हम अपने बोले शब्दों के गूजं अौर मौन के बीच रहते हैं
हमारे अपने विचारों से बनता है हमारी जिंदगी का आशियाना।
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हम अपने बोले शब्दों के गूजं अौर मौन के बीच रहते हैं
हमारे अपने विचारों से बनता है हमारी जिंदगी का आशियाना।
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मौन को चुप्पी ना समझें, बहुत कुछ छुपा होता है इसके अंदर, इसे समझ सकतें हैं
इसकी रहस्यमय गहराई तक झाँक कर, क्योंकि मौन की भाषा में शब्द नहीं होते ।।
Gaslighting is a form of manipulation that seeks to sow seeds of doubt in a targeted individual or members of a group, hoping to make targets question their own memory, perception, and sanity.
गैसलाइटिंग प्रभाव क्या है –
यह एक गलत अौर नाकारात्मक व्यवहार है। कुछ लोग दूसरे के दिल अौर दिमाग पर हावी हो कर, उन्हें अपने तरीके से चलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे करीबी लोग हीं करते हैं। अगर लोगों के व्यवहार पर गौर करेंगें, तब आप अपने आसपास ऐसे लोगों को आसानी से पहचान सकते हैं। इसका प्रभावित व्यक्ति के व्यक्तित्व पर बुरा असर पङता है।
गैसलाइटिंग, हेराफेरी कर किसी को अपने तरीके से चलाने का तरीका है । ऐसे लोग लक्षित व्यक्ति या किसी समूह के लोगों में मन में संदेह के बीज बोने की कोशिश करतें हैं। लक्ष्य किये गये व्यक्ति की बातों को गलत ठहरने की कोशिश करते रहते हैं। उनके सामने उनकी याददाश्त, धारणा और विवेक पर सवाल उठाते रहते है। उनकी बातों को निरंतर अस्वीकार करना, गलत तरह से उसकी व्याख्या करना, विरोधाभास पैदा करना और झूठा ठहराना सामान्य तरीका हैं। अन्य लोगों के सामने भी उसके बारे में गलत बातें अौर धारणायें देते रहते हैं। ये सब बातें उस व्यक्ति को भ्रमित , अस्थिर व परेशान करता है और उसके आत्मविश्वास को तोङता हैं।

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Venue & date – 27.5.2017, G5A, Shakti Mill, Mahalakshmi, Mumbai
The eminent poets – Kala Ramesh, Bina Sarkar Ellias, Anju Makhija , Rahman Abbas, Vinita Agrawal, Rochelle Potkar, Smita Sahay, Gayatri Chawla, Neha Mishra Jha, Ramneek Singh, Tripurari Kumar Sharma, Smeetha Bhoumik.
Discussion on – Veils, Halos & Shackles’ – An International book on women empowerment, Editor- Charles Fishman and Smita Sahay.
एक सुहानी ढलती शाम, मुम्बई का खुला आसमान,
अपने घरों को लौटते परिंदे,
पास के पीपल के घोंसलों में चहचहाते पक्षी।
बोगनवेलिया के खुबसूरत झूमते फूलों पर उतर आई ,
आसमान में ङूबते सुरज की लाली।
ऐसे में हिंदी, उर्दू अौर अंग्रेजी
के गंगा-जमुनी कवियों अौर कविताअों का संगम।
क्या यह नजारा दिल को सुकून पहुचाने के लिये कुछ कम है?
एक सुहानी शाम कविता अौर कवियों के नाम…….
जिंदगी के बीते लम्हों ,
और हर तजुर्बे ने ,
बताया है.
खुशियाँ और मुस्कुराहटे ,
उतने अपने नहीँ होते ,
जितने दर्द और तकलीफ के,
निजी एकांत पल.
You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.
Swami Vivekananda
जीवन की परिपूर्णता —-
अगर यह लौकिक हो – बुद्ध के राजसी जीवन की तरह,
या संतृप्ति हो , कबीर की आध्यात्मिक आलौकिक जीवन की तरह।
तब मन कुछ अौर खोजने लगता है।
क्या खोजता है यह ?
