Tag: Shayari
चोट का दर्द
कहते हैं चोट का दर्द टीसता है
सर्द मौसम में.
पर सच यह है कि
सर्द मौसम की गुनगुनी धूप,
बरसाती सूरज की लुकाछिपी की गरमाहट
या जेठ की तपती गर्मी ओढ़ने पर भी
कुछ दर्द बेचैन कर जाती हैं.
दर्द को लफ़्ज़ों में ढाल कर
कभी कभी ही राहत मिलती है.
ग़ज़ल सी ज़िंदगी…..
सँवरी, ग़ज़ल सी ज़िंदगी जीने की हसरतें
किसकी नहीं होती? अौर, जो मिला है वही ग़ज़ल है।
यह समझते समझते ज़िंदगी निकल जाती है.

स्याह स्याही
अब अँधेरे से डर नहीं लगता.
अँधेरा हीं रुहानी लगता है.
स्याह स्याही, सफ़ेद पन्नों पर कई
कहानियाँ, कवितायें लिख जाती हैं.
वैसे हीं अँधेरे की रोशनाई में कितने
सितारे, ख़्वाब, अफ़साने दिख जाते हैं.
जिसमें कुछ अपना सा लगता है .

सूरज तो निकलेगा !
टिमटिमाते तारे, जगमगाते जुगनू, दमकता चाँद , नन्हें दीपक की हवा से काँपती लौ, सभी अपनी पूरी ताक़त से रात के अंधेरे का सामना करते हैं. फिर हम क्यों नहीं कर सकते सामान ? सहर तो होगी हीं….सूरज तो निकलेगा हीं….


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