प्रकृति से जुड़ा छठ पूजा

क्या है ऐसा कोई त्योहार जो युगों युगों से प्रकृति-संरक्षण कर रहा है?                                                                                              

आस्था का महापर्व, प्रकृति और मानव के सम्बंधों का पावन त्योहार छठ।                                                                                          

प्रकृति को उसके उपहारों के लिए आभार प्रदर्शन और श्रद्धा देने की है यह अनूठी परम्परा।                                                                                

जल, नदियों, सागर का सम्मान।                                                                                                                                                    

सूर्य और उसकी रोशनी का मोल , चाहे वह उगता सूरज हो या डूबता रवि।                                                                                          

स्वच्छता का संदेश देता त्योहार।                                                                                                                            

ना पुजारी या पंडित की जरूरत, ना सामाजिक भेदभाव ।                                                                            

कठिन तपस्या, आत्म नियंत्रण और निष्ठा का अद्भुत समिश्रण।                                                                                                          

निश्छलता से आशीर्वाद और मनोकामनाओं के पूरा होने की कामना करते असंख्य व्रती।                                                                            

आज प्रकृति संरक्षण की कोशिशों में क्यों नहीं होती इसकी चर्चा?

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दिन

अपना आज का दिन बनाने के लिए अक्सर

गुजरे दिन की शामें याद कर लेते हैं।

प्रतिपदा का चाँद

प्रतिपदा का कमज़ोर, क्षीण चाँद

थका हारा सा अपनी

पीली अल्प सी चाँदनी ,

पलाश के आग जैसे  लाल फूलों पर

बिखेरता हुआ बोला –

बस कुछ दिनो की बात है .

मैं फिर पूर्ण  हो जाऊँगा।

मेरी चाँदी सी चाँदनी हर अोर बिखरी होगी .

 

प्रतिपदा – पक्ष की पहली तिथि।

दीवाली अौर दीये !

हमने खुद जल कर उजाला किया.

अमावास्या की अँधेरी रातों में,

 बयार से लङ-झगङ कर…

तुम्हारी ख़ुशियों के लिए सोने सी सुनहरी रोशनी से जगमगाते रहे.

और आज उसी माटी में पड़े हैं…..

उसमें शामिल होने के लिए

जहाँ से जन्म लिया था.

यह थी हमारी एक रात की ज़िंदगी.

क्या तुम अपने को जला कर ख़ुशियाँ बिखेर सकते हो?

कुछ पलों में हीं जिंदगी जी सकते हो?

  सीखना है तो यह सीखो। 

 

 

Image courtesy- Aneesh

जिंदगी के रंग- 193

हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।

कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।

हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।

क्या हम आजाद हैं?

या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?

 

 

शुभ दिवाली Happy Diwali – Festival of light!

अयं चातुर्मास्य कृष्ण पक्षे शरद ऋतुः आगमनः दीप महोत्सवः भवत्कृते भवत् परिवार कृते च क्षेमस्थैर्य आयुः आरोग्य ऐश्वर्य धन धान्यम् अभि वृद्घिकारकः भवतु अपि च श्री सद्गुरुकृपा प्रसादेन सकल दुःख निवृत्तिः आध्यात्मिक प्रगतिः श्रीभगवत्प्राप्तिः च भवतु इति श्री चरणयो: प्रार्थये।।
! शुभं भवंतु !
शुभ दिपावली!

From our family to yours…
May the festival of lights,bring you love, laughter, happiness and good health Happy Diwali.

May the joy, cheer, mirth and merriment of this divine festivalsurround you forever. May the happiness, that this season brings… Festive occasions fill our lives with a new charm and happiness. May this Diwali prove to the beginning of something great in your life!

दिवाली में दीये

Rekha Sahay's avatarThe REKHA SAHAY Corner!

किसी ने पूछा –

दिवाली में दीये तो जला सकतें हैं ना?

ग्लोबल वार्मिंग की गरमाहट

तो नहीं बढ़ जायेगी……

नन्हा दीया हँस पङा।

अपने दोस्तों को देख बोला –

देखो इन्हें जरा…..

सारी कायनात  अपनी गलतियों से जलाने वाले

हमारी बातें कर रहें हैं।

जैसे सारी गलती हमारी है।

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ज़िंदगी के रंग -192

जी लो ज़िंदगी, जैसी सामने आती है.

सबक़ लो उस से …..

क्योंकि ज़िंदगी कभी वायदे नहीं करती.

इसलिए उससे शिकायतें बेकार है.

और जिन बातों को हम बदल नहीं सकते.

उनके लिए अपने आप से शिकायतें बेकार है.

छोटी-छोटी खुशियां हीं बड़ी खुशियों में बदल जाती हैं

जैसे छोटी दिवाली….से  बड़ी दिवाली ।

शुभ छोटी दिवाली!!!

 

 

Happy Dhanteras!! शुभ धनतेरस !!

मान्यता है कि धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरि का जन्म  हुआ था।

सागर मंथन से धनवंतरि हाथों में अमृत से भरा हुआ कलश लेकर प्रकट हुए थे।

 धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और मृत्युदेव यमराज की पूजा की जाती है।

 

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ज़िंदगी के रंग – 191

हमसे ना उम्मीद रखो सहारे की.

ख़ुद हीं लड़ रहे हैं नाउम्मीदी से.

वायदा है जिस दिन निकल आए,

पार कर लिया दरिया-ए-नाउम्मीद को.

सबसे बड़े मददगार बनेंगे.