जिंदगी के रंग – 41

उलझती जिन्दगी के तारों को सुलझाते हुए 

बड़े बेज़ार हो नराजगी से कहा –   

ऐ जिंदगी कभी तो मुस्कुराने दे 

 इन उलझनों से बाहर आने दे . 

जवाब मिला –  यही हैँ  जिंदगी……

यह  सब तो   सबक हैँ 

वर्ना तुझे  शिकायत होगी मुझ से 

कि कुछ सिखाया  नहीँ .

 यही हैँ  जिंदगी ! ! ! ! ! ! 

27 thoughts on “जिंदगी के रंग – 41

  1. “यह  सब तो   सबक हैँ 
    वर्ना तुझे  शिकायत होगी मुझ से 
    कि कुछ सिखाया  नहीँ .”…👏👏
    #Awsome lines mam…☺️👌

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    1. आभार, सच्ची बात यह है प्रभात, जिंदगी सचमुच सीखाती है। हर परेशानी कुछ ना कुछ सीख दे जाती है।

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