऐसे लोगों में काम खत्म करने की प्रवृति मजबूत होती है, इसलिए काम तेजी से होता है अौर जल्दी खत्म होता है। साथ हीं अगले काम को करने की प्रेरणा बनी रहती है
तनाव दूर करना – अधूरे काम से तनाव होता है। तनाव को खत्म करने के लिए एक आसान तरीका है, छोटे हलके काम करना। जिससे काम खत्म होने के बाद लोग तनावरहित महसूस करते हैं उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
अधूरा काम हमारी उत्सुकता को बनाए रखता है और हम उत्साहित रहते हैं। दुनिया के बहुत से खोज इसी स्वभाव के कारण हुए है इसलिए हमें अपनी उत्सुकता को बनाए रखना चाहिए और ज़ैगर्निक इफेक्ट के सकारात्मक रूप का फायदा उठाना चाहिए।

डूबते सूरज की लाल किरणो से निकलती आभा चारो ओर बिखरी थी. सामने, ताल का रंग लाल हो गया था. मैं अपनी मोबाईल से तस्वीर लेने लगी. डूबते सूर्य किरणों के साथ सेल्फी लेने की असफल कोशिश कर रही थी. पर तस्वीर ठीक से नहीं आ रही थी. तभी पीछे से आवाज़ आई – ” क्या मैं आपकी मदद कर सकती हूँ ? “चौक कर पलटी तो सामने एक खुबसूरत , कनक छडी सी, आयत नयनो वाली श्यामल युवती खड़ी थी.
मैंने हैरानी से अपरिचिता को देखा और पूछा – “आप को यहाँ पहले नहीं देखा. कहाँ से आई है?और मोबाईल उसकी ओर बढ़ा दिया . उसने तस्वीरें खींचते हुये कहा – कहते हैं , डूबते सूरज के साथ तस्वीरें नही लेनी चाहिये. मैं भी अस्ताचल सूर्य के साथ अपनी तस्वीर लिया करती थी. फ़िर गहरी नज़रों से उसने मुझे देखते हुये मेरे मन की बात कही – बडे कलात्मक लगते है न ऐसे फोटो? मैंने हामी में सिर हिलाया.
फ़िर मुस्कुराते हुए दूर गुजरती हुए राजमार्ग की ओर इशारा करते हुए कहा -” मैं वहाँ रहती हूँ. मैं तो आपको रोज़ देखती हूँ. आप सुबह मेरे आगे ही तो योग अभ्यास करती है. मेरा नाम नागवेणी है , पर यह नाम आप पर ज्यादा जंचेगा . आपकी नाग सी लम्बी , मोटी , बल खाती चोटी मुझे बड़ी आकर्षक लगती है. अब उसकी बातों का सिलसिला ख़त्म ही नहीं हो रहा था मान ना मान मैं तेरी मेहमान वाली उसकी अदा से मैं बेजार होने लगी थी. योग निद्रा कक्षा में जाने का समय होते देख मैंने उस से विदा लिया.
अगली शाम मैं हरेभरे वृक्षों के बीच बनी राह से गुजरते हुये अपने पसंदीदा स्थल पर पहुँची. पानी के झरने की मधुर कलकल और अस्तगामी सूर्य के लाल गोले के सम्मोहन में डूबी थी. तभी , मधुर खनकती आवाज़ ने मेरा ध्यान भंग कर दिया. नागवेणी बिल्ली की तरह दबे पैर , ना जाने कब मेरे बगल में आकर खड़ी हो गई थी.
उसकी लच्छेदार गप्पों का सिलसिला फ़िर से शुरू हो गया. अचानक उसने पूछा -आप यहाँ कब से आई हुई हैं ?”आप चित्रकारी भी करती हैं ना ? आपकी लम्बी , पतली अंगुलियों को देख कर ही मैं समझ गई थी कि यह किसी कलाकार की कलात्मक अंगुलियाँ हैं . डूबते सूर्य की पेंटिंग बनाईये ना”. उसने मेरे बचपन के शौक चित्रकारी की बात छेड़ कर गप्प में मुझे शामिल कर लिया . मैंने कहा -” हाँ , चित्रकारी कभी मेरा प्रिय शगल था. अब तो यह शौक छूट गया है.
