ख़ामोशी

Topic by YourQuote

खामोशी

खामोशी 4 पंक्तियों में

रूह में कुछ जन्म ले रहा है…धुँधला सा ख़ामोशी से..
कोई ख़ामोश ख़्वाब, अधूरी दुआ, या कोई नया सफ़र—

❧ ❦ ☙

जो अभी नाजुक है,
पर वक़्त के साथ मुकम्मल होगा।

– Dr Rekha Rani

Poem Visualization

ना लड़ाईयाँ ना बचेगा इंसान

हमारी बेटियां

कल की छुई-मुई बेटियां कब बड़ी होकर घर-परिवार की जिम्मेदारी कंधों पर उठा लेती हैं, पता ही नहीं चलता। डॉ. रेखा सहाय की यह मर्मस्पर्शी कविता बेटियों के त्याग, ममता और उनके अटूट साहस को एक भावपूर्ण सलाम है। जरूर पढ़ें और साझा करें।

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Hamari Betiyan Image

हमारी बेटियां

कल की हमारी छुई-मुई बेटियां अचानक बड़ी हो जाती है…

अब वो रसोई संभालती है और रिश्ते भी,

बच्चे संभालती है और काम-काज भी।

कई हसरतों को दिल में क़ैद कर,

मुस्कान को इबादत बना लेती है।

कई बार अपनी ख़्वाहिशों को दरकिनार कर,

परिवार के अरमान संजों देती है।

थकान को चादर की तह में छुपाकर,

दर्द की तहरीर दिल में दबाकर,

लबों पर दुआ सजा लेती है।

वो आँचल में अमन की ख़ुशबू बसाए,

हर रोज़ ख़ुद को भूलकर भी

अपनी दुनिया सँवार लेती है।

कल की हमारी छुई-मुई बेटियाँ

अचानक बड़ी हो जाती है…

महिला दिवस — का अर्थ

महिला दिवस का सही अर्थ

महिला दिवस का मतलब ये नहीं
कि नारी हो जाएं सर्वशक्तिमान
और उसके सायों में लोग
बेज़ार हो ढूँढें अपना सम्मान।

ना ये है कोई ताक़त की जंग,
ना बाज़ुओं का इम्तिहान,
ये तो उन हाथों के लिए है दुआ,
जिन्हें सच में चाहिए सहारा और मान

जो कमज़ोर, डरी और थकी हैं,
उनके लिए ये है रोशनी का पैग़ाम,
ताकि मिले बराबरी का हक़,
मोहब्बत, इज़्ज़त और आराम।

महिला दिवस का मतलब ये नहीं
कि महिलाएँ हो जाए सर्वशक्तिमान,
और उसके सायों में लोग
ढूँढें अपना सम्मान।

युद्ध और यादें

रंग ( Happy Holi )

एहसासो की होली ( होली की शुभकामनाएं)

बेकार नहीं जाती मेहनत

Topic by YQ

क़ौन सुने अनकही

झोंके ने मुआफ़ी माँग भी ली तो क्या,

दरख़्त से टूटे पत्तों ने कहा —

हम तो बिखर ही गए यहाँ।

ज़ख़्म भर भी जाएँ तो क्या,

निशान तो रहते हैं सदा।

कौन सुने अनकही दिल की दास्ताँ,

हर कोई अपने आप में गुम यहाँ।