
सोखता….ब्लॉटिंग पेपर



नारी के झुकने, झुक कर उठने,
झुकी नज़रों को उठाने की अदा में
दिखती है कायनात की ख़ूबसूरती।
पर नहीं दिखता रूह-ए-दुर्गा ।
क्यों दिखता है सिर्फ़ हुस्न औ जिस्म?
कुछ लोगों की तस्वीर नहीं फ़क़त फ़्रेम
देखने की अजब है आदत।
औरत को तवायफ़….नगरवधु
बनाने की परम्परा जाती नहीं
कि नज़र आते नहीं तवायफ़ को
वधू बनाने वाले।
बदन पे गिरवी निगाहों से आगे देख,
उसका वजूद नज़र आएगा।
NEWS Ankita Bhandari Murder Case –
Main kya 10k mein bik jaungi’: Ankita
told her friend in WhatsApp chat.

नींद और ख़्वाबों की दुनिया
है तिलस्म सी रहस्यों भरी।
झिलमिलाते आधे-अधूरे-पूरे ख़्वाब,
सिर्फ़ स्याह रातों की नींद में नहीं,
जागती आँखों में भी रंग हैं भरते।
ज़िंदगी की दौड़ ख़्वाब और
उसकी ताबीर की है कहानी।
उन्हें बुनने-ख़रीदने-बेचने में
बीत जाती है ज़िंदगानी।
The World Dream Day is a strong reminder of our ability to recognize our strength and make positive change in our lives and in the world. The theme for celebrating World Dream Day 2022 will be “The Higher Dream”.


चटख़ कर बिना शोर टूटते हैं दिल।
यक़ीन और विश्वास बेआवाज़ टूटते है।
तय है, खामोशी में भी है शोर।
ग़र सुन सके, तो हैं अलफ़ाज़ बेमानी।
कहने वाले कहते हैं –
खामोशी होती है बेआवाज़ …. शांत।
खामोशी की है अपनी धुन
सुन सके तो सुन।

कुछ आवाज़ें दिल-औ-दिमाग़ को
हैं देतीं शांति और सुकून,
जैसे दूर मंदिरों में टुनटुनाती घंटियाँ
या कहीं बज रहा हो शांत, धीर-गंभीर शंख।
लहजा मानो, हलकी से आ रही हो
ख़ुश्बू या आरती की आवाज़ें।
जैसे ये कहतीं हैं गले लगा लो,
मीठी बोली की बहती कलकल-छलछल
चंचल बहते पानी को।
अमन और शांति की बहा दो निर्झर।
The International Day of Peace (or World Peace Day) celebrated annually on September 21 is devoted to strengthening the ideals of peace, both within and among all nations and peoples.

इससे तो अच्छा पाषाण युग रहा होगा।
जब जंग भूख व जीवन के लिए होता होगा।
जब अस्मत के जिम्मेदार वस्त्र नहीं होते होंगे।
ग्लैमर का नापतौल कपड़ों से नहीं होता होगा।
कपड़ों पर छींटाकशी की सियासत नहीं होती होगी।
काश जंग देश के किसी गम्भीर मुद्दे पर होता।
“सादा जीवन उच्च विचार” के ज्ञान पर होता।
विचार होता, लोग ज़िंदगी की जंग हार क्यों जातें हैं?
News – BJP still hanging in T-shirts and
khaki shorts: Bhupesh Baghel retorts
on ‘Rs 41k t-shirt’ jibe on Rahul Gandhi
World Suicide Prevention Day observed on 10th September.

समझ नहीं आता तन और मन के
दर्द और चोट में इतना भेदभाव क्यों?
तन के चोट पर मलहम-पट्टी और अफ़सोस
करने वालों की भीड़ जुट जाती है।
मन या दिल के चोट जान-सुन कर भी
लोग अनदेखा कर देते हैं।
इसकी तो दवा भी ईजाद नहीं।
दर्द तो दोनों में होता है।
दिखता नहीं इसलिए
इसे अनदेखा करते हैं क्या?
Human behaviour-
Acute emotional stress, positive or negative, can cause the left ventricle of the heart to be ‘stunned’ or paralysed, causing heart attack-like symptoms including strong chest, arm or shoulder pains, shortness of breath, dizziness, loss of consciousness, nausea and vomiting. https://www.health.qld.gov.au › The science behind a broken heart.

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