नक़ाब

यूँ हीं नहीं दर्द

तुम्हारे जाने का .

तुम गए

सिर्फ़ यही नहीं हुआ ,

ना जाने कितने चेहरों के

नक़ाब भी ले गए ………

कई अजनबी हमदर्द और

कई हमदर्द अजनबी बन गए .