हाँ , बिलकुल सही लिखा आपने . ऐसा हीं होता हैं.
इंसान का स्वभाव सागर की लहरों की तरह होता है. कभी उठती लहरों की तरह ख़ुशियों की उफान और कभी गिरती लहरों सी उदासी .
बस इससे सम्भालने के लिए समय की ज़रूरत होती है. जो अक्सर कुछ लोग नहीं समझते. आपकी बातों के लिए शुक्रिया .
ग़मो में डूबना भी एक दिलेरी है ! बेशक़ बहोत शाइस्ता.
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बहुत आभार इस हौसला अफ़साई के लिए .
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Always welcome 😊
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😊
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😊
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Rekhaji Gumo me dubna koi Nahi cahte he Par kabhi kabhi Gum insan ko gher lete he fir insan na chare hue bhi gumo ke Samandmar me Dub Jata he.
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हाँ , बिलकुल सही लिखा आपने . ऐसा हीं होता हैं.
इंसान का स्वभाव सागर की लहरों की तरह होता है. कभी उठती लहरों की तरह ख़ुशियों की उफान और कभी गिरती लहरों सी उदासी .
बस इससे सम्भालने के लिए समय की ज़रूरत होती है. जो अक्सर कुछ लोग नहीं समझते. आपकी बातों के लिए शुक्रिया .
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Thanks
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sahi kaha……kaun chahta hai aansu bahaanaa…….dard ko chhupa yun hi mushkurana.
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बेशक . पर अक्सर ग़म छलक जाता है.
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