
वह मुकम्मल जहाँ नहीं,
किसी के लिए।
जहाँ हँसी से ज़्यादा
आँसू हों।
खिलखिलाहटों से ज़्यादा
दर्द हो।
सुकून से ज़्यादा
ठोकरें हो।

वह मुकम्मल जहाँ नहीं,
किसी के लिए।
जहाँ हँसी से ज़्यादा
आँसू हों।
खिलखिलाहटों से ज़्यादा
दर्द हो।
सुकून से ज़्यादा
ठोकरें हो।
Today is a big day for me as I was facilitated by Dignity Foundation, Magarpatta City, Pune for my literary achievements. I am a proud member of Dignity Foundation. I thank all the members and all the readers.
I also thank my family and friends for their love and support.



बाती की लौ भभक
कर लहराई।
बेचैन चराग ने पूछा –
क्या फिर हवायें सता रहीं हैं?
लौ बोली जलते चराग से –
हर बार हवाओं
पर ना शक करो।
मैं तप कर रौशनी
बाँटते-बाँटते ख़ाक
हो गईं हूँ।
अब तो सो जाने दे मुझे।

Though nothing can
bring back the hour
Of splendor in the grass, of glory in the flower;
We will grieve not, rather find Strength in what remains behind; In the primal sympathy Which having been must ever be…
WORDS WORTH
By William Wordsworth

इनायत
अँधेरे पल हो या उजाले,
ज़िंदगी की सारी लड़ाईयाँ
हम ने तुम्हारे भरोसे लड़ी,
तुम्हारी रज़ा और
इनायत के साये में।
ना किया तुमने
कभी कोई वादा,
पर दर्मियान हमारे-तुम्हारे
भरोसे का वो रिश्ता है
कि तुमने कभी
निराश नहीं किया।

मंज़िल
यक़ीं करो अपने आप पर।
और नज़र रखो मंज़िल पर।
इस दुनिया में इतना
है टोका-टोकी।
ग़र लोगों की बातें
सुनते रहे,
मंज़िल तक नहीं
पहुँच पाएँगे कभी।

दे कर चुभन और
हाल पूछते हैं।
ना मिलने पर
सवाल पूछतें हैं।
कुरेदतें हैं,
ज़ख्मों को
मलहम के बहाने।
उन लोगों का
क्या किया जाए?

शीशमहल
कौन खोजता हैं दूसरों में
कमियाँ हीं कमियाँ ?
उसमें अपने आप को
ढूँढने वाले।
यह शीश महल
देखने जैसा है।
जिधर देखो अपना हीं
अक्स और परछाइयाँ
देख ख़ुश हो
लेते है ये लोग।
क्या आप जानते है? जिस महीने की पूर्णिमा तिथि को जो नक्षत्र पड़ता है, उस नक्षत्र के नाम पर उस महीने का नाम होता है। मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा के दिन मृगशिरा नक्षत्र होता है। इसलिए इसे मार्गशीर्ष माह कहा जाता है। इसे मगसर, मंगसिर, अगहन, अग्रहायण नाम से भी जाना जाता है।
विज्ञान ने चंद्र और सूर्य ग्रहणों के डेट/ तिथि कुछ सौ सालों से बताना शुरू किया है। जब कि हमारे पंचांग हज़ारों वर्ष से इनकी सटीक भविष्यवाणी करते आ रहें है। महाभारत युद्ध के दौरान वर्णित ग्रहण आज सच पाए गए हैं। 4 दिसंबर या मार्गशीर्ष अमावस्या या शनैश्चरी अमावस्या, साल का आखिरी सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) है।
On Saturday, Dec. 4, 2021, some people in the Southern Hemisphere will have the chance to experience a total or partial eclipse of the Sun.


कद्र
किसी के लिए सब कुछ
दिल से करो ।
फिर भी तुम्हारे वजूद
का मोल ना हो।
कद्र न हो तुम्हारी।
तब दूरियाँ हीं
समझदारी है।
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