
चाँद झुका,
खुले वातायन से
झाँक मुस्कुराया।
बोला, हमें लगता था
हम हीं अकेले दमकते हैं।
यहाँ तो और भी है,
कोई तनहा, तन्हाई
में मुस्कुरा रहा है।

चाँद झुका,
खुले वातायन से
झाँक मुस्कुराया।
बोला, हमें लगता था
हम हीं अकेले दमकते हैं।
यहाँ तो और भी है,
कोई तनहा, तन्हाई
में मुस्कुरा रहा है।

ग़र रिश्ते रुलाने लगे,
थकाने लगे।
रूह की ताक़त निचोड़ दे।
तब दूरी है ज़रूरी।
जो नहीं किया उसकी
सफ़ाई क्यों है देनी?
जब अन्तरात्मा थक जाए।
तब आत्मसम्मान का
सम्मान है ज़रूरी।
दुनिया में बहुत कुछ
ख़त्म हो रहा है।
मारती नदियाँ, मृत सागर,
और मरते रिश्ते।
किसी को फ़र्क़ पड़ता है क्या?
जिन्हें फ़र्क़ पड़ेगा।
वे संभलना और रिश्ते
बचाना सीख लेंगे।

ठंड में बढ़ जाती है,
गुम चोट की कसक।
रातों में बढ़ जाती हैं,
गुम और भूली-बिसरीं
यादों की कसक।

चोट से टूटे दिल से,
दिमाग़ ने पूछा –
तुम ठीक हो ना?
तुम्हें बुरा नहीं,
ज़्यादा भला होने की
मिली है सज़ा।
ऐसे लोगों की
दुनिया लेती है मज़ा।
पेश नहीं आते दिल से,
दिमाग़ वालों से।
प्यार करो अपने आप से,
मुझ से।
ज़िंदगी सँवर जाएगी।

शीशमहल
कौन खोजता हैं दूसरों में
कमियाँ हीं कमियाँ ?
उसमें अपने आप को
ढूँढने वाले।
यह शीश महल
देखने जैसा है।
जिधर देखो अपना हीं
अक्स और परछाइयाँ
देख ख़ुश हो
लेते है ये लोग।

कद्र
किसी के लिए सब कुछ
दिल से करो ।
फिर भी तुम्हारे वजूद
का मोल ना हो।
कद्र न हो तुम्हारी।
तब दूरियाँ हीं
समझदारी है।

कुंदन
ज़िंदगी के इम्तहानों में
तप कर सोना बने,
कुंदन हुए या
हुए ख़ाक।
यह तो मालूम नहीं।
पर अब महफ़िलें
उलझतीं नहीं।
बेकार की बातें
रुलातीं नहीं।
ना अपनी ख़ुशियाँ
कहीं और ढूँढते हैं ,
ना देते है किसी
को सफ़ाई ।
हल्की सी
मुस्कान के साथ,
अपनी ख़ुशियों पर
यक़ीं करना सीख रहें हैं।

ख़्वाब और तितलियाँ
रात के आँचल में,
कई ख़्वाब रंग-बिरंगी
तितलियों से आतें हैं।
बंद आँखों में
खेल जातें हैं।
हाथ बढ़ाते,
आँखें खुलते,
कुछ अधूरी यादें
छोड़ जातें है।
जैसे तितलियों को
पकड़ने की कोशिश में,
उनके परों के कुछ
रंग अंगुलियों पर
छूट जातें हैं।

मिथ्यारहित सत्य
चाँद को चाँद कह दिया,
ख़फ़ा हो गई दुनिया ।
जब सच का आईना
सामने आया।
सौ-सौ झूठों का
क़ाफ़िला सजा दिया।
ना खुद से ना खुदा से
बोलना सच।
और कहते हैं जीवन का
अंतिम पड़ाव है सच ….
….. मिथ्यारहित सत्य।

ज़िंदगी की किताब
ज़िंदगी के किताब
के पुराने पन्ने
कब तक है पढ़ना?
बीते पलों को
बीत जाने दो।
अतीत को
अतीत में रहने दो।
ज़िंदगी में आगे बढ़ो।
नए पन्नों पर कुछ
नया अफ़साना लिखो।
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