आपने भी

कविताएँ है शब्द और भाव।

पहुँचती है दिलों तक तब,

जब कुछ अधूरी ख्वाहिशें कुछ बिखरी,

ज़िंदगी देखी हो आपने भी।

इनका लुत्फ़ मिलेगा तब,

जब कुछ अधुरे अरमान जाग रहे हों,

दिलों की गहराई में।

जहाँ छु सके इन्हें सिर्फ़ शब्दों की गहराइयाँ।

इनसे गुफ़्तगू हो, जुड़ाव महसूस हो।

कुछ अपना सा,

अपनी ज़िंदगी का हिस्सा सा लगे।

वरना तो कविताएँ शब्दों का बुना जाल है।

वक्त की कहानी

यह तो वक़्त वक़्त की बात है।

टिकना हमारी फ़ितरत नहीं।

हम तो बहाव ही ज़िंदगी की।

ना तुम एक से रहते हो ना हम।

परिवर्तन तो संसार का नियम है।

पढ़ लो दरिया में

बहते पानी की तहरीरों को।

बात बस इतनी है –

बुरे वक़्त और दर्द में लगता है

युग बीत रहे और

एहसास-ए-वक़्त नहीं रहता

सुख में और इश्क़ में।

ख़ामियाज़ा

कुछ लोग दिल में होते हैं ज़िंदगी में नहीं।

कुछ ज़िंदगी में होते है दिल में नहीं।

जो अपने रूह और दिल में जगह दें।

उन्हें हीं ज़िंदगी,

रूह और दिल का हिस्सा बनायें,

चाहे वे दूर हों या पास,

ग़र ना हो चाहत टूटने-बिखरने की।

सिर्फ़ पास और साथ के लिए

साथ ना निभाएँ।

रिश्ते अपनेपन के लिए होतें हैं,

ख़ामियाज़ा भरने के लिए नहीं।

लोग नहीं बदलते!

लोग नहीं बदलते।

फ़रेबी अक्सर धोखे-बाज़ साबित होतें हैं।

वस्ल का वादा करतें है

लेकिन कभी वफ़ा नहीं करतें।

कभी दोस्त, कभी माशूक़ ,

कभी अपना… करीबी बन,

दिखा देतें हैं अपनी फ़ितरत।

अक्सर लोग नहीं बदलते।

किसका दर्द बड़ा ?

हवा में लहराती,

दुनिया रौशन करने की ख़ुशी से नाचती सुनहरी,

लाल नारंगी लौ क्या जाने,

बाती के जलने का दर्द।

जलती बाती क्या जाने गर्म-तपते तेल की जलन?

ना लौ, ना बाती, ना तेल जाने

दीये के एक रात की कहानी।

जल-तप दूसरों को रौशन करती,

अपने तले हीं अंधकार में डूबा छोड़।

पता नहीं किसका दर्द बड़ा ?

पर सब जल-तप करते रहते हैं रौशन राहें।

अर्श का सितारा !

ज़िंदगी सफ़र है

मिलने-बिछड़ने और खोने-पाने का।

कई अपने खो जातें है राहों में।

साथ छोड़ जातें है कई दोस्त बहारों में।

ख़ुद को ना खोना कभी,

किसी को पाने की ज़िद में।

किसी को मनाने की जिद में।

कोई मोल समझे ना समझे,

ना भूलो अपना अनमोल मोल

कि तुम अर्श….आसमान का सितारा हो।

Psychological fact- Self acceptance and self-love are important for living happier and healthier in every aspect of our life.

तुम उस बारिश की तरह हो

जो सोन्धी सी ख़ुशबू बिखेर जाती है।

जो मेरी बालकोनी की फ़र्श आईना बना

मेरा अक्स अपने वजूद में झलका जाती है।

Topic- YourQuote

सुकून अनलिमिटेड

ग़र अपना साथ ख़ुशियाँ देने लगे,

तब ख़ुद को जीतने की राहों पर हैं।

ग़र दूसरों से प्यार पा ख़ुश रहने की

ख्वाहिशें कम होने लगे,

तब ख़ुद से प्यार करने की राहों पर हैं।

ग़र दर्द भरे पलों में मुस्कुरा रहे हैं,

तब निर्भय होने की राहों पर है।

ग़र एकांत ख़ुशनुमा लगने लगा है,

तब अध्यात्म की राहों पर हैं।

यह जोखिम भरा शग़ल मीठा सा नशा है।

पर तय है, इसमें सुकून अनलिमिटेड है।

ढलती धुआँ धुआँ सी शाम !

ढलती धुआँ धुआँ सी

शाम सामने आते रात के

साँवले अँधेरे को ताक,

हँसी और बोली आज़ गुज़र गई,

फिर कल आऊँगी।

भीगी भीगी शाम की दहलीज़ पर

तुम फिर मुझे ढूँढते आओगे।

पर तुम करो आसनाई चरागों से।

हमें अंधेरे रास नहीं आते।