उसकी बात का जवाब देते हुये मैंने मुस्कुराते हुये कहा -“तीन दिनों पहले इस नेचर क्योर इन्स्टिट्यूट में आई हूँ अभी एक सप्ताह और रहना है. यहाँ चित्रकारी का सामान ले कर नहीँ आई हूँ “.मेरी मुस्कुराहट के जवाब में मुस्कुराते हुये उस ने अपने पीठ की ओर मुडे दाहिने हाथ सामने कर दिया. मैंने अचरज से देखा. उसने लम्बी ,पतली, नाजुक उँगलियों में चित्रकारी के सामान थाम रखे थे. मैंने झिझकते हुये कहा – ” मैं तुम्हारा सामान नहीं ले सकती”.
“हद करती हैं आप , मुझसे दोस्ती तो कर ली , अब इस मामूली से सामान से इनकार क्यों कर रही हैं? देखिये , मेरे दाहिने हाथ में चोट लगी हैं. इसलिये मैं भी चित्र नहीं बना पा रहीं हूँ”. दूर गुजरते नेशनल हाईवे की ओर इशारा करती हुये बोली – “एक महीने पहले , 14 जनवरी को ठीक वहीं , सड़क पार करते समय दुर्घटना में मुझे चोट लग गई थी. अभी आप ही इसे काम में लाइये.
मैंने उसे समझाने की कोशिश की – ” देखो नागवेणी, ना जाने क्यों , अब पहले के तरह चित्र बना ही नहीँ पाती हूँ. एक -दो बार मैंने कुछ बनाने की कोशिश भी की थी. पर आड़ी -तिरछी लकीरों में उलझ कर रह गई .”आप शांत मन से चित्र बना कर तो देखिये. फ़िर देखियेगा अपनी कला का जादू. अपने आप ही आप की उँगलियाँ खुबसूरत चित्रकारी करने लगेंगी” नागवेणी ने रहस्यमयी आवाज़ में कहा और बच्चों की तरह खिलखिला कर हँसने लगी. मैं भी उसकी शरारत पर हँसने लगी.
मैंने अपनी और नागवेणी की ढेरों सेल्फी ली और वहीं एक चट्टान पर बैठ कर तस्वीरें उकेरने लगी. तभी किसी ने मेरे पीठ पर हाथ रखा. मुझे लगा नागवेणी हैं. पलट कर देखा. मेरे पड़ोस के कमरे की तेज़ी खड़ी थी. उसने पूछा – “आप अकेले यहाँ क्या कर रहीं हैं ? फ़िर मेरे हाथों मॆं पकड़े चित्रों को देख प्रसंशा कर उठी. सचमुच बड़े सुंदर चित्र बने थे. नागवेणी ने ठीक ही कहा था. शायद यह मेरे शांत मन का ही कमाल था. पर नागवेणी चुपचाप चली क्यों गई ? मैने तेज़ी से पूछा – “तुमने नागवेणी को देखा क्या “? तेज़ी ने बताया कि वह नागवेणी को नहीं पहचानती हैं.
अगले दो दिनों में मैंने ढेरों खुबसूरत चित्र बना लिये थे. यह सचमुच जादू ही तो था. इतने सुंदर और कलात्मक चित्र मैंने आज़ से पहले नहीं बनाये थे. मुझे नागवेणी को चित्र दिखाने की बड़ी चाहत हो रही थी. पर उस से मुलाकात ही नहीं हो रहीं थी. इतनी बडे , इस प्रकृतिक चिकित्सालय में सब इतने व्यस्त होते हैं कि मिलने का समय निकालना मुश्किल हो जाता हैं. मैने बहुतों से नागवेणी के बारे में पूछा पर कोई उसके बारे में बता नहीं पाया. बात भी ठीक हैं, इतने सारे लोगो के भीड़ में सब को पहचानना मुश्किल हैं.
