सौंदर्य सार- कविता

 

I searched for God and found only myself.
I searched for myself and found only God.

पेङ की शाखाअों पर लगे फूलों में

हम  सौंदर्य सार खोजते हैं,

पर क्यों नहीं हम जड़ों के बारे में सोचतें?

शायद वहीं सब कुछ मिल जाए………

कृष्ण को खोजते है किताबों में,

क्यों नहीं झाँकतें अपने अंदर ?

पतझङ अौर बसंत मे 

खुबसूरत  पत्ते अौर  फूल,

आते हैं अौर  फिर साथ छोङ जाते हैं,

पर जङें नहीं बदलतीं।

                    वही उन  का आधार हैं……

image from internet.

 

39 thoughts on “सौंदर्य सार- कविता

  1. Bilkul saacch likha hai..aapke post ne mujhe Kabir ji ke dohe ki yaad dilla di…”कस्तुरी का हिरण जो फिर फिर ढूंढे घास “

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  2. पर क्यों नहीं हम जड़ों के बारे में सोचतें? वह सोचने पर मजबूर कर दिया बहूत ही अच्छी कविता मुबारक हो

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    1. कवितायें तो मन में उठने वाले विचार होते है.मेरे विचार आपको पसंद आये , बहुत धन्यवाद.

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      1. बेशक कविताएँ मनन में उठने बाले बिचार से उत्पन होती है / आप बेहद उच्च बिचारो बाली है मुबारक हो

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