हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।
कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।
हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।
क्या हम आजाद हैं?
या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।
कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।
हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।
क्या हम आजाद हैं?
या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?
अयं चातुर्मास्य कृष्ण पक्षे शरद ऋतुः आगमनः दीप महोत्सवः भवत्कृते भवत् परिवार कृते च क्षेमस्थैर्य आयुः आरोग्य ऐश्वर्य धन धान्यम् अभि वृद्घिकारकः भवतु अपि च श्री सद्गुरुकृपा प्रसादेन सकल दुःख निवृत्तिः आध्यात्मिक प्रगतिः श्रीभगवत्प्राप्तिः च भवतु इति श्री चरणयो: प्रार्थये।।
! शुभं भवंतु !
शुभ दिपावली!

From our family to yours…
May the festival of lights,bring you love, laughter, happiness and good health Happy Diwali.
May the joy, cheer, mirth and merriment of this divine festivalsurround you forever. May the happiness, that this season brings… Festive occasions fill our lives with a new charm and happiness. May this Diwali prove to the beginning of something great in your life!
किसी ने पूछा –
दिवाली में दीये तो जला सकतें हैं ना?
ग्लोबल वार्मिंग की गरमाहट
तो नहीं बढ़ जायेगी……
नन्हा दीया हँस पङा।
अपने दोस्तों को देख बोला –
देखो इन्हें जरा…..
सारी कायनात अपनी गलतियों से जलाने वाले
हमारी बातें कर रहें हैं।
जैसे सारी गलती हमारी है।
जी लो ज़िंदगी, जैसी सामने आती है.
सबक़ लो उस से …..
क्योंकि ज़िंदगी कभी वायदे नहीं करती.
इसलिए उससे शिकायतें बेकार है.
और जिन बातों को हम बदल नहीं सकते.
उनके लिए अपने आप से शिकायतें बेकार है.
छोटी-छोटी खुशियां हीं बड़ी खुशियों में बदल जाती हैं
जैसे छोटी दिवाली….से बड़ी दिवाली ।


forwarded
हमसे ना उम्मीद रखो सहारे की.
ख़ुद हीं लड़ रहे हैं नाउम्मीदी से.
वायदा है जिस दिन निकल आए,
पार कर लिया दरिया-ए-नाउम्मीद को.
सबसे बड़े मददगार बनेंगे.


जी लो ज़िंदगी, जैसी सामने आती है.
क्योंकि ज़िंदगी कभी वायदे नहीं करती.
इस लिए शिकायतें बेकार है.
और कुछ बातों हम बदल नहीं सकते.
इसलिए अपने आप से शिकायतें बेकार है.
छोटी-छोटी ख़ुशियों में छिपी हैं बड़ी ख़ुशियाँ ,
छोटी दीवाली से मना लो बड़ी दिवाली .
शुभ छोटी दीवाली!!!
एक बात तय है
आजाद खयालों ,
विचारों का होना….
चट्टानों पर सर पटकने…टकराने,
आंधी और तूफान से
लड़ने जैसी चुनौती है।

आसमान छूने की चाहत छोड़,
कैद कर लिया है अपने को,
अपनी जिंदगी को,
खुले दरवाजे और शीशे की कुछ अजनबी दीवारों, खिड़कियों में।
जैसे बंद पड़ी किताबें,
कांच की अलमारी से झांकती हैं अपने को महफ़ुज मान,
पन्नों में अपनी दास्तानों को कैद कर।
अब खाली पन्नों पर,
अपने लफ्ज़ों को उतार
रश्म-ए-रिहाई की नाकाम कोशिश कर रहें हैं।
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