गुस्से की कड़ी Chain of anger #understandyourbehavior / #अपने व्यवहार को समझें

अक्सर ऐसा होता है,  हम बहुत सी छोटी -बड़ी बातों पर नाराज होते रहते हैं।
गुस्सा या आक्रोश भी एक तरह का एनर्जी है, जैसे विज्ञान में एनर्जी रूप बदल
लेती है पर खत्म नहीं होती है। ठीक इसी तरह गुस्सा भी जल्दी खत्म नहीं होता है।
इसकी कडी आगे बढ़ते रहती है। अगर हम  किसी एक व्यक्ति पर गुस्सा करते हैं,
तब वह आगे किसी और पर अपना गुस्सा निकालता है। और यह कड़ी कब तक
चलती रहती है जब तक कि कोई अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं करता है, और

शांति से इस  बात को  नहीं संभालता  है।
गुस्से को शांति से संभालना तभी संभव है  जब हमारे- आपके अंदर खुशी हो
और आपका मन शांत हो।  किसी तरह की नाराजगी, परेशानी, आक्रोश या
चिंता से आप व्यथित न हो।

पर इसका यह मतलब नहीं है कि जिंदगी में कोई परेशानी ना हो।  जिंदगी की
परेशानियों के साथ शांत और खुश रहना सीखना जरूरी है।

खुशी अौर शांति दोनो बनाये रखने का  मेरी नजर में बस एक ही उपाय है वह
अौर  आपका अपना मन !! उसे समझे अौर अपना व्यवहार /मनोविज्ञान  को समझें ।
हाँ  एक अौर भी रास्ता है, वह है अध्यात्म या योग से  अपने पर नियंत्रित रखना 
अौर खुश  रहना सीख सकते हैं.

 

 

Image courtesy internet.

नाम में क्या रखा है ? What is in a name?

जब, मेरी बेटी छोटी थी। तब मैं उसके साथ अक्सर एक खेल खेला करती थी ।

उसे अलग अलग नाम से बुलाती थी और फिर उससे उसका नाम पूछती थी।

उसे इस खेल में बङा मजा आता था। उसके चेहरे पर बिखरी उसकी खुशी और

खिलखिला कर नए -नए नाम बताने का खेल मुझे बड़ा अच्छा लगता था 

 यह खेल बहुत बार उल्टा भी चलता  था।  यह  मैं अक्सर तब करती थी,

जब मेरे पास बहुत काम होता था। जब मैं बहुत व्यस्त होती थी और वह

मुझे कुछ ना कुछ बोल कर परेशान करती रहती थी। मतलब यह कि  मैं

तब  उसे व्यस्त रखने के लिए  ऐसा करती थी।

 शायद, दुनिया में हर व्यक्ति के लिए  अपना नाम ही सबसे प्यारा शब्द  होता है।

पर  लड़कियों के  नाम शादी के बाद  बदल जाते हैं। लड़कियां अपने नाम या सरनेम के

साथ हीं  जिंदगी क्यों नहीं चला सकती हैं?

Beautiful Bhigwan – A Bird Sanctuary

Bhagwan  is located on the Pune-Solapur Highway(Maharastra) around 105 km from Pune on the backwaters of Ujani dam.  Its famous for migratory birds such as Ducks, Herons, Egrets, Raptors and Waders along with flocks of hundreds of flamingos

 

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Searching for Breakfast  –    Black Headed Ibis,

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     Asian Open Billed Stork  and  Black-winged Stilt in noon.

 

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An evening in  Bhigwan with seagulls…….  lovely  seabirds  

 

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beautiful long tailed, Green Bee Eater

 

 

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Grey Heron ready to take a flight……..

 

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I wish I could fly like a bird  एक आजाद परिंदे की तरह……..

 

 

 

Image courtesy Chandni Sahay

AUM (ॐ=MC2): Demystifying the fundamental universal sound

If you have read the previous article about mantras & if you know something about Einstein’s theory of relativity, then you will find out that what Yogis spoke about thousand’s of y…

Source: AUM (ॐ=MC2): Demystifying the fundamental universal sound

धोखा और फरेब-कविता Deception- poetry

Kerala mangoes arrive early this year – growers expect them to be ready by the second week of March. ( News; indianexpress, Mon, Feb 13, 2017)

Research reveals that global warming is compelling birds into early migration. Migrating birds are arriving at their breeding grounds earlier as global temperatures rise.

धोखा और फरेब हमने किस- किस को सिखा दिया है?

