ना तौल इंसा को!

नाप-तौल के रिश्ते निभाने वालों

हाथ में लिए तराज़ू,

ना तौल इंसाँ को।

ना भूल,

आकार, रूप, रंग हैसियत नहीं,

हुनर, स्वभाव और गुण काम आते हैं।

जैसे छोटे से छोटे भी अनमोल होते है

हीरा-स्वर्ण-जवाहरात ।

religion of solitude

The more powerful

and original a mind,

the more it will incline

towards the

religion of solitude.

~ Aldous Huxley

मृत यादें

मृत यादें मर कर भी दर्द देतीं है।

ग़र अतीत के घाव नहीं भरे

तो वे रिसते रहेंगे।

यादों के दाग,

ज़ख्मों के जलन

अपने होने का एहसास देते रहेंगे।

अतीत से समझौता कर

आगे निकल जाना ज़रूरी है।

आभार

कहते है आभार देते समय रहता मन शुद्ध सात्विक।

क्योंकि शुक्रगुज़ार होंने के वक्त

हम सब के साथ होती है सकारात्मक ऊर्जा।

आभार देते वक्त, शिकवे-गिले आते नहीं हैं ज़ेहन में।

अब विज्ञान के ख़यालात भी लगे हैं मिलने।

वे भी मानने लगें हैं, शुक्रिया कैसे भी अदा करो।

लफ़्ज़ों से, मन हीं मन या दिल से।

ख़ूबसूरती, सुकून और ख़ुशियाँ भरी होती है उनमें।

positive psychology research – gratitude is strongly and consistently associated with greater happiness. Gratitude helps people feel more positive. Giving thanks can make you happier – Harvard Health

ब्रह्मांड में गूँजते कम्पन

सब उलझे हैं पाने में सिर्फ़ स्कूल-कॉलेज का ज्ञान,

दुनियावी साधन, धन और मान।

नहीं पाते जान,

अपने अंदर और ब्रह्मांड में गूँजते कम्पन,

पर कॉसमिक एनर्जी की करते हैं बात।

ठीक कह गए हैं कबीर-

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

गारंटी

कुछ पक्के मकान सैलाबों में डूब जाते है।

दृढ़ निश्चय दुनियादारी में छूट जाते हैं।

गहरे नाते समय के चोट से अक्सर टूट जातें हैं।

पुष्ट तरु झँनझावत से टूट जातें है।

अटल-अचल टाईटैटिक़

तूफ़ानी लहरों में डूब जातें हैं।

कुछ भी गारंटी नहीं इस दुनिया में ।

फिर भी हसरतें-ख्वाहिशें रोज़

जवान होतीं रहतीं है?

लफ़्ज़ और अल्फ़ाज़

कभी ग़ौर किया क्या?

शुक्रिया अदा करते वक्त,

दिल होता है पाक-साफ़।

शिकायतें-शिकवे आते नहीं ज़ेहन में।

एहसानमंद अल्फ़ाज़ों में होती है रूहानियत।

वे नहीं करते दिल दुखाने का गुनाह।

क़ुसूरवार तो होते हैं कड़वे-कृतघ्न दिलों से

निकलते चासनी डूबे, हिजाब ओढ़ें लफ़्ज़।

Gratitude is the healthiest of all human emotions.”

Zig Ziglar

छुपे ख़्वाब बेटियों को सजाने दे!

माथे पे ये आँचल, ये हिजाब क्या ख़ूब है।
पर इसके बिना भी वह बहुत ख़ूब है।
ना क़ैद कर बुलबुल को पिंजरे में।
ख़ुशी के गीत गाने दे।
पिता की आँखों में छुपे ख़्वाब,
बेटियों को सजाने दे।
इनके पाक दामन को आँसुओं से नहीं,
अपने अस्तित्व….वजूद-ए-ज़न,
अरमानों औ ख़्वाहिशों से सजाने दे।

* On International Day for the Elimination of Sexual Violence in Conflict – crimes against women

* On Father’s Day



ख़ुशियों भरा बदलाव

एकांत में रम कर समझ आता है,

किसे प्यार है, किसे कहते है ज़रूरत।

एकांत परिचय करता है अपने आप से।

यह पहचान कराता है –

सच्चे अपनों और तथाकथित अपनों से।

ख़ुशियों भरा बदलाव लाता है बाहर से।

धीरे-धीरे अंदर भी बहुत कुछ बदलने लगता है।

मनोवैज्ञानिक तथ्य – जब आप खुद के साथ

ज्यादा समय अकेले बिताने लगते हैं तब आप

अपने साथ-साथ दूसरे की मनःस्थिति बड़ी

आसानी से समझने लगते हैं ।

करिश्मा