जीवन की परीक्षाओं को हँस कर,
चेहरे की मुस्कुराहट के साथ झेलना तो अपनी-अपनी आदत होती है.
जीवन ख़ुशनुमा हो तभी मुस्कुराहट हो,
यह ज़रूरी नहीं.
जीवन की परीक्षाओं को हँस कर,
चेहरे की मुस्कुराहट के साथ झेलना तो अपनी-अपनी आदत होती है.
जीवन ख़ुशनुमा हो तभी मुस्कुराहट हो,
यह ज़रूरी नहीं.
अफ़सोस क्यों, अगर आज क़ैद में है ज़िंदगी?
जब आज़ाद थे तब तो विचारा नहीं.
अब तो सोंचने-विचारने का समय मिल गया है.
अगर जीवन चाहिये,
तब धरा और प्रकृति का सम्मान करना होगा.
हमें इसकी ज़रूरत है.
यह तो हमारे बिना भी पूर्ण है.

जीवन प्रवाह में बहते-बहते आ गये यहाँ तक।
माना, बहते जाना जरुरी है।
परिवर्तन जीवन का नियम है।
पर जब धार के विपरीत,
कुछ गमगीन, तीखा मोङ आ जाये,
किनारों अौर चट्टानोँ से टकाराने लगें,
जलप्रवाह, बहते आँसुअों से मटमैला हो चले,
तब?
तब भी,
जीवन प्रवाह का अनुसरण करो।
यही है जिंदगी।
प्रवाह के साथ बहते चलो।
अनुगच्छतु प्रवाह ।।
थका हरा सूरज रोज़ ढल जाता है.
अगले दिन हौसले से फिर रौशन सवेरा ले कर आता है.
कभी बादलो में घिर जाता है.
फिर वही उजाला ले कर वापस आता है.
ज़िंदगी भी ऐसी हीं है.
बस वही सबक़ सीख लेना है.
पीड़ा में डूब, ढल कर, दर्द के बादल से निकल कर जीना है.
यही जीवन का मूल मंत्र है.

आँखें ख़्वाब, औ सपने बुनतीं हैं,
हम सब बुनते रहते हैं,
ख़ुशियों भरी ज़िंदगी के अरमान।
हमारी तरह हीं बुनकर पंछी तिनके बुन आशियाना बना,
अपना शहर बसा लेता है.
बहती बयार और समय इन्हें बिखेर देते हैं,
यह बताने के लिये कि…
नश्वर है जीवन यह।
मुसाफिर की तरह चलो।
यहाँ सिर्फ रह जाते हैं शब्द अौर विचार।
वे कभी मृत नहीं होते।
जैसे एक बुनकर – कबीर के बुने जीवन के अनश्वर गूढ़ संदेश।

बुनकर पंछी- Weaver Bird.
दुनिया में सुख हीं सुख हो,
सिर्फ़ शांति हीं शांति और ख़ुशियाँ हो.
ऐसा ख़ुशियों का जहाँ ना खोजो.
वरना भटकते रह जाओगे.
जीवन और संसार ऐसा नहीं.
कष्ट, कोलाहल, कठिनाइयों से सीख,
शांत रह कर जीना हीं ख़ुशियों भरा जीवन है……


फारसी कवि उमर खय्याम की रूबैयात जीवन की संक्षिप्तता अौर अल्प अस्तित्व को दर्शाता है । कवि के लिए, जीवन एक शाश्वत वर्तमान है, जो अतीत और भविष्य दोनों से परे है।
इस जीवन के बाद के जीवन के सत्य को जानने की लालसा में
अपने अदृश्य आत्मा…..अंतरात्मा को टटोला।
अन्त:मन से जवाब मिला-
स्वर्ग-नर्क, जन्नत-दोजख सब यही हैं, हमारे अंदर है
I sent my Soul through the Invisible,
Some letter of that After-life to spell:
And by and by my Soul return’d to me,
And answer’d: ‘I Myself am Heav’n and Hell
Omar Khayyám ❤
Translation by- Rekha Sahay
Image courtesy – Aneesh
सुनहरी स्मृतियाँ जीवन से बंधी
हाथ पकड़ साथ साथ चलती है .
खिलते फूलो , महकती ख़ुश्बू सी .
कभी ना जाने कहाँ से अचानक
फुहारों सी बरस जाती हैं और
आँखों को बरसा जातीं हैं.
कभी पतझड़ के सूखी पतियों सी
झड़ने को तत्पर हो खो जाती हैं.
लम्हा लम्हा ख़यालों में…..
दिन निकल गया , रात ढल गई
पर बातें अधूरी रह गईं.
यादें …स्मृतियाँ ….. अधूरी रह गईं.
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