रात मॆं टहलने के समय दूर नागवेणी नज़र आई .मैंने उसे पुकारा. पर वह रुकी नही. मै दौड़ कर उसके पास पहुँची और धाराप्रवाह अपनी खुबसूरत चित्रकारी के बारे में बताने लगी. मैने हँस कर कहा -” तुमने तो जादू कर दिया हैं नागवेणी. दो दिन कहाँ व्यस्त हो गई थी “.नागवेणी ने मेरे बातों का जवाब नही देते हुये कहा – मैं भी बहुत सुंदर चित्र बनाती थी. मैने अपनी कला तुम्हे उपहार में दे दी हैं. तुम मेरे साथ दोस्ती निभाओगी ना ? तुम मुझे बड़ी अच्छी लगती हो.
उसकी बहकी बहकी बातें सुन मैंने नजरे उसके चेहरे पर डाली. उसने उदास नजरो से मुझे देखा और कहा – ” अब तो तुम वापस जाने वाली हो पर मैं तुमसे मिलने आती रहुँगी.
पत्तों पर किसी के कदमों की चरमराहट सुन मैंने पीछे देखा. तेजी मुझे आवाज़ दे रही थे. मैने नागवेणी की कलाई थाम कर कहा -“चलो , तुम्हे तेज़ी से परिचय करा दूँ. फरवरी महीने के गुलाबी जाडे में नागवेणी की कोमल कलाई हिम शीतल थी. मैंने घूम कर तेज़ी को आवाज़ दिया. तभी लगा मेरी हथेलियों से कुछ फिसल सा गया.
तेज़ी ने पास आते हुये पूछा – ” इतनी रात में आप अकेले यहाँ क्या कर रही हैं ? मैने पलट कर देखा. नागवेणी का कहीँ पता नहीँ था. मुझे उस पर बड़ी झुंझलाहट होने लगी बड़ी अजीब लड़की हैं. कहाँ चली गई इतनी जल्दी ?
उस दिन मैं लाईब्रेरी मॆं बैठी चित्र बना रही थी. तेजी अपने मोबाईल से तस्वीरें लेने लगी. जाने से पहले सभी एक दूसरे के फोटो और फोन नम्बर लेना चहते थे. तभी टेबल के नीचे रखे पुरानेअख़बार की एक तस्वीर जानी पहचानी लगी . मैंने उसे हाथों मॆं उठाया और मेरी अंगुलियाँ काँप उठी . ठंढ के मौसम मॆं ललाट पर पसीने की बूँदें झलक उठीं. मैंने अख़बार की तिथि पर नज़रें डाली.
लगभग एक महीने पुरानी , जनवरी के अख़बार मॆं एक अनजान युवती के शव को शिनाख्त करने की अपील छपी थी. जिसकी मृत्यु 14 जनवरी को राज़ मार्ग पर किसी वाहन से हुए दुर्घटना से हुई थी. यह तस्वीर नागवेणी की थी. मैंने अपनी पसीने से भरी कांपती हथेलियों से मोबाईल निकाली. अपनी और नागवेणी की तस्वीरों को देखने लगी. पर हर तस्वीर मॆं मैं अकेली थी.
मेरे कानों मॆं नागवेणी की आवाज़ गूँजने लगी – मैं भी बहुत सुंदर चित्र बनाती थी. मैने अपनी कला तुम्हे उपहार में दे दी हैं. तुम मेरे साथ दोस्ती निभाओगी ना ? मैं तुमसे मिलने आती रहुँगी………..
Images from internet.
