जिंदगी में हार-जीत या
पाना-खोना चलता रहता है।
मैंनें तुम्हें खो दिया है,
अौर अपने-आप को पा लिया।
लेकिन पता नहीं यह जीत है या हार।
जिंदगी में हार-जीत या
पाना-खोना चलता रहता है।
मैंनें तुम्हें खो दिया है,
अौर अपने-आप को पा लिया।
लेकिन पता नहीं यह जीत है या हार।
अर्श….आसमान में चमकते आफ़ताब की तपिश और
महताब की मोम सी चाँदनी
ज़हन को जज़्बाती बना देते हैं.
सूरज और चाँद की
एक दूसरे को पाने की यह जद्दोजहद,
कभी मिलन नहीं होगा,
यह जान कर भी एक दूसरे को पाने का
ख़्याल इनके रूह से जाती क्यों नहीं?
****
अर्थ –
अर्श-आसमान।
आफ़ताब- सूरज।
महताब- चाँद।
ज़हन – दिमाग़।
हर रोज अपने आस-पास लोगों को पहेलियाँ बुनते देखा है।
वे बोलते कुछ है, अर्थ कुछ अौर होता है।
वे चाहते है कि लोग इस रहस्य को समझ जायें।
लेकिन वे भूल जाते हैं।
कैंची जैसी जुबान सारे रिश्ते कतर देती है।
अौर
ना तो कतरनें पहले जैसी हो सकतीं हैं।
ना टूटे काँच की किरचियाँ।
बस चुभन रह जाती है,
अौर रह जाती है टूटते रिश्तों की अनसुनी आवाज़ें।
Image – Chandni Sahay
Out beyond ideas of wrongdoing and rightdoing there is a field. I’ll meet you there. When the soul lies down in that grass the world is too full to talk about. ❤ Rumi.
लम्हों को गँवाते गँवाते
निकल गई उम्र-ए-रफ़्ता।
गर मिले फिर इत्तिफ़ाक़ से.
नज़्म बना जियेगें ज़िंदगी।
सही-गलत से दूर…मिलेंगे उस जगह….
जहाँ आत्मा, शरीर के लिबास में ना हो।
उम्र-ए-रफ़्ता – past life, गुज़री हुई उम्र
दिलो-दिमाग में ख़्याल आया।
हर पल में हम ज़िंदगी जीते हैं।
अौर अगले पल वह पल मर जाता है,
बीता हुआ पल बन कर।
फिर, दिलो-दिमाग अौ ज़ेहन में ख़्याल आया,
हर पल ज़िंदगी आगे बढ़ती जा रही है।
अौर हर पल उम्र घटती जा रही है
पर लालसा अौर लालच बढ़ती जाती है पल-पल।
मुझे हीं या
औरों को भी यह ख़्याल आता है?
ज़ेहन-मस्तिष्क/दिमाग
ख़्वाब था, ख़्वाहिशें थीं या हक़ीक़त …. मालूम नहीं!
लगता था जैसे जागती अँधेरी रातों में,
नींद आते कोई आ बैठा पायताने, सहलाता तलवों को.
जहाँ उग आए थे फफोले, ज़िंदगी के दौड़ में भागते-दौड़ते .
दर्द देते, फूट गए थे कुछ छाले…. फफोले…… .
क्या जागती ज़िंदगी में भी कोई मलहम लगाने आएगा?
ज़िंदगी बुनती रहती है सपने
धागे के ताने-बाने से,
रेशम सी बनाती ।
तभी,जब सुहानी बयार
रुख बदल आँधी बन जाती है.
रेशम के ताने बाने तार-तार कर जाती है।
यादें हलकी हो भी जायें।
दर्द कहाँ कम होता है?
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