जीवन पथ की पगडंडियाँ ,
कच्ची पक्की राहें
कभी चमकती जगमगाती बिजली ,
कही दीप,
कहीं जुगनुओं की रोशनी में
ज़िंदगी बड़ी आगे निकल आई .
पीछे पलट कर देखने पर
ढेरों स्मृतियाँ घेर कर बैठ जाती है .
काश वापस भी जाने की भी राहें होतीं..
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जीवन पथ की पगडंडियाँ ,
कच्ची पक्की राहें
कभी चमकती जगमगाती बिजली ,
कही दीप,
कहीं जुगनुओं की रोशनी में
ज़िंदगी बड़ी आगे निकल आई .
पीछे पलट कर देखने पर
ढेरों स्मृतियाँ घेर कर बैठ जाती है .
काश वापस भी जाने की भी राहें होतीं..
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उम्र ने बहुत कुछ बदला –
जीवन, अरमान, राहें…….
समय – वक़्त ने भी कसर नहीं छोड़ी –
मौसम बदले, लोग बदले………
मन में यह ख़्याल आता है –
इतना ख़्याल ना करें, इतना याद ना करें किसी को …..
पर आँखे बंद करते –
मन बदल जाता है, ईमान बदल जाते हैं .

जीवन में किसी ने जब कभी
धोखा दिया,
समझदार बना दिया,
धक्का दिया ,
तैराक बना दिया।
समय–जमाने की ठोकरें
जीवन तराश देती है
किसी मूर्तिकार की तरह ।
बंद आँखें ….
कंधे पर ले बोझ ,
जलते अौर चलते जाना जीवन नहीं !!!
दिल की धङकने
और अपनी अंदर जल रही लौ
का दर्पण,
खुले पंख ,
खुशी अौर दर्द के साथ जीना ….
….उङना,
ऊपर उठना सीखा देती है!!!!!
टेढी -मेढी बल खाती पगङंङी, ऊँची- नीची राहें ,
कभी फूलों कभी कांटों के बीच,
तीखे मोड़ भरे जीवन का यह सफ़र
मीठे -खट्टे अनुभव, यादों,
के साथ
एक अौर साल गुज़र गया
कब …..कैसे ….पता हीं नहीं चला।
कभी खुशबू, कभी आँसू साथ निभाते रहे।
पहेली सी है यह जिंदगी।
अभिनंदन नये साल का !!!
मगंलमय,
नव वर्ष की शुभकानायें !!!!
जीवन के उजाले में
साथ निभाने वाले कई मिलते हैं
मज़ा तो तब है
जब अंधेरे में भी साथ बैठने वाला…..
साथ देने वाला कोई हो।
असल रौशनी तो तब दिखती है।
जिंदगी की
यादें भी बङी बेवफा होतीं हैं,
जिन लम्हों पर कोई हक़ नहीं होता,
उन्हें हीं हक़ से याद करते रहतीं हैं,
जीवन के हर लम्हों में उन्हें
अपनेपन से
शामिल करते रहतीं हैं।

इधर उधर बिखरे शब्दोँ को बटोरकर
उनमें दिल के एहसास और
जीवन के कुछ मृदु कटु अनुभव डाल
बनती है सुनहरी
काव्यमय कविता ……
कभी तो यह दिल के बेहद करीब होती है
सुकून भरी …मीठी मीठी निर्झर सी ….
और कभी जब यह पसंद नहीं आती
मिटे पन्नों में कहीं दफन हो जाती है -ऐसी कविता !
Life is a journey not a destination !!!!
जीवन एक यात्रा है,
मंजिल नहीं।
इस यात्रा में खुशियाँ ….बाधाएं… आती जाती हैं।
यही जिंदगी हैं।
इस लेखन यात्रा में
कभी मन की पीङा, कभी खुशियाँ
आप सबों से बाँटतें बाँटतें
तीन साल गुजर गये …. पता हीं नहीं चला।
आज यह ब्लॉग और मेरे ब्लॉगर मित्र
मेरे लिये खजाना – अनमोल निधि हैं।
मन अौर दिल पर लगे,
हर चोट के निशान ने मुस्कुरा कर
ऊपरवाले को शुक्रिया कहा…..
जीवन के हर सबक, पीड़ा अौर आघात के लिये
ये तमगे हैं, जिन्हों ने जीना सीखाया।
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