ज़िंदगी के रंग – 102

कभी तुमसे भी हिसाब करेंगे

ए ज़िंदगी !

खंडित हुए ……

……टूटे जुटे तो कई बार .

गाँठे , उलझने ,सुलझाई

ना जाने कितनी बार .

आज तो राखों तले दबें हैं……

चारों ओर बस ग़ुबार हीं ग़ुबार हैं.

शायद कभी निकलें हम भी

ख़ाक से.

अगर हुए फ़ीनिक्स की तरह.

जब तुम्हें फ़ुर्सत हो तो

आना हमारे दर पर

कुछ ख़ुशियाँ ले कर.

फ़ीनिक्स – फ़ीनिक्स /अमरपक्षी / मायापंछी एक प्राचीन मिथक , ज्वलन्त-पक्षी है जो अरब, ईरानी, यूनानी, रोमन, मिस्र, चीनी और भारतीय मृथकों व दंतकथाओं में पाया जाता है।

कथाओं के अनुसार फ़ीनिक्स अपने ही राख से पुनर्जन्म लेने की काबलियत रखता है.

PhoenixIn Greek mythology, a phoenix(/ˈfnɪks/; Ancient Greek: φοῖνιξ, phoînix) is a long-lived bird that cyclically regenerates or is otherwise born again.

phoenix informations- courtesy google.

4 thoughts on “ज़िंदगी के रंग – 102

  1. मेरा संघर्ष ही मेरा अलंकार है, मेरा संघर्ष ही मेरी पहचान है
    मेरा संघर्ष ही मेरी प्रेरणा है, मेरा संघर्ष ही मेरा गंतव्य है
    इसका वायुस्वरूप ही मेरा श्वास है, मेरे संघर्ष से ही मेरा अस्तित्व है
    जग से मेरा परिचय मेरी सफलता कराती है
    लेकिन मैं कौन हूँ, क्या हूं, मुझसे यह परिचय मेरा संघर्ष कराता है
    जब मैं ”अर्श” को स्पर्श करता हूं, तब मेरी जीवन की ललक संपूर्ण तो हो जाती है
    लेकिन वहां पहुचने की यात्रा पूरी, सार्थक, संतोषजनक तभी है जब वह कठोर ”फर्श” से आरंभ होती है
    यह निरर्थक है कि मैं कितनी बार गिरता हूँ, कितनी बार असफल रहता हूँ
    मेरे सपने, मेरा विश्वास, मेरा अस्तित्व मात्र मुझे पुनः उदित होने हेतु प्रेरित करेंगे
    और ” फर्श से अर्श तक ” की इस यात्रा में लिया गया मेरा हर कदम
    जीवन के श्वेत-पत्र को शांति और संतोष के रंगों से चित्रित करता है.

    यह एक उपहार है जो मैं स्वयं को देता हूं; एक वचन जो मैं निभाता हूं; एक जीवन जो मैं जीता हूँ – अर्थपूर्ण, उद्देश्यपूर्ण ….

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