
मान कर चलो कि ज़िंदगी में अच्छा…
सबसे अच्छा समय
अभी आना बाकी है।
अपने अंदर की रौशनी
कभी मरने न दो।
तुम्हारा अपना सर्वश्रेष्ठ
करना ही काफी है।
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!

मान कर चलो कि ज़िंदगी में अच्छा…
सबसे अच्छा समय
अभी आना बाकी है।
अपने अंदर की रौशनी
कभी मरने न दो।
तुम्हारा अपना सर्वश्रेष्ठ
करना ही काफी है।
किवदन्तियाँ / पौराणिक कहानी- फल्गु नदी गया, बिहार में है। यह ऊपर से सूखी दिखती है। इसके रेत को हटाने से जल मिलता है। कहते है कि राम और सीता यहाँ राजा दशरथ का पिंडदान करने गए। राम समय पर नही आ सके। अतः ब्राह्मण के कहने पर सीता जी ने पिंडदान सम्पन्न कर दिया। राम के आने पर, उनके क्रोध से बचने के लिए फल्गु नदी ने झूठ कहा कि माता सीता ने पिंडदान नहीं किया है। माता सीता ने आक्रोशित होकर फल्गु नदी को अततः सलिला ( रेत के नीचे बहाने का) होने का श्राप दे दिया.

तुम्हारा अपना सर्वश्रेष्ठ
करना ही काफी है।
विश्वास करो।
कुछ सच्चे लोग बुरे समय में
ज़रूर साथ रहेंगे।
तुम अपने लिए जियो,
अपनी ख़ुशियों के लिए जियो,
और मुस्कुराते रहो।

मान कर चलो कि ज़िंदगी में अच्छा…
सबसे अच्छा समय
अभी आना बाकी है।
अपने अंदर की रौशनी
कभी मरने न दो।
तुम्हारा अपना सर्वश्रेष्ठ
करना ही काफी है।

सूरज रोज़ निकलता है!
कोशिश मायने रखती है।
परिपूर्ण मत बनो,
वास्तविक बनो।
मान कर चलो कि ज़िंदगी
में अच्छा…
सबसे अच्छा समय
अभी आना बाकी है।
आँखों में छाई उदासी देख,
ज़िन्दगी मुस्कुराई और बोली –
फ़िक्रमंद ना हो।
ज़िंदगी की शुरूआत फिर से,
कहीं से भी हो सकती है।
देखो, रोज़ सूर्यास्त होता है।
पर अगले दिन,
अलग हौसले के साथ सूरज निकलता है।
कोशिश मायने रखती है।
परिपूर्ण मत बनो,
वास्तविक बनो।
मान कर चलो कि ज़िंदगी में अच्छा…
सबसे अच्छा समय अभी आना बाकी है।
अपने अंदर की रौशनी कभी मरने न दो।
तुम्हारा अपना सर्वश्रेष्ठ करना ही काफी है।
विश्वास करो।
कुछ सच्चे लोग बुरे समय में
ज़रूर साथ रहेंगे।
तुम अपने लिए जियो,
अपनी ख़ुशियों के लिए जियो,
और मुस्कुराते रहो।

कुछ लोगों को लगता है,
वे हमेशा सही हैं।
उनसे सही दूरी
बनाए रखनी चाहिए।
क्योंकि ऐसे लोग
अपने वहम में ज़िंदगी
से कुछ सीखते ही नहीं।

ना दूरी ना नज़दीकी
रिश्ते बनाती या बिगड़ती है।
वह तो सरसब्ज़ ….सदाबहार
प्रीत और चाहत होती है।
राधा पास थी,
पर अपनी बनी नहीं।
मीरा सदियों दूर थी,
पर कान्हा उनके अपने थे।
एकांत
वह नशा है,
जिसकी लत लगे,
तो छूटती नहीं।
भीड़ तो वह कोलाहल है,
जो बिना भाव
मिलती है हर जगह।


इस दुनिया के मेले में,
लोगों को खोने से
परेशान न हो।
सब को खुश करने की
कोशिश में ,
रोज़ एक मौत ना मरो।
एक बात सीख लो!
खुद को खो कर खोजने और
संभलने में परेशानी बहुत है।
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