1. Henna leaves
2. China rose flower/ hibiscus- 5-10
3. aloe vera
4. Basil/ tulsi leaf
5. Neem leaf
6. fenugreek seeds 1table spoon
7. Eclipta Alba /Bhringraj
( other Popular Names- Babri, Galagara, Gunta-kalagara, Kaikeshi, Karisha-langanni, Karisirang-kanni, Kesharaji, Kesuri, Kesuria, Kesutti, Maka, Mochkand)
Parts Used: Herb, roots, leaves, stem.
8. Brahmi /Bacopa Monnieri leaves.
(some Common Name : Brahmi, bacopa, Babies tear, Bacopa monnieri, Herpestis monniera, water hyssop)
Parts Used : Whole Plant.
Grind everything finely. Apply on scalp and hair properly . Keep it for 1-2 hours.
Important –
1.Avoid in winter, as effect of henna is cold.
2. For best effect use fresh leaves.
3. Generally, these things are available at ayurvedi shops in dried form.
4. may add 2 eggs .
Source: Healthy Hair (beauty tip ) easy, tried n tested home remedy
In psychology, the Zeigarnik effect states that people remember uncompleted or interrupted tasks better than completed tasks. but it may vary person to person.
मनोविज्ञान में, ज़ैगर्निक प्रभाव में कह गया है कि कुछ लोगों को अधुरी बातें ज्यादा रहतीं है। इस प्रभाव के अनुसार जो छात्र अपने पढ़ाई के बीच-बीच में थोङा समय दूसरे काम मे लगाते हैं (जैसे- खेलना, मनोरंजन या अपनी हॉबी वाले काम ) उन्हें पढ़ाई बेहतर याद रहती है।
पत्रिकाअों व टी. वी. के अधुरे धाराविहिक अौर कहानियाँ इसलिये अक्सर हमें आगे की कहानी जानने के लिये प्रेरित करते है। पर यह जरुरी नहीं है कि यह सब के ऊपर ऐसा असर ङालें । क्योंकि इस प्रभाव को बहुत से अन्य बात भी प्रभावित करते हैं।
Bringing up children can be one of the most gratifying and at the same time one of the most terrifying of life’s activities. Today, Dr. Rekha of AccioHealth tackles behavioural issues in children with her usual sensitivity and expertise. Do send us your questions too, if you want Dr. Rekha to address them(admin@mumbaimom.com). Dr Rekha @Mumbai Mom
News-
Osmanabad: Six-year-old killed for ‘human sacrifice’; kin, tantrik arrested
Krushna Ingole was killed by his aunt, 3 other family members after tantrik told them blood of a young boy was needed to ward off ‘ill effect of a spihttp://indianexpress.com/article/cities/mumbai/osmanabad-six-year-old-killed-for-human-sacrifice-kin-tantrik-arrested-4612375/
2. India ‘human sacrifice’: Arrests over 10-year-old’s death
http://www.bbc.com/news/ world-Asia-India-39176570
दुनिया आगे जा रही है,
हम क्या पीछे लौट रहे हैं?
क्रुरता अौर स्वार्थ की भी हद है,
अपनों की ही बलि दे
रहे हैं?
क्या सचमुच इससे ईश्वर खुश होगें?
Musk deer is famous for the valuable scented musk found in its navel. Their musk is used for making perfumes and medicines. It is believed that musk deers look for the fragrance of musk everywhere outside instead of looking for it within themselves.
“I searched for God and found only myself.
I searched for myself and found only God”.