प्राकृति को देखकर

 लगता है क्या कभी हम भी ऐसे थे

पवित्र- पावन, सच्चे?

अब तो करवटें बदलते मौसम ने भी

रंग दिखाना शुरु कर दिया  है

समय से पहले  प्रवासी पंछी उड़कर आने जाने लगे हैं

फल – फूल भी मौसम से पहले खिलने फलने लगे हैं

क्या हमसे यह धोखा फरेब मौसम ने भी सीख लिया है?

Image courtesy Chandni  Sahay.

मेरी माँ (बाल कथा, रोचक जानकारियों पर आधारित) A story for children based on Olive ridley sea turtle

The Olive Ridley sea turtle nests at several sites in the western Indian Ocean, Indian subcontinent and Southeast Asia. The single most important breeding area for olive ridleys in the Indian Ocean along the Bay of Bengal is Orissa. Olive ridleys get their name from the coloring of their heart-shaped shell, which starts out gray but becomes olive green once the turtles are adults. This story  is based on child Psychology  and life cycle of Olive Ridley sea turtle.


Indian Bloggers

(यह कहानी  बच्चों के बाल मनोविज्ञान पर आधारित है। यह कहानी ऑलिव रीडले कछुओं के बारे में भी बच्चों को जानकारी देती है।” ऑलिव रीडले” कछुओं की एक दुर्लभ प्रजाति है। प्रत्येक वर्ष उड़ीशा के समुद्र तट पर लाखों की संख्या में ये अंडे देने आतें हैं। यह एक रहस्य है कि ये कछुए पैसिफ़िक सागर और हिन्द महासागर से हजारों मील की यात्रा कर इस तट पर ही क्यों अंडे देने आते हैं?)

गुड्डू स्कूल से लौट कर मम्मी को पूरे घर मे खोजते- खोजते परेशान हो गई। मम्मी कहीं मिल ही नहीं रही थी । हाँ, आज पापा जरुर घर में हीं थे । वह रोते-रोते पापा के पास पहुँच गई। पापा ने बताया मम्मी अस्पताल गई है। कुछ दिनों में वापस आ जाएगी। तब तक वे उसका ख्याल रखेगें। शाम में पापा के हाथ से दूध पीना उसे अच्छा नहीं लग रहा था। दूध पी कर,वह बिस्तर में रोते- रोते न जाने कब सो गई। रात में पापा ने उसे खाना खाने उठाया। वह पापा से लिपट गई। उसे लगा, चलो पापा तो पास है। पर खाना खाते-खाते पापा ने समझाया कि मम्मी अस्पताल में हैं। रात में वे अकेली न रहें इसलिए पापा को अस्पताल जाना पड़ेगा। गुड्डू उदास हो गई। वह डर भी गई थी। वह जानना चाहती थी कि मम्मी अचानक अस्पताल क्यों गई? पर घर में कोई कुछ बता हीं नहीं रहा था।

उसकी आँखों में आँसू देख कर पापा उसके बगल में लेट गए। उन्होंने गुड्डू से पूछा- ‘ गुड्डू कहानी सुनना है क्या?’ अच्छा, मै तुम्हें कछुए की कहानी सुनाता हूँ।’ गुड्डू ने जल्दी से कहा- ‘ नहीं, नहीं,कोई नई कहानी सुनाओ न ! कछुए और खरगोश की कहानी तो स्कूल में आज ही मेरी टीचर ने सुनाई थी।”

पापा ने मुस्कुरा कर जवाब दिया- ” यह दूसरी कहानी है।”  गुड्डू ने आँखों के आँसू पोँछ लिए। पापा ने उसके बालों पर हाथ फेरते हुए कहा- ” बेटा, यह पैसेफिक समुद्र और हिंद महासागर में रहने वाले कछुओं की कहानी हैं। ये आलिव रीडले कछुए के नाम से जाने जाते हैं। हर साल ये कछुए सैकड़ो किलोमीटर दूर से अंडा देने हमारे देश के समुद्र तट पर आते हैं। गुड्डू ने हैरानी से पापा से पूछा- ये हमारे देश में कहाँ अंडे देने आते हैं? ” पापा ने जवाब दिया- ये कछुए हर साल उड़ीसा के गहिरमाथा नाम के जगह पर लाखों की संख्या में आते हैं। अंडे दे कर ये वापस समुद्र में चले जाते हैं। इन छोटे समुद्री कछुओं का यह जन्म स्थान होता है। फिर पापा ने कहानी शुरू की।

