कौन चाहता है ग़मों में डूबे रहना ?

सुझाव दिया किसी ने –

इतने दिन कौन दुःख मनाता है ?

अब ठीक हो जाओ.

मेरे जैसे नासमझ को मालूम नहीं

कहाँ हैं वह नियम पुस्तिका,

अॉन- अॉफ स्विच, मूड मिज़ाज का,

अपने को ठीक करने का .

वरना कौन  चाहता है

ग़मों में डूबे रहना?

10 thoughts on “कौन चाहता है ग़मों में डूबे रहना ?

    1. हाँ , बिलकुल सही लिखा आपने . ऐसा हीं होता हैं.
      इंसान का स्वभाव सागर की लहरों की तरह होता है. कभी उठती लहरों की तरह ख़ुशियों की उफान और कभी गिरती लहरों सी उदासी .
      बस इससे सम्भालने के लिए समय की ज़रूरत होती है. जो अक्सर कुछ लोग नहीं समझते. आपकी बातों के लिए शुक्रिया .

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