बसंती बयार

चराग़

नववर्ष , नये संवत्सर 2079 (2 अप्रैल) और राम नवमी की शुभकामनाएँ!

नववर्ष या नया संवत्सर 2079, (2 अप्रैल) और रामनवमी की शुभकामनाएँ मान्यता है वासंती नवरात्र, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सर्वोत्तम तिथि मान सृष्टि रचा। इसे सृष्टि निर्मिति का प्रथम दिवस और प्रथम वर्ष माना। आज विक्रम संवत् 2079 वर्ष है। राम का राज्याभिषेक बसंत के इसी पावन प्रथम दिवस को हुआ। प्राचीनतम चंद्र कैलेंडर भारत में संस्कृत में बना, ब्रह्माण्ड में सूर्य और चंद्रमा की गति पर।ब्रिटिश साम्राज्य के किंग जॉर्ज ने बिना किसी तार्किक आधार, नववर्ष अपने जन्म माह में शुरू किया। अब नव वर्ष कब मनायें, स्वयं तय करना है। नव वर्ष और राम नवमी की शुभकामनाएं।

Happy new year!

गुमान

रक़्क़ासा

रक़्क़ासा, नगर वधू, नृत्यांगना कुछ भी बुला लो।

नारी का यह बाज़ार सजता है क्योंकि ख़रीदार है।

वरना नारी तो ईश्वर की सर्वोत्तम, पावन रचना है।

इतिहास गवाह है, वैशाली की राजनृत्यांगना

आम्रपाली, जिसके सौंदर्य पर मुग्ध थी दुनिया सारी,

भिक्षुणी बन त्याग दिया वैभव और दौलत।

रक़्क़ासा आम्रपाली की श्रद्धा, भक्ति, विरक्ति देख,

बुद्ध ने तोड़ दिया परम्परा धम्मसंघ में भिक्षुणियाँ

को नहीं शामिल करने की।

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कभी-कभी कुछ रिश्ते

कभी-कभी कुछ रिश्तों को

एक तरफ़ा चलाने को कोशिशें रोक दें,

तब वे रिश्ते मरने लगें।

कभी-कभी देखा है ,

कुछ बेज़ान रिश्ते ढोने से वे जी नहीं जाते।

दरअसल वे रिश्ते होते हीं नहीं।

ऐसे एक तरफ़ा रिश्ते को छोड़

आगे बढ़ जाना समझदारी है।

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क़तरे आँसुओं के

क़तरे आँसुओं के

दर्द , ग़ुस्सा आँसू पीते जाने से

रूह की प्यास मिटती नहीं है।

दर्द नासूर बन टीसने लगता है।

फिर भी अक्सर नज़र आतें हैं

दर्द छुपाते नक़ली मुस्कान भरे चेहरे,

मुस्कुराती आखें और आँखों में छुपे

झिलमिलाते क़तरे आँसुओं के।

Psychological fact – Denial is best known defense mechanisms, used when people are unable to face reality or admit an obvious truth to protect their ego.

पत्थर दिल

ग़र दिल आपका नाज़ुक, कोमल है,

लोगों पर ऐतबार करने वाला है।

तब लाज़िमी है चोटें भी बहुत आएँगी।

दुनिया को रास नहीं आते ऐसे लोग।

दर्द दे हर दिल को अपने जैसा बनाने वाले

ढेरों है ज़माने में।

पत्थर दिलवालों को वहम होता है,

इस ज़माने में सब उन जैसे पत्थर दिल हीं हैं।

बलिदान दिवस, शहीद दिवस, 23 March

शक्ति मद नींद में डूबे अंग्रेज सरकार को,

जगाने की कोशिश में फेंका संदेशमय पर्चे के साथ बम –

“मानव को मारा जा सकता है, उसके विचार को नहीं।

बड़े से बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है

लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं।”

सुप्त, बधिर, क्रूर आंग्ल शासकों को जगाने की कोशिश में

23 मार्च, क्रांतिकारी वीर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव

सो गए चिर निंद्रा, देश की आज़ादी के लिए।

ज़िंदगी के रंग -236