हजारों मीलों से लाखों कछुए समुद्र के किनारे आने लगे। जैसे वहाँ उनका मेला लगा हो।  धीरे-धीरे वे बाहर बालू पर आने लगे  अौर बालू  में बङे-बङे गड्ढ़ों की खुदाई   करने लगे।  उन गड्ढ़ों में  उन्हों ने  बहुत सारे अंडे दिये।  फिर सावधानी से उसे बालू से ढँक कर छुपा दिया अौर चुपचाप गहरे सागर  की खुबसूरत नीली लहरों में जा कर खो गये। अब यहाँ, बालू के नीचे  कछुओं के सैकङों घोसलें थे । पर ऊपर से सिर्फ सुनहरे बालुअों का सागर तट  हीं दिखता था। कोई नहीं कह सकता था कि यहाँ बालुअों के नीचे  इतने सारे आलिवे रीडले कछुए के घोंसले  हैं  अौर इन में  कछुओं के ढेरो अंडे हैं।  कुछ समय,  लगभग दो महीने के बाद एक  जादू सा  हुआ। रात के समय बालू के नीचे से कछुए के अनेकों बच्चे निकलने लगे। सागर तट कछुए के छोटे-छोटे  बच्चों से भर गया।

सभी  बच्चों ने घोसलें से निकालने के बाद  घोसलें के चारो ओर चक्कर लगाया। जैसे वे कुछ खोज रहे हो। शायद  वे अपनी माँ को खोज रहे थे। पर वे अपनी माँ को पहचानते ही नहीं थे।  क्योंकि जब वे घोसलें  से निकले तब उनकी  माँ वहाँ थी हीं नही। माँ को खोजते -खोजते वे सब धीरे-धीरे सागर की ओर बढ़ने लगे। सबसे आगे हल्के हरे रंग का ‘ऑलिव’ कछुआ था। उसके पीछे ढेरो छोटे-छोटे कछुए थे। वे सभी उसके भाई-बहन थे।

‘ऑलिव’ ने थोड़ी दूर एक सफ़ेद बगुले को देखा। उसने पीछे मुड़ कर अपने भाई-बहनों से पूछा- वह हमारी माँ है क्या? हमलोग जब अंडे से निकले थे, तब हमारी माँ हमारे पास नहीं थी। हम उसे कैसे पहचानेगें? पीछे आ रहे गहरे भूरे रंग के कॉफी कछुए ने कहा- भागो-भागो, यह हमारी माँ नहीं हो सकती है। इसने तो एक छोटे से कछुए को खाने के लिए चोंच में पकड़ रखा है। थोड़ा आगे जाने पर उन्हे एक केकड़ा नज़र आया। ऑलिव ने पास जा कर पूछा- क्या तुम मेरी माँ हो? केकड़े ने कहा- नहीं मै तुम्हारी माँ नहीं हूँ।वह तो तुम्हें समुद्र मे मिलेगी।

सभी छोटे कछुए तेज़ी से समुद्र की ओर भागने लगे। वहाँ पहुँचते,  नीले पानी की लहरे उन्हें अपने साथ सागर मे बहा ले गई। पानी में पँहुचते ही वे उसमे तैरने लगे। तभी एक डॉल्फ़िन मछली तैरती नज़र आई। इस बार भूरे रंग के ‘कॉफी’ कछुए ने आगे बढ़ कर पूछा- क्या तुम हमारी माँ हो? डॉल्फ़िन ने हँस कर कहा- अरे बुद्धू, तुम्हारी माँ तो तुम जैसी ही होगी न? मै तुम्हारी माँ नहीं हूँ। फिर उसने एक ओर इशारा किया। सभी बच्चे तेज़ी से उधर तैरने लगे। सामने चट्टान के नीचे उन्हे एक बहुत बड़ा कछुआ दिखा। सभी छोटे कछुआ उसके पास पहुच कर माँ-माँ पुकारने लगे। बड़े कछुए ने मुस्कुरा कर देखा और कहा- मैं तुम जैसी तो हूँ। पर तुम्हारी माँ नहीं हूँ। सभी बच्चे चिल्ला पड़े- फिर हमारी माँ कहाँ है? बड़े कछुए ने उन्हें पास बुलाया और कहा- सुनो बच्चों, कछुआ मम्मी अपने अंडे, समुद्र के किनारे बालू के नीचे घोंसले बना कर देती है। फिर उसे बालू से ढ़क देती है। वह वापस हमेशा के लिए समुद्र मे चली जाती है। वह कभी वापस नहीं आती है। अंडे से निकलने के बाद बच्चों को समुद्र में जा करअपना रास्ता स्वयं खोजना पड़ता है। तुम्हारे सामने यह खूबसूरत समुद्र फैला है। जाओ, आगे बढ़ो और अपने आप जिंदगी जीना सीखो। सभी बच्चे ख़ुशी-ख़ुशी गहरे नीले पानी में आगे बढ़ गए।