कस्तूरी कुन्डल बसे, मृग ढूढै बन माहि ।
ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि।।
कबीर
कस्तूरी मृग अपनी नाभि में पाए जाने वाली कस्तूरी के लिए प्रसिद्ध है। कस्तूरी का उपयोग औषधि के रूप में दमा, मिर्गी, निमोनिया आदि की दवाअों में होता है। यह अपनी खुशबूदार इत्र के लिए भी प्रसिद्ध है। कहते है , वह कस्तूरी की खुशबू की खोज में भटकता रहता है, जो उसके हीं अंदर होता है।

Golden shower tree is an ayurvedic medicine, also known as aragvadha – “disease killer”
आयुर्वेद – अमलतास वृक्ष के सभी भाग औषधि के काम में आते हैं। यह पित्तनिवारक, कफनाशक तथा वातनाशक हैं।
स्वर्णपुष्पी कहो या अमलतास,
जलती गर्मी, तप्ते धूप में
स्वर्ण सा दमकता,
नाजुक पंखुङियों के
साथ हवा के झोंके से,
कानों के झुमके सा झुमता, झूलता!!!!!
प्रचंङ ताप में,
कैसे रहता इतना
ताजा, सुकुमार अौर मनमोहक?
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अमलतास – गर्मियों की सुनहरी मुस्कान
अमलतास का नाम सुनते ही आँखों के सामने एक ऐसा पेड़ उभर आता है, जो मानो धूप को अपने अंदर समेटकर धरती पर बिखेर देता हो। इसे हिंदी में अमलतास और अंग्रेज़ी में Cassia fistula कहा जाता है। यह भारत के सबसे खूबसूरत फूलदार पेड़ों में से एक है, जो खासकर गर्मियों में अपनी पूरी शान पर होता है।
अमलतास एक मध्यम आकार का पेड़ होता है, जिसकी ऊँचाई लगभग 10 से 20 मीटर तक हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके लंबे-लंबे लटकते हुए पीले फूल होते हैं, जो गुच्छों में खिलते हैं। जब ये पूरी तरह खिल जाते हैं, तो पेड़ का हर हिस्सा पीले रंग से ढक जाता है — जैसे किसी ने उस पर सोने की चादर डाल दी हो।
दिलचस्प बात यह है कि जब अमलतास में फूल आते हैं, तब इसकी पत्तियाँ कम हो जाती हैं। इससे फूल और भी ज्यादा चमकदार दिखाई देते हैं।
अमलतास मुख्य रूप से अप्रैल से जून के बीच खिलता है, यानी जब गर्मी अपने चरम पर होती है। यही वजह है कि इसे “गर्मी का राजा” भी कहा जाता है।
यह पेड़ भारत के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है — खासकर सड़कों के किनारे, पार्कों और बाग-बगीचों में।
अमलतास का संबंध कई परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। दक्षिण भारत में इसे विशु (केरल का त्योहार) के समय खास महत्व दिया जाता है। इस दौरान इसके फूल शुभ माने जाते हैं।
इसके अलावा, यह पेड़ सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।
अमलतास सिर्फ सुंदर ही नहीं, बल्कि औषधीय दृष्टि से भी बहुत उपयोगी है। आयुर्वेद में इसके फल (लंबी काली फलियाँ) का उपयोग किया जाता है।
इसका गूदा मीठा होता है और कई पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है।
अमलतास के फूल मधुमक्खियों और तितलियों को बहुत आकर्षित करते हैं। इससे पर्यावरण में परागण (pollination) को बढ़ावा मिलता है।
इस तरह यह पेड़ केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन में भी अपना योगदान देता है।
अमलतास का पेड़ ज्यादा देखभाल नहीं मांगता।
यही कारण है कि शहरों में इसे सड़कों के किनारे लगाया जाता है। यह हमें सिखाता है कि जिंदगी चाहे कितनी भी तपती क्यों न हो, अगर भीतर रंग बाकी हैं, तो बाहर भी रोशनी फैल सकती है।अमलतास सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि धूप का एक एहसास है।
