ज़िंदगी के रंग – 101 (श्रद्धांजलि/ Tribute)

सूरज, चाँद

सब हैं अपनी जगह पर .

पर टूट गया कोई सितारा।

अंधेरी रातों में, सन्नाटों में ,

छोड़ गया

घाव गहरे।

खो गई

बूँद जैसे लहरों में सागर के।

महसूस किया वह श्वास……

आख़िरी साँसों की लहरें।

आँखें नम और

साँसे हैं धुआँ धुआँ।

होगा सहर …सवेरा ……?

निकलेगा क्या सूरज ?

इंतज़ार है।

बेहद अपने को खोने के बाद, कभी कभी कुछ कहना या लिखना दुष्कर और कठिन हो जाता है. ऐसे में फिर से लिखने का हौसला देने के लिए स्नेह और दिल से आभार …..