
ज़ख्मों से तराशे!!







समय, पानी-सा बहता चला गया,
मुट्ठी में भरी रेत-सा हर लम्हा फिसल गया।
किससे पूछें हिसाब उन गुज़रे पलों का?
बस यह समझ आया……….
थामना नहीं चलते रहना जीवन है।

Happy Writing!!


ना गिन दौलत,
ना गिन माल-ओ-असबाब,
गिन बस अपनी साँसें,
और हर लम्हा अमल में ढाल.
रूह का सफ़र है,
बाक़ी सब फ़ना है!!!

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