मौन को चुप्पी ना समझें, बहुत कुछ छुपा होता है इसके अंदर, इसे समझ सकतें हैं
इसकी रहस्यमय गहराई तक झाँक कर, क्योंकि मौन की भाषा में शब्द नहीं होते ।।
मौन को चुप्पी ना समझें, बहुत कुछ छुपा होता है इसके अंदर, इसे समझ सकतें हैं
इसकी रहस्यमय गहराई तक झाँक कर, क्योंकि मौन की भाषा में शब्द नहीं होते ।।
जिंदगी के बीते लम्हों ,
और हर तजुर्बे ने ,
बताया है.
खुशियाँ और मुस्कुराहटे ,
उतने अपने नहीँ होते ,
जितने दर्द और तकलीफ के,
निजी एकांत पल.
You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.
Swami Vivekananda
जीवन की परिपूर्णता —-
अगर यह लौकिक हो – बुद्ध के राजसी जीवन की तरह,
या संतृप्ति हो , कबीर की आध्यात्मिक आलौकिक जीवन की तरह।
तब मन कुछ अौर खोजने लगता है।
क्या खोजता है यह ?
क्या खींचती है इसे अपनी अोर?
यह खोज…….यह आध्यात्मिक तलाश कहाँ ले जायेगी?
शायद अपने आप को ढूँढ़ने
मैं कौन हूँ??
या
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सप्तपर्णी / एल्स्टोनिया स्कोलरिस – Apocynaceae / Alstonia scholaris
‘यक्षिणी वृक्ष’ कहलाने वाला सप्तपर्णी वृक्ष के नीचे कविन्द्र रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘गीतांजलि’ के कुछ अंश लिखे थे। शांति निकेतन में दीक्षांत समारोह में छात्रों को सप्तपर्णी के गुच्छे देने का प्रचलन हैं। थरवडा बौद्ध धर्म में भी इस वृक्ष की पत्तियों के इस्तेमाल की बात है। ये फूल मंदिरों और पूजा में भी काम आता है , हालाकि इसके पराग से कुछ लोगों को एलर्जी भी होती है।आयुर्वेद व आदिवासी लोग प्राकृतिक उपचार में इस पेड़ की छाल, पत्तियों आदि को अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाते हैं।
बिन बुलाये घुस आई रातों में अपनी खुशबू लिये ,
यक्षिणी वृक्ष के फूलों की मादक सम्मोहक सुगंध।
अौर
कस्तूरी मृग की तरह, खुशबू की खोज खींच लाई,
चक्राकार सात पत्तियो के बीच खिले
सप्तपर्णी के सदाबहार फूलों के पास।
जिसकी सुरभी शामिल है,
रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘गीतांजलि’ में भी ।

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Are we really aware of how much we know? While Writing and teaching one can examine or validate his/her knowledge. Reading, Writing and Teaching may help you find an answer of this question.
जब कुछ लिखने बैठती हूँ, तब समझ आता है,
कितना कम जानती हूँ।
जब पढ़ाना होता है, तब भी समझ आता है,
कितना कम जानती हूँ।
अपने ज्ञान को मापने का है क्या कोई तरीका?
कि
हम क्या जानते हैं? अौर कितना जानते हैं?
प्रश्न में हीं उत्तर छुपा है……..
लिखना, पढ़ना अौर पढ़ाना हीं
ज्ञान को आत्मसात अौर अभिव्यक्त करने का सबसे आसान तरीका है,
अौर अपने को परखने का तरीका भी लेखन और शिक्षण हीं है!!!!!
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Wherever you are, and in whatever circumstances, strive to love and to be a lover.
~ Rumi
जीवन रुकता नहीँ
हर पल , हर क्षण नया है
दरिया के बहते पानी की तरह.
जो बह गया वह बीत गया.
वह पानी लौट कर आता नहीँ.
यह जीवन चक्र चलता रहता है.
हर पल कुछ नया ले कर आता है.
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जिंदगी से एक गहरी सबक मिली।
किसी को परेशानियों में,
सलाह जरुर देनी चाहिये।
पर बिन माँगे मदद के लिये,
हाथ भी बढ़ाना देना चाहिये।
इसमें खतरा तो हैं,
पर
ना जाने कौन किस लम्हें में,
किस दौर से गुज़र रहा है?
जाने-अनजाने हीं किसी की दुआ मिल जाये।
Take Risks in Your Life If you Win, U Can Lead! If You Lose, You can Guide!
Swami Vivekanandalife
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While God waits for His temple to be built of love, men bring stones.
Rabindranath Tagore
State of emergency in Yemen’s Sanaa over cholera crisis
More than 184 Yemenis have been killed by a cholera epidemic that is gripping the Houthi-controlled Sanaa. News
Yemen crisis: Who is fighting whom? BBC News

कोई मुझ से पूछ बैठा…..
कोई मुझ से पूछ बैठा, बदलना किस को कहते हैं?
सोच में पड़ गया हूँ, मिसाल किस की दूँ मौसम की या अपनों की!!!!!!
Source: कोई मुझ से पूछ बैठा…..
Image from internet.
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