सृजन के स्वर

सृजन जन्म लेती रहती है
ख़ामोशी, अंतर्मन और तम में।
रोशनी से दूर रोशनी की ओर….
जागने की जद्दोजहद शुरू होती है।
रूह की ,
गर्भस्थ शिशु की,
कलाकार के कला की,
हीरा बनने की,
या धरा में दबे बीज की
सुन, खामोश सृजन के स्वर !!