कहानी सुन कर गुड्डू सोचने लगी, काश मेरे भी छोटे भाई या बहन होते। कहानी पूरी कर पापा ने गुड्डू की आँसू भरी आँखें देख कर पूछा- अरे, इतने छोटे कछुए इतने बहादुर होते है। तुम तो बड़ी हो चुकी हो। फिर भी रो रही हो? मै रोना नहीं चाहती हूँ । पर मम्मी को याद कर रोना आ जाता है। आँसू पोंछ कर गुड्डू ने मुस्कुराते हुए कहा। थोड़ी देर में वह गहरी नींद मे डूब गई।

अगली सुबह पापा उसे अपने साथ अस्पताल ले गए। वह भी मम्मी से मिलने के लिए परेशान थी। पास पहुँचने  पर उसे लगा जैसे उसका सपना साकार हो गया। वह ख़ुशी से उछल पड़ी। मम्मी के बगल में एक छोटी सी गुड़िया जैसी बेबी सो रही थी। मम्मी ने बताया, वह दीदी बन गई है। यह गुड़िया उसकी छोटी बहन है।

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अपनी जङें मजबूत करें – बांस की तरह प्रेरक लेख (Chinese Bamboo-motivational thought )

 

बांस एक तरह का घास है। चीनी बांस के पेड़ छह सप्ताह में 80 फुट लम्बे हो जाते है। यह बङी हैरानी की बात है। पर सच्चाई यह है कि इसे लगाने के चार वर्ष बाद तक इस में विकास के कोई चिन्ह नहीं दिखते। पर इसे पानी अौर पोषण उपलब्ध कराया जाता है। चार वर्ष के बाद पांचवें वर्ष में एक चमत्कार की तरह बांस के पेड़ सिर्फ छह सप्ताह में 80 फुट बढ़ जाते हैं।

यह चमत्कार नहीं है। इतने समय यह निष्क्रिय नहीं रहता। चार वर्षौं के दौरान बांस अपने अस्सी फुट ऊँचाई को संभालने के लिये अपनी जङों को बनाता अौर मजबूत करता रहता है। वर्ना यह अचानक अपनी 80 फुट लम्बी काया को संभाल नहीं सकेगा।

हम भी थोङे मेहनत के बाद हीं सफलता की कामना करने लगते हैं। जब कि जड़ें मजबूत बनने के लिये धैर्य अौर परिश्रम की जरुरत होती है। प्रतिकूल परिस्थितियों और चुनौती का सामना करने की शक्ति अौर सफलता संभालने के लिए मजबूत नींव बनने में समय लगता है। इस लिये असफलता से ङरने के बदले इसे जङों या आधार अौर नींव का निर्माण काल मानना चाहिये। जब एक घास में इतना सामर्थ है तब हम तो ईश्वार की सर्वौत्तम रचना हैं।

Source: अपनी जङें मजबूत करें – बांस की तरह (प्रेरक लेख / motivational thought )

Psychology #understandyourbehavior /मनोविज्ञान #अपने व्यवहार को समझने का विज्ञान

मनोविज्ञान – क्या यह मन का विज्ञान है? इसके नाम से लगता हे, जैसे यह मन का विज्ञान है। यह अनुभव अौर व्यवहार का विज्ञान है। यह एक एेसा विषय है जो हमारे व्यवहार को समझने में मदद करता है। यह हमारी मानसिक प्रक्रियाओं, अनुभवों अौर व्यवहार का अध्ययन करता है। हम कब, क्या , क्यों, अौर कैसे य्यवहार करते हैं। इसे समझने का विज्ञान है।

आज के समय में मनोविज्ञान बङा महत्वपुर्ण हो गया है। यह विज्ञापन, व्यावसाय, लोगों के प्रतिक्रियाओं, जनमत या बाजार का रुझान, खेल अौर खिलाङियों , अपराध का व्यवहार सब कुछ समझने के काम आता है।

