आदतें National Break Free From bad habits Day !

आदतें दर्द भी देती हैं और मज़ा भी!
इनसे मिलती हैं आह भी और वाह भी।
कुछ आदतें ग़ुलाम बनाती हैं।
कुछ रचना की आज़ादी दिलातीं है।
जलते दीप को बुझाने, दर्द औ ग़म देने वालों
की आदत भी जाती नहीं।
बस, खिलखिलाने-मुस्कुराने
की आदत जाने ना दो।

Research shows that people with hobbies are less likely to suffer from stress, low mood, and depression. Activities that get you out and about can make you feel happier and more relaxed

National Break Free From the Big Three Day, celebrated on July 14, is an opportunity to break free from bad habits, relationships, and stale mobile plans.

National Break Free From the Big Three Day, celebrated on July 14, is an opportunity to break free from bad habits, relationships, and stale mobile plans.

ज़िंदगी के रंग

कई जंग अक्सर हम अपने आप से हैं लड़ते,

ख़्वाबों, ख़्वाहिशों और दुनियादारियों की।

कभी दिल से जंग पेचीदागियों भरा!

कभी दिमाग़ से मामला इश्क़ भरा।

कभी पूरे होते ख़्वाब, कभी क़त्ल होतीं ख्वाहिशें।

फिर भी सुर्ख़-रु दिल धड़कता रहता है।

सब लड़ते रहते है अपनी-अपनी जंग।

ये हैं ज़िंदगी के रंग।

मायूसियाँ

अक्सर लोग हमें और हम लोगों को

आँखों हीं आँखों में, बिना समझे,

पूरे भरोसे के साथ पढ़ते रहते है।

कभी ख़त,कभी सागर की तहरीरों,

कभी परियों, देव, दानवों, दोस्तों,

दुश्मनों की कहानियों की तरह।

पर भूल जातें हैं कि जो ग़लत पढ़ लिया

सामने वाले को तो

सज़ा औ मायूसियाँ ख़ुद को मिलेंगी।

अनजाने हीं खो देंगे किसी हमदम को।

“गुरु मतंग और शबरी” Happy Guru Purnima!

“इंतज़ार आत्मा से हो तो पूरी होती हैं” – शबरी से राम ने कहा। “रावण तो बहाना है। कुछ कहानियाँ रची जातीं हैं, युगों-युगों तक कहे जाने के लिए। वे इतिहास बन जाती हैं । लीला तो रची जाती हैं, इंसानों को समझाने के लिय। रावण तो बस बहाना है। मुझे तेरे पास आना था।”

फिर कहा राम ने – “पशु बली से द्रवित होते हैं क्या वनों में बसे भील? क्यों हुई द्रवित तू? क्यों यौवन में किया गृह त्याग? तेरी पुकार कैसे करता मैं अनसुनी। चल कर आया तुम तक। बताने तुझे, ना रहता है यौवन-सौंदर्य, ना ऊँच-नीच।सिर्फ़ रह जाती है अटूट भक्ति, जब श्रमणा बन जाती है शबरी।”

तेरे एक रक्त बूँद से दरिया हुआ रक्ताभ और तेरे हीं चरण रज से जल हुआ स्वच्छ। तब भी नहीं जाना तुने क्या अपना तप और बल? ना तूने मुझे देखा, ना जाना। बरसों से, मेरे जन्म पूर्व से ताकती रही राहें मेरी। चखती-चुनती मीठे बेर, सजाती रोज़ पुष्प। सोंच, ना जाने किस पल आ जायें राम? समाधिस्थ होते गुरु मतंग के आशीष के भरोसे प्रतिक्षारत – “राम करेंगे तेरी चिंता और धरेंगे ध्यान और दिलाएँगे मोक्ष। ना ढूँढ उन्हें, वे ढूँढेंगे तुझे।”

शबरी, काल को तुने नहीं जाना क्या? देता नहीं किसी को एक पल ज़्यादा, ना एक पल कम। आयु पूरी होते ले जाने का बना लेता है बहाना।ना भ्रम में रह। रावण भी जाता किसी ना किसी विधि संसार से। रावण तो एक बहाना था। अम्मा, मुझे तो तेरे पास आना था।

शुभ गुरु पूर्णिमा !!

