
मुनासिब






चराग़-ए-रहगुज़र रौशन करता है।
मुसाफिर की अँधेरी राहों को।
जब दिल में चराग़ जल उठते हैं,
रौशन करते हैं रूह की राहें को।
अर्थ –
चराग़-ए-रहगुज़र – lamp on the way
चाहत मेरी या चाहत तेरी,
है क्या रूबरू हक़ीक़त से?
कहते हैं मिल जाती है कायनात,
चाहो ग़र शिद्दत से।
पर कुछ हसरतें, रह जातीं हैं हसरतें।
ग़र तुम चाहते हो किसी को रूह से
तब बनी रहेगी यह
मद्धम सी लौ-ए-चाहत अनंत तक।
आसमाँ और ज़मीं, सूरज और चाँद की उल्फ़त सी।
कुछ चाहतों में मिलन नहीं,
होती हैं ये चाहतें, चाहते रहने के लिये।

#TopicByYourQuote
विचलित नहीं होना मन मेरे, देख कफ़न का सफ़ेद नूर।
यह तो है राह-ए-सुकून, दुनिया के दुःख-दर्द से दूर।
होते हैं कई बदकिस्मत बे-कफ़न
होते है कुछ जीते-जी मद में चूर।
भूल जाते है ज़िंदगी है रूहानियत,
समझदारी है, नही रखने में ग़ुरूर।
कफ़न में जेब नहीं होती, यह है मशहूर।
कर्मों की वसीयत होती है रूह पर ज़रूर।

#TopicByYourQuote
मेरी माटी-मूरत पूजा तुम ने।
……सजाया-सँवारा,
दिया अपरिमित प्यार औ सम्मान
…..दस दिन।
कुछ अंश उसका रखा ना बचा कर?
मेरे जीते-जगाते, हाड़-मास …….
स्वरूप के लिए?
Inspired by an English quote!

कुछ लोग दिल में होते हैं ज़िंदगी में नहीं।
कुछ ज़िंदगी में होते है दिल में नहीं।
जो अपने रूह और दिल में जगह दें।
उन्हें हीं ज़िंदगी,
रूह और दिल का हिस्सा बनायें,
चाहे वे दूर हों या पास,
ग़र ना हो चाहत टूटने-बिखरने की।
सिर्फ़ पास और साथ के लिए
साथ ना निभाएँ।
रिश्ते अपनेपन के लिए होतें हैं,
ख़ामियाज़ा भरने के लिए नहीं।

खुशियां न तो मिलती है हाट-बाज़ार में|
ना पढ़ाया जाता है किसी पाठशाला में |
कुछ समय की खुशियाँ पा सकते हैं,
मादक नशा, और दुनियावी बातों में।
पर हमेशा खुश रहने के लिए,
झाँकना पड़ता है अपने दिल में।
अगर दिल औ रूह में रूहानियत हो,
तो हर हाल में खुश रहना आ जाता है।

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