आईना भी इस नासमझी पर
खुद से माफी नहीं मागँने देता।
कि खुद को दर्द क्यों पहुँचाना?
जमाना बैठा है इस काम के लिये।
आईना भी इस नासमझी पर
खुद से माफी नहीं मागँने देता।
कि खुद को दर्द क्यों पहुँचाना?
जमाना बैठा है इस काम के लिये।
कहते हैं जैसा साथ, वैसी बात
संगत का असर पङता है,
पर
ना फूल को आया चुभना
ना काटों को आया महकना।
If you are
irritated by every rub,
how will your
mirror be polished?
~ Rumi
मिट्टी में दबे बीज को हीं
मालूम होता है,
शाखों पर खिले फूलों की
क्या कीमत चुकाई है उसने……….
सुनाने वालों की बातें
सुन कर
मौन को बोलने दो।
क्योंकि सही जवाब तो
समय देता है।
जंग अक्सर अपनों अौर करीबियों से लङी जाती हैं
महाभारत की कहानी में सुना था,
यही सच भी है……….
अब जिंदगी के चक्रव्यूह से जाना भी है ।
सफर-ए- जिंदगी ,
कितनी भी
खूबसूरत क्यों ना हो…
अपनी कीमत
कभी ना कभी
वसूल हीं लेती है………
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