जब सारी दुनिया गर्मी से थकी होती है, तब यह पेड़ बिना शिकायत के मुस्कुराता है।
इसके फूल जैसे कहते हैं —“हर कठिन मौसम में भी, अपने रंग मत खोना।”
अमलतास – हर प्रदेश में अलग पहचान, हर दिल में एक सी चमक
अमलतास सिर्फ एक सुंदर पेड़ नहीं है,
यह भारत की मिट्टी में घुली हुई एक ऐसी कहानी है,
जो हर राज्य में थोड़ा अलग अंदाज़ में खिलती है…
लेकिन उसका संदेश एक ही रहता है — सौंदर्य, संतुलन और सहजता।
केरल (दक्षिण भारत)
केरल में अमलतास को Cassia fistula “कणिक्कोन्ना” कहा जाता है।
यह Vishu त्योहार का सबसे खास हिस्सा होता है।
लोग इसे अपने घर में सजाते हैं, पूजा में रखते हैं।
यहां यह सिर्फ फूल नहीं, शुभता और नई शुरुआत का प्रतीक है।
उत्तर भारत (दिल्ली, यूपी, राजस्थान)
यहां अमलतास गर्मियों में सड़कों और बागों की पहचान बन जाता है।
तेज धूप के बीच इसके पीले फूल जैसे ठंडक का एहसास देते हैं।
लोग इसे सहनशीलता और उम्मीद का प्रतीक मानते हैं —
कि कठिन समय में भी जीवन रंग नहीं छोड़ता।
महाराष्ट्र और मध्य भारत
यहां शहरों की सड़कों, कॉलोनियों और पार्कों में अमलतास खूब लगाया जाता है।
यह शहरी सुंदरता का हिस्सा बन चुका है —
कम देखभाल में भी इतना सुंदर दिखना, जैसे सादगी में शान।
पश्चिम बंगाल और ओडिशा
यहां इसे धार्मिक और पारंपरिक दृष्टि से भी महत्व मिलता है।
कुछ जगहों पर इसे पवित्र पेड़ माना जाता है,
जो घर के आस-पास सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
अमलतास आयुर्वेद में “आरोग्य का पेड़” माना जाता है।
इसका हर हिस्सा — फल, फूल, छाल — किसी न किसी रूप में उपयोगी है।
1. पेट के लिए वरदान
अमलतास की फलियों (काली लंबी फली) का गूदा बहुत प्रसिद्ध है।
यह एक प्राकृतिक रेचक (laxative) है।
कब्ज जैसी समस्या में यह धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से राहत देता है।
2. शरीर की गर्मी को शांत करना
गर्मियों में शरीर में जो अधिक गर्मी बढ़ जाती है,
अमलतास उसे संतुलित करने में मदद करता है।
इसलिए इसे “कूलिंग हर्ब” भी माना जाता है।
3. त्वचा रोगों में उपयोग
खुजली, दाद, या त्वचा की अन्य समस्याओं में
इसकी छाल और पत्तियों का लेप लगाया जाता है।
यह त्वचा को साफ और शांत करने में सहायक होता है।
4. खून की शुद्धि (डिटॉक्स)
अमलतास शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करता है।
इससे खून साफ होता है और शरीर हल्का महसूस करता है।
5. हल्के बुखार और कमजोरी में सहायक
कुछ आयुर्वेदिक काढ़ों में इसका उपयोग किया जाता है,
जो शरीर को धीरे-धीरे ताकत देने में मदद करता है।
अमलतास भले ही प्राकृतिक है,
लेकिन इसका इस्तेमाल सही मात्रा में ही करना चाहिए।
ज्यादा लेने से पेट ज्यादा ढीला हो सकता है।
इसलिए आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है।
अमलतास के पेड़ आज धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं,
क्योंकि शहर बढ़ रहे हैं और पेड़ों की जगह इमारतें ले रही हैं।
लोग जल्दी बढ़ने वाले पेड़ लगाते हैं, लेकिन अमलतास को समय चाहिए।
प्रदूषण और देखभाल की कमी भी इसे कमजोर बना देती है।
हमें इसे बचाना होगा… क्योंकि यह सिर्फ पेड़ नहीं,
गर्मी में खिलती हुई उम्मीद और प्रकृति की मुस्कान है।
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