
Thank you friends








अपने अंदर की आग हीं
मोमबत्ती को
जलाती
गलाती और
रूलाती है .
पर जलते हुए यह राह रोशन कर जाती है .

पतझड़ के नग्न होते पेड़ों से
आँसू से गिरते तरु पत्र .
निशा के चाँद के ओस अश्रु
या
उसके नयनों से टपकते अश्कों में …
किस में ज्यादा दर्द छुपा था
पता नहीं .
टूटना और बिछुड़ना तो प्रकृति का नियम है .



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