Kabir-Songs of a weaver 10

सात समंदर की मसि करौं लेखनि सब बनराइ।
धरती सब कागद करौं हरि गुण लिखा न जाइ॥

अर्थ: कबीर कहते हैं कि यदि मैं इन सातों सागर को अपनी लेखनी के स्याही की तरह और इस धरती को एक कागज़ की तरह प्रयोग करें। फिर भी श्री हरी के गुणों को लिखा जाना सम्भव नहीं है।

Even if you wear to transform, the seven oceans into Ink, The world’s trees into pens, The whole earth into paper, You couldn’t write down the list of gods excellence.

 

Kabir Granthavali.

 

The Guest House

This being human is a guest house.
Every morning a new arrival.

A joy, a depression, a meanness,
some momentary awareness comes
as an unexpected visitor.

Welcome and entertain them all!
Even if they are a crowd of sorrows,
who violently sweep your house
empty of its furniture,
still, treat each guest honorably.
He may be clearing you out
for some new delight.

The dark thought, the shame, the malice.
meet them at the door laughing and invite them in.

Be grateful for whatever comes.
because each has been sent
as a guide from beyond.

 

— Rumi,
translation by Coleman Barks

वन्देमातरम और उसका हिन्दी-काव्यानुवाद

वन्दे मातरम्

सुजलां सुफलाम्

मलयजशीतलाम्

शस्यश्यामलाम्

मातरम्।

शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम्

फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम्

सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्

सुखदां वरदां मातरम्॥ १॥

सप्त-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले

द्विसप्त-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,

अबला केन मा एत बले।

बहुबलधारिणीं

नमामि तारिणीं

रिपुदलवारिणीं

मातरम्॥ २॥

अनुवाद—-

वन्दे मातरम् – का अर्थ साधारणतः माँ को प्रार्थना करने से है – इस कविता को बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में अपने उपन्यास आनंदमठ में लिखा थी। इस कविता को बंगाली और संस्कृत में लिखा गया था।

जलवायु अन्न , फल फूल दायिनी माँ!, धन धान्य सम्पदा सुख,गौरव प्रदायिनी माँ!!

शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!

यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!

हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

कसकर कमर खड़े हैं, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।।

अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!

हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।।

तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!

हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।।

अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!

हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!

हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!

हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

जानकारी स्रोत :

१. https://m.wikisource.org/wiki/सामूहिक_राष्ट्रगान_(वन्देमातरम_का_हिन्दी-काव्यानुवाद)

२. https://hi.m.wikipedia.org/wiki/वन्दे_मातरम्