ब्रह्मांड में गूँजते कम्पन

सब उलझे हैं पाने में सिर्फ़ स्कूल-कॉलेज का ज्ञान,

दुनियावी साधन, धन और मान।

नहीं पाते जान,

अपने अंदर और ब्रह्मांड में गूँजते कम्पन,

पर कॉसमिक एनर्जी की करते हैं बात।

ठीक कह गए हैं कबीर-

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

रेत-औ-रज

पैरों में लगे धूल झड़ाते, पूछा उनसे-

क्यों बिखरे हो यूँ? राहों में पड़े हो पैरों तले?

खिलखिला कर राहों के रज ने कहा –

कभी बन जाओ ख़ाक…माटी।

हो जाओ रेत-औ-रज,

ईश्वर और इश्क़ की राहों पर।

समझ आ जाएगा,

ना खबसूरती रहती है, ना जुनून।

जब अहं खो जाए, हो जाए इश्क़ उससे।

दुनिया हसीन बन जाती है गर्द बन कर।

ज़र्रा-ज़र्रा मुस्कुरा उठता है।

अपने-आप से

ग़र ख़ुशियाँ और सुकून चाहिए,

तब अपने-आप से ना लड़ो।

ना अपने-आप से हारो।

प्यार करो अपने आप से,

ईमानदार रहो, सच बोलो।

याद रखो,

तुम्हारे सब से अपने बस तुम ही हो।

बाक़ी सब तो परखते रहते हैं।

जैसे सोना परखा जाता है

कसौटी पर घस-घस कर।

जिससे तुम कुछ पाओगे नहीं।

काग़ज़ की कश्तियाँ

बारिश में काग़ज़ की कश्तियाँ तैराते बच्चे

कल दुनिया के समंदर में ग़ुम हो जाएँगें या

खुद विशाल सागर बन जाएँगें।

तितलियाँ पकड़ते नन्हे फ़रिश्ते

दुनिया में गुमनाम हो जाएँगे या

अपनी सफ़ल दुनिया सज़ायेगें।

बच्चों का बचपना बनता है उनकी ज़िंदगी।

ये बचपन का लम्हा पल में गुज़र जाएगा।

जैसा आज़ देंगे, कल वे वही बन,

वही लौटाएँगें।

Psychological fact- Childhood Emotional Neglect May Impact in negative ways Now and Later.

शुभ रथ यात्रा! Happy Rath yatra!!

पुरी, धरा का बैकुंठ, पूर्ण करता यात्रा चार-धाम।

जहाँ निकलते है भाई-बहन

जगन्नाथ, सुभद्रा, , बलराम

नगर भ्रमण को, शुक्ल पक्ष, द्वितीया आषाढ़ मास।

जगन्नाथ दारु -नीम काष्ठ बने रथ गरुड़ध्वज पर,

बलराम तालध्वज, सुभद्रा दर्पदलन’- पद्म रथ पर।

रूप मनभावन, विशाल नेत्र मंगल आशिष परिपूर्ण।

रथों को खींचते भक्त भाग्यवान।

ढोल, नगाड़ों, तुरही, शंखध्वनि से गूंजे धाम।

Ratha Jatra/ yatra is a Hindu festival associated with Lord Jagannath held at Shri Kshetra Puri Dham in the state of Odisha, India. It is the oldest Ratha Yatra, whose descriptions can be found in Brahma Purana, Padma Purana, and Skanda Purana and Kapila Samhita. 

Dear Doctor!

लोगों को दिलासा देते समय,

कभी ख़्याल आया नहीं अपने दिल

को भी दिलासा देना चाहिए।

महसूस हुआ था माहिर हो गए हैं,

हँस-हँस कर,

दर्द अपनी मुस्कुरहटों के पीछे छुपाने में।

पर तुम हकीम -वैध-डॉक्टरों ने तो

मर्ज़ और मरीज़ को नाम भी दे दिया –

एक्सेडेंटेसियास्ट! वे लोग जो

मुस्कान के पीछे दर्द छुपातें है।

तुम्हारी,

दर्द-ए-दिल

*दर्द-ए-दिल – heart’s grief, heart-ache, grief.

*Eccedentesiast – A person who hides pain

behind a smile. एक्सेडेंटेसियास्ट – एक व्यक्ति जो

मुस्कान के पीछे दर्द छुपाता है।

Topic by- YourQuote

HAPPY DOCTOR’S DAY!!!