बातें, जो बीत गईं !!

कहते हैं जो बीत गई वो बात गई.

उन्हें जाने देना चाहिए !

पर सच तो है कि बहुत सी बीती बातें हीं

ठहर जातीं है बीत जाने पर भी,

जिद्द की तरह !!

बातों का क्या है – कही, अनकही,

कुछ अधूरी, कुछ पूरी. अटकी रहतीं हैं,

घर बना कर ज़ेहन के किसी कोने में.

ज़िन्दगी का हिस्सा बन.

जो बीत गई ,

वो बात रह गई ज़िंदगी का हिस्सा बन कर !!!

20 thoughts on “बातें, जो बीत गईं !!

      1. सही कहा । और मेरे हिसाब से भूलाने की कोशिश करने से बातें और याद आती है।

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  1. बीत गई बातों की यादें तो रह ही जाती हैं रेखा जी और ज़िंदगी यादों के सिवा है ही क्या ? ज़िन्दगी से यादों को निकाल दिया जाए तो पीछे जो बचेगा, वह न के बराबर ही होगा । इसके अतिरिक्त,’जो बीत गई सो बात गई’ एक दुनियादारी का फ़लसफ़ा है । किसी जज़्बाती इंसान के लिए इस फ़लसफ़े पर पूरी तरह अमल करना मुश्किल ही है ।

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    1. आपने बिलकुल ठीक कहा. कुछ लोग बड़े आराम से पुरानी बातों को भूलने की सलाह कैसे देते हैं. मालूम नहीं.
      आभार जितेंद्र जी.

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