Veils, Halos & Shackles     (book review of an international poetry collection)     बेडियों और  घूंघट में  उलझी नारी की आभा  मंडल  ( एक अन्तराष्ट्रीय पुस्तक की समीक्षा)

यह काव्य   महिलाओं पर हुई हिंसा , उत्पीड़न और भेदभाव की  घटनाओं पर आधारित  कविताओ का   संकलन हैं. महिलाओं पर  दुनिया में हो रहे दुर्व्यवहार को कविताओ  में पिरो कर, दुनिया को दिखाने की  अद्