एक मुट्ठी इश्क़
बिखेर दो इस ज़मीन पे,
बारिश का मौसम है
शायद मोहब्बत पनप जाए।
Unknown
एक मुट्ठी इश्क़
बिखेर दो इस ज़मीन पे,
बारिश का मौसम है
शायद मोहब्बत पनप जाए।
Unknown
वह सफेद लिबास में, सफेद गुलदस्ते सी थी,
घर वालों को चाहिये थी लाली वाली दुलहन।
यह शादी, मैरेज अौर निकाह के बीच का फासला
प्रेम, इश्क, लव व इबादत
सब कुछ तोङ गई।
जिंदगी ने बहुत से दर्द भरे सबक दिये,
उन्हें पन्नों पर उतारते-उतारते ,
फिर से……………
इश्क हो गया जिंदगी, कलम अौर कागज से
आप इन्हें जो चाहे कहें,
जिंदगी के रंग, जिंदगी के फलसफे, तजुर्बे या कविता……….