तांडव #Covid19

कहते हैं जीवन के अंतिम सत्य का एहसास श्मशान में होता है।
सचमुच यह सत्य महसूस हुआ बाँस घाट श्मशान के पास से गुजरते हुऐ,
अौर काशी में मणिकर्णिका घाट की अविराम जलतीं चितायें देख कर।
मोक्ष की आकांक्षा से खिंचे चले आते हैं लोग काशी।
अौर  चिता की अग्नि धधकती रहती है इस महाश्मशान में।
एक चिता की अग्नि बुझे ना बुझे
धधक उठतीं हैं दूसरी चिता की लाल-पीली लपटें ।
 
आज रोज़ मिल रहीं हैं किसी ना किसी के निर्वाण की दुखद खबरें। 
 बन गईं हैं सारी श्मशानें, महाश्मशान, ….
…निरंतर जलती,  हवा में अजीब गंध बिखेरती।
थके व्यथित  परिजन अस्पताल, ईलाज़, ऑक्सीजन , दवा की लाइनों 
के बाद पंक्ति बना रहें गुजरे स्वजनों  के  अंतशय्या के लिये मसानों में।
 बिजली और गैस शव दाह गृह, क्रेमाटोरियम 
की दीवारें, भट्टियां, लोहे गल रहे अनवरत जलती अपनी हीं आग में ।
क्या यह संहारक शिव का तांडव है?
या जल रहें हैं हम सब मानव,  
मानवता अौर नैतिकता भूल अपनी हीं गलतियों के आग में? 

प्रार्थना

आँखें बंद कर हाथ जुड़ गए,

ऊपर वाले के सामने।

प्रार्थना करते हुए मुँह से निकला –

विधाता ! तुम दाता हो।

तुमसे प्रार्थना है –

जिसने मुझे जो, जितना दिया।

तुम उसे वह दुगना दो!

यह सुन ना जाने क्यों कुछ लोग नाराज़ हो गए।

 

ज़िंदगी के रंग – 216

Eternal Shine !!

नज़रिया

उन्मुक्त हवा-बयार बंधन में नहीं बँध सकती है।

दरिया में जहाज़ चलना हो,

तो मस्तूल या पाल को साधना होता है।

ख़ुशियाँ चाहिए तब,

नज़र आती दुनिया को नहीं

अपने नज़रिए को साधना होता है।

 

एक टुकड़ा ज़िंदगी का !!

विचारों, यादों के क़ैद में टुकडे टुकड़े ज़िंदगी क्या जीना ?

मन , विचार ज़िंदगी से बड़े कैसे हो सकते हैं?

ज़िंदगी है इसलिए मन है, विचार और यादें हैं.

जीवन के रंग – 115

शक और विश्वास जीवन के हिस्सें हैं.

शक ख़ुशहाल मन में भी

भय का अंधकार भर देता हैं.

विश्वास जीवन के भय भरे पलों में भी

ख़ुशियाँ और शकुन ला देता है.

your belief

Be not afraid of life.

Believe that life is worth living,

and your belief

will help create the fact.

Image courtesy – Chandni Sahay.

– William James

बिना ग़लती की सज़ा

ना जाने क्यों कभी कभी

किसी दिन

यादें बड़ी बेदर्द हो जातीं हैं.

बार बार कर यातनाएं दे जातीं  हैं।

जब लगता है,

शायद अब सब ठीक है।

तभी ना जाने कहाँ से एक छोटी सी

सुराख़ बना, यादों की  कड़ी…….जंजीर बन जाती है।

बिना ग़लती की सज़ा दे जाती हैं.

पहेली

भविष्य टुकड़े टुकड़े बँटीं हुईं,

एक पहेली है.

जोड़ कर अनुमान

लगाने की कोशिश

में ज़िंदगी और बड़ीं

पहेली बना जाती है.

भविष्य बनाने की कोशिश के साथ ,

क्यों नहीं वर्तमान में जिया जाए ?

दिल और ज़ज्बातों के रिश्ते

सिमटते जा रहे हैं,

दिल और ज़ज्बातों के रिश्ते।

सौदा करने में जो माहिर है,

बस वही कामयाब है।

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