क्या खींचती है इसे अपनी अोर?
यह खोज…….यह आध्यात्मिक तलाश कहाँ ले जायेगी?
शायद अपने आप को ढूँढ़ने
मैं कौन हूँ??
या
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सप्तपर्णी / एल्स्टोनिया स्कोलरिस – Apocynaceae / Alstonia scholaris
‘यक्षिणी वृक्ष’ कहलाने वाला सप्तपर्णी वृक्ष के नीचे कविन्द्र रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘गीतांजलि’ के कुछ अंश लिखे थे। शांति निकेतन में दीक्षांत समारोह में छात्रों को सप्तपर्णी के गुच्छे देने का प्रचलन हैं। थरवडा बौद्ध धर्म में भी इस वृक्ष की पत्तियों के इस्तेमाल की बात है। ये फूल मंदिरों और पूजा में भी काम आता है , हालाकि इसके पराग से कुछ लोगों को एलर्जी भी होती है।आयुर्वेद व आदिवासी लोग प्राकृतिक उपचार में इस पेड़ की छाल, पत्तियों आदि को अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाते हैं।
बिन बुलाये घुस आई रातों में अपनी खुशबू लिये ,
यक्षिणी वृक्ष के फूलों की मादक सम्मोहक सुगंध।
अौर
कस्तूरी मृग की तरह, खुशबू की खोज खींच लाई,
चक्राकार सात पत्तियो के बीच खिले
सप्तपर्णी के सदाबहार फूलों के पास।
जिसकी सुरभी शामिल है,
रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘गीतांजलि’ में भी ।

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Are we really aware of how much we know? While Writing and teaching one can examine or validate his/her knowledge. Reading, Writing and Teaching may help you find an answer of this question.
जब कुछ लिखने बैठती हूँ, तब समझ आता है,
कितना कम जानती हूँ।
जब पढ़ाना होता है, तब भी समझ आता है,
कितना कम जानती हूँ।
अपने ज्ञान को मापने का है क्या कोई तरीका?
कि
हम क्या जानते हैं? अौर कितना जानते हैं?
प्रश्न में हीं उत्तर छुपा है……..
लिखना, पढ़ना अौर पढ़ाना हीं
ज्ञान को आत्मसात अौर अभिव्यक्त करने का सबसे आसान तरीका है,
अौर अपने को परखने का तरीका भी लेखन और शिक्षण हीं है!!!!!
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On a desolate Arctic island, off the coast of Norway is the Svalbard Global Seed Vault, a repository with the capacity to hold up to 2.25 billion seeds in the event of a “doomsday” catastrophe.
क्या आप जानते हैं कि दुनिया में ऐसे शोध अौर काम भी चल रहें हैं? जिसे डूम्सडे (प्रलय का दिन ) बीज वॉल्ट कहा जाता है?
स्वालबार्ड ग्लोबल बीज वॉल्ट नॉर्वेजियन द्वीप पर एक सुरक्षित बीज बैंक है। स्वाल्बार्ड ग्लोबल बीज वॉल्ट का मिशन पारंपरिक जीनबैंक को आकस्मिक नुकसान से सुरक्षा देने के लिये बनाया गया। यह वैश्विक खाद्य फसलों के बीज को युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिये बनाया गया है। यहाँ दुनिया भर से बीज संग्रह किये गये हैं।
इस की शुरुआत नॉर्डिक जीन बैंक ने 1 9 84 से, एक खाली कोयले की खदान में बीजों को शुन्य से नीचे तापमान पर जमा कर संग्रहित करे से हुआ। बाद में बीज बैंक स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट, निर्माण किया गया । जो बर्फीले आर्कटिक क्षेत्र के एक पर्वत के अंदर बना है, और मजबूत सुरक्षा प्रणालियों से लैस है। बीजों के कमरे को -18 डिग्री सेल्सियस (-0.4 डिग्री फारेनहाइट) पर रखा जाता है। कम तापमान और सीमित ऑक्सीजन बीजों को सुरक्षित रखते हैं।
Image courtesy“Doomsday Seed Vault” , Arctic project.
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