ख़ुशियाँ औ सुकून

लोग क्या कहेंगे?

वही कहतें हैं लोग अक्सर,

जो है नज़रिया उनका।

क्या है ज़रूरी, लोगों की राय?

रूह में दहशत? या ख़ुशियाँ औ सुकून?

सुने सब की, गौर करो, पर दिल पर ना लो।

खोना नहीं ख़ुशियों के पल,

ज़िंदगी रखो ख़ुशगवार।

Positive Psychology- “Once you start

making the effort to “wake-yourself up”

that is, be more mindful in your। activities,

you suddenly start appreciating life a lot more

– Robert Biswas-Diener

ज़िंदगी की धूप

सफलता के साँचे में

ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में

तपना और चलना होगा।

अख़्तियार एहसासों पर

भावनाएँ.. एहसास हावी हों,

तो नहीं रहता अख़्तियार अपने-आप पर।

जैसे अपनी साँसों पर ना हो अख़्तियार।

ग़र साध लिया अपने दिल-औ-दिमाग़ को,

जीत सकते हैं जग का हर जंग।

PSYCHOLOGYCAL FACT – EQ

Emotional intelligence / EQ refers to

someone’s ability to perceive, understand

and manage their own feelings and emotions.

High EQ person can handle their stress,

uncertainty, and anxiety in a better way.

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी

अनजानी चाह में,

ना दे बिसार जो है हाथ में।

कई धोखे…वहम भरी

आँख-मिचौली खेलती,

शोख़ ख्वाहिशें हम सब

उम्र भर रहते हैं तलाशते।

मिलने पर ग़र ना आए रास तो?

कहते हैं – हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी

कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले

बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन

फिर भी कम निकले।

कसौटी पर स्वर्ण

अक्सर फ़रेब करने वाले,

आज़माते रहते हैं दूसरों को।
भूल जाते हैं, फ़िज़ा में घुली

ख़ुशबुएँ आज़माई नहीं जाती।
गुमान करने वाले परखनते रहते हैं, दूसरों को।

कसौटी पर स्वर्ण ही परखते हैं।
भूल जातें हैं लोहे परखे नहीं जाते।

दूसरों में कमियाँ ढूँढने वाले

धूल आईना की साफ़ करते रहते है,

भूल जातें है ख़ुद के चेहरे साफ़ करना।

यादों से भागे फिरते हैं!

कभी अज़ान में, कभी आरती की

आवाज़ में खोजते रहे सुकून।

यादों से भागे फिरते रहे फ़िज़ूल।

पलकों के दहलीज़ पर चमकते रहे

कुछ सितारे और टूट कर बरसते रहे।

इंद्रधनुष के रंग, बेरंग हो गए।

यादों के चराग़ मज़ारों में टिमटिमाते रह गए।

लफ़्ज़ लफ़्ज़

लफ़्ज़ों के इस्तेमाल का दाम नहीं लगता।

पर लफ़्ज़ लफ़्ज़ मिल इज़हार करते हैं,

कई नई तस्वीर और तहज़ीब।

कलम के क़ैद-ओ-रिहाई से निकले

लफ़्ज़ ख़ूबसूरत मंज़र हैं ढालते,

या हैं रंग बिगाड़ते।

कविता, खबर, कहानियाँ….

अमूल्य या मूल्यहीन,

शालीन, सभ्य या अश्लील।

लफ़्ज़ों में हैं जादू-मिसाल,

टूटे लफ़्ज़ हैं तोड़ते, मीठे लफ़्ज़ हैं जोड़ते।

यादें

जिसे भूलना चाहा, उम्र कट गई भुलाने में।

जो याद रखना चाहा, ना जाने कब भूल गए।

भूलना-भुलाना नहीं कोई ख़ता,

यह इंसानी फ़ितरत है ज़रूरी,

दिल-औ-दिमाग के सुकून के लिए।

Interesting Psychological Fact- For proper

balance in life, both conservation of memory

and forgetting are important. The ability to

forget helps us prioritize, think better, make

decisions, and be more creative. Normal

forgetting, in balance with memory, gives us

the mental flexibility to grasp abstract concept

from a morass of stored Information.

तिमिर या रौशनी

ज़िंदगी में मिलतीं कई हैं राहें।

कुछ राहें जातीं हैं

तिमिर से तिमिर… अंधकार की ओर।

कुछ अंधकार से रोशनी की ओर,

कुछ ज्‍योति से तिमिर की ओर,

कुछ ज्‍योति से ज्‍योति की ओर।

इन मुख़्तलिफ़ राहों से चुन लो

किधर है जाना।

इन राहों में जिसे चाहो चुनो,

वापस लौटने की नहीं है गुंजाइश,

शर्त-ए-ज़िंदगी बस इतनी है।

जीवन संग्राम

जीवन संग्राम में सबसे बड़ा समर है,

जीतना अपने आप से।

अपने आप को स्वीकार करना,

साथ अपनी कमियों के।

अपने आप को प्यार करना।

अपने एहसासों पर इख़्तियार रखना,

अपने एहसासों के इख़्तियार में नहीं रहना।