
आइने की फ़ितरत





समय, पानी-सा बहता चला गया,
मुट्ठी में भरी रेत-सा हर लम्हा फिसल गया।
किससे पूछें हिसाब उन गुज़रे पलों का?
बस यह समझ आया……….
थामना नहीं चलते रहना जीवन है।

Happy Writing!!


ना गिन दौलत,
ना गिन माल-ओ-असबाब,
गिन बस अपनी साँसें,
और हर लम्हा अमल में ढाल.
रूह का सफ़र है,
बाक़ी सब फ़ना है!!!




मोक्षदा एकादशी के पवित्र दिन
आपकी आत्मा अनन्त प्रकाश में विलीन हुई।
आपकी मुस्कान आज भी सहारा है।
आपकी सीखों और संस्कारों
ने जीवन सँवारा हैं।
Tribute: To my father on his death- anniversary
(Geeta Jayanti / Mokshada Ekadashi) In Margashira,
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