ज़िंदगी के हक़दार हैं हम सब

अक्सर लड़कियाँ को सबक़ – ढके रहना सीखो।

सहना-चुप रहना सीखो, कहना नहीं।

लड़कों के सबक़ होतें हैं – लड़के हो, रोना नहीं,

आँसू नहीं बहाना, ज़िम्मेदार और मज़बूत रहना।

अंदर हीं अंदर घुटती भावनाओं

और दर्द के नासूर का क्या करना?

अपनी तकलीफ़-पीड़ा किसे है बतानी?

अपने लिए खड़े होना कौन सिखायेगा?

सच तो यह है –

भावनाओं और दर्द से भरा बारूद ना बन,

पहले ख़ुद से, अपने दिल-दिमाग़-रूह से प्यार कर।

खुशहाल ज़िंदगी के हक़दार है हम सब।

hello ज़िंदगी, पैग़ाम-ए-हयात

आ कर चले जातें है लोग, वहीं जहाँ से आए थे।

पर यहीं कहीं कुछ यादें , कुछ वादे छोड़ जातें हैं।

ग़ायब बस वह एक चेहरा होता है।

जो अक्सर तन्हाईयों को छूता रहता है।

बस रह जाती हैं कुछ कहानियाँ,

सुनने-सुनाने को, आँखें गीली कर जाने को।

साजो-सामान के साथ मेहमान

विदा होतें हैं, यादें क्यों छोड़ जातें हैं?

क्यों यह रस्म-ए-जहाँ बनाई? ऐ ज़िंदगी!

तुम्हारी अपनी,

पैग़ाम-ए-हयात

Meaning of some words-
पैग़ाम-ए-हयात- message of eternal love
तन्हाईयों – loneliness, solitude

O MEN PAUSE

देखा है क्या गौर से उसे, महसूस किया है क्या?
वह हर रोज़ बदलती है।
ना यह नज़ाकत, जादू या अदा है उसकी।
यह वह नहीं, हैं उसके हार्मोन।
कभी उसे ख़ूबसूरत, talkative, intuitive
कभी creative, चिड़चिड़ा बनाते।
दर्द-चोट- conflict- aggression से बचती-बचाती,
है ये उसके ज़्यादा responsive दिल-औ-दिमाग़।
मूड on-off, pregnant brain, mommy brain….
पर नहीं उसका क़ाबू।
इतने बदलावों के बाद भी है नाज़ुक, सुकुमार।
ग़र तुमने उसे पढ़ना सीख लिया तो
है खुली किताब वरना पहेली सी।
खुद में ही उलझी, है सरल सर्वोत्तम कृति ख़ुदा की।
जान गए, पहचान गए तो ठीक, वरना है ख़ुदा ही मालिक।
Caution – she is fragile ! handle with care to get the best.

Women goes through adolescence twice,( MEN-O-PAUSE). Primenopause in their 40s is called second adolescence”. It starts around age 43 and reaches its pinnacle by 47/48/52.

गारंटी

कुछ पक्के मकान सैलाबों में डूब जाते है।

दृढ़ निश्चय दुनियादारी में छूट जाते हैं।

गहरे नाते समय के चोट से अक्सर टूट जातें हैं।

पुष्ट तरु झँनझावत से टूट जातें है।

अटल-अचल टाईटैटिक़

तूफ़ानी लहरों में डूब जातें हैं।

कुछ भी गारंटी नहीं इस दुनिया में ।

फिर भी हसरतें-ख्वाहिशें रोज़

जवान होतीं रहतीं है?

नियामत

खामोशियाँ सुकून बन जाए।

तनहाइयाँ भाने लगे।

परवाह न रहे लोगों की,

उनकी बातों की।

मायने ईश्वर साथ है,

सम्भालता दुनिया की ठोकरों से,

राहें दिखाता-सिखाता।

तब एकांत बन जाता है नियामत,

देता है कई प्रश्नों के जवाब

और सिखाता है सलीके से

ख़ुशगवार ज़िंदगी जीना।

रौशन आफ़ताब

हमें जलाने की,

बुझाने की कोशिश ना कर,

हम चराग़ नहीं,

रौशन आफ़ताब हैं।

खुद हीं जल के रौशन होते हैं।

और जहाँ रौशन करते हैं।

मैंने अक्सर देखा है !

होते हैं कुछ लोग

ख़ुशगवार-सुकुमार दिखते पीपल से।

दीवारों-छतों-घरों पर बिन बताए,

बिना अनुमति ऊग आये पीपल से।

नाज़ुक पत्तियों और हरीतिमा भरा पीपल।

समय दिखाता है,

इनके असली रंग।

गहरी जड़ें कैसे आहिस्ते-आहिस्ते गलातीं है,

उन्ही दरों-दीवारों को टूटने-बिखरने तक,

जहाँ मिला आश्रय उन्हें।

हरसिंगार

भरोसा रख खुद पर,

अपने दिल की आवाज़ों पर।

किसी और को ना समझा,

खुद को समझ और महसूस कर।

हंसी और ख़ुशी आँखों, होंठों और

चेहरे से ऐसे झड़ने लगेगें,

जैसे पारिजात वृक्ष से झड़ते

हरसिंगार के ख़ूबसूरत फूल।

समझो जीना आ गया

फ़साने लिखें, जवाब ना आए।

अनदेखा-अनसुना किया जाए।

ऐसी बेरुख़ी की क्या शिकायतें?

सुकून है तब, संभल कर निकल जायें

जब क़रीब से कमजोर- बिखरती इमारतों के।

तब समझो ज़िंदगी जीना आ गया।

TopicByYourQuote

सूक्ष्म तरंगें! शुभ योग दिवस!

दुनिया सागर है ऊर्जा और तरंगो का। सृष्टि शुरू हुई कम्पन और तरंगों से। हम सब भी सूक्ष्म तरंगें हैं। जिस घड़ी, जिस पल, जिस दिन, ब्रह्मांड और हमारे कंपन….. फ़्रीक्वेंसी का योग हो जाएगा, हम एकसार हो जाएँगे और ब्रह्मांड के अनमोल राज़ों से रूबरू होने लगेंगे। हमारी तरंगे हैं हमारे विचार, हमारे भाव – सकारात्मक या नकारात्मक। प्रेम भर देगा प्रेममय ऊर्जा, नफ़रत भर देगा नकारात्मकता। ग़र बदल लिया दिल, दिमाग़ रूह की सोंच, ब्रह्मांड के मधुर गीत के साथ एकलय हो जाएँगें।

All things in our universe are constantly in motion, vibrating. Even objects that appear to be stationary are in fact vibrating, oscillating, resonating, at various frequencies.

HAPPY YOGA DAY!!