बड़ा गुमान था कि,
चेहरा देख पहचान लेते हैं लोगों को .
तब हार गए पढ़ने में चेहरे.
खा गए धोखा ।
जब चेहरे पे लगे थे मुखौटे… …
एक पे एक।
बड़ा गुमान था कि,
चेहरा देख पहचान लेते हैं लोगों को .
तब हार गए पढ़ने में चेहरे.
खा गए धोखा ।
जब चेहरे पे लगे थे मुखौटे… …
एक पे एक।
By plucking her petals
you do not gather
the beauty of the flower.
Rabindranath Tagore
कहते हैं,
वक्त बीतने से हर दर्द चला जाता है,
अौर हर घाव भर जाता है।
पर अनुभव अौर ख्यालात कहतें है।
ज़िंदगी में मिला दर्द कभी नहीं जाता।
बस उसका रुप बदल जाता है।
कुछ को अपने दर्द के बाद,
दूसरों को दर्द देने में मज़ा आता है।
अौर
कुछ लोगों को अपना दर्द ,
दूसरों के दर्द को महसूस करने की समझ दे जाता है.
यह, क्रूरता, पर-पीड़ा
हमदर्दी, सहानुभूति , संवेदना किसमें में बदलेगा।
यह तो है इंसान पर,
कि
वो ऐब-ओ-हुनर क्या रखता हैं।
अर्थ –
#CoronaLockdownDay – 169
Plato
जिंदगी में हार-जीत या
पाना-खोना चलता रहता है।
मैंनें तुम्हें खो दिया है,
अौर अपने-आप को पा लिया।
लेकिन पता नहीं यह जीत है या हार।
#CoronaLockdownDay – 168
—Dalai Lama
#CoronaLockdownDay – 165
अर्श….आसमान में चमकते आफ़ताब की तपिश और
महताब की मोम सी चाँदनी
ज़हन को जज़्बाती बना देते हैं.
सूरज और चाँद की
एक दूसरे को पाने की यह जद्दोजहद,
कभी मिलन नहीं होगा,
यह जान कर भी एक दूसरे को पाने का
ख़्याल इनके रूह से जाती क्यों नहीं?
****
अर्थ –
अर्श-आसमान।
आफ़ताब- सूरज।
महताब- चाँद।
ज़हन – दिमाग़।
#CoronaLockdownDay – 166
THERE is a conscience in Man,
a whispering right advice,
restraining unjust hands
which man has almost succeeded in silencing;
but, it is the voice of God;
it can never be made dumb.
Make the children cognizant of it.
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