क्यों नहीं अपने व्यवहार को समझा जाये?– विचार, चिन्तन, भाव ,आसपास के वातावरण अौर घटनाअों का असर हम पर पङता है। हमारा व्यक्तित्व , बौद्भिकता, संवेदन, सीखना, स्मृति, चिन्तन हमारे व्यवहार पर असर ङालतें हैं। दरअसल, हमारे व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाएं आपस में जुटे होते हैं। अतः अपने व्यक्तित्व को समझना जरुरी है। ताकि अपने व्यवहार को समझा जा सके।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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मक्के की रोटी और सरसों का साग

मक्के की रोटी 
250 ग्राम मक्के का आट्टा
4 चम्मच सरसों तेल
नमक
मुली,  गाजर, अौर 1 टुकड़ा अदरक, कद्दूकस किया हुआ।
धनिया पत्ता, हरी मिर्च, मेथी/ मुली साग कतरी हुई।
आटे में सभी सामाग्री मिला लें। जब रोटी बनानी हो तब एक-एक लोईया सान कर प्लास्टिक पेपर के बीच रख कर पतला बेले। तवा पर देर तक ( अच्छे से पकने तक, क्योकि यह पकने मे समय लेता है) करारा सेंके। चाहे तो रिफाइंड ड़ाल कर भी तवा पर सेक सकते है। चटनी, दही, आचार सॉस या साग के साथ सर्व करे।

 सरसों का साग 
सरसों के साग  में   थोङा मुली पत्ता, पालक, बथुआ साग और गोभी के मुलायम पत्ते  साफ कर काट ले। अदरक, हरी मिर्च थोड़ा हरा गोटा मूंग ( चाहे तो 2-3 घंटे फुला ले) ड़ाल कर प्रेशर कुकर मे अच्छे से गला ले। मिक्सी मे पीस ले।
3-4 प्याज़, 1 लहसुन, 2-3 टमाटर, 4-5 हरी मिर्च बारीक काटे थोड़ा अदरक कद्दूकस करे। तेल/ रिफाइंड मे मिर्च , अदरक ड़ाल कर 1-2 मिनट चलाये।फिर बाकी सभी सामग्री डाल कर गुलाबी भुने। पिसा साग और 2-3 चम्मच सत्तू ड़ाल कर चलाते रहे। नमक डाले। नमक अंत मे डालने से साग का हरा रंग बरकरार रहेगा। गाढ़ा होने पर उतार ले।

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Bloggers Recognition Award# 2

Again I have been nominated by two bloggers. I am taking the liberty to nominate more than 15 bloggers as I love encouraging my blogger buddies .

Thanks a lot for Bloggers Recognition Award. It’s so nice to know that there are fellow bloggers who really appreciate and believe in my work. I have been nominated by a very dedicated and talented blogger  Sakshi , Rising Phoenix   and Jitendra Mathur Ji

Thanks for thinking of me and nominating my name Sakshi.  I am sure you all will love her blog on Rising Phoenix. I really appreciate my nomination and am grateful to have been thought of.

The rules for accepting this award are as follows –

Give thanks to the person who had nominated you and a link to their blog.
Write a post to show your award.
Briefly tell how you started blogging.
Give two pieces of advice to new bloggers.
Nominate 15 other bloggers for this award.
Comment on the nominated blogs and let them know you have nominated them and give a link to the post you have created.

The Beginning of my Blog-Writing –

My interest in writing is something that happened subconsciously. I love writing for children. I find it refreshing and heartening to write about their innocence, faith, fears and fearlessness. One thing I find surprising about myself – I never thought of myself writing poetry, but now I am enjoying it too.

Give two pieces of advice to new bloggers:

I always believed in two things – Keep reading lots of good write-ups of your interest and keep writing regularly.

This is the list of some of my favourite bloggers. I nominate them for the Award –

Anoop

healthflix

Confused Thoughts

sunainabhatia

Jyoti

Abhay

Hemdiva Dev

Shaded Views

Pawan Belala

Amit Misra

sahil1137

Sachin patel

Pramod Kharkwal

deepsingh9796

Aneesh

yourshonestlyblog

susmitamukherjee

Amit kumar

Anupriya

NAREN

Daily Psychology

nidhee26

unfoldingenlightenment

Amit Agarwal

ChallengingEm

Fairy Kumar

Abhi Raj

Aanchal

Purba Chakraborty

Kiran Goswami

 

 

 

 

Enjoy blogging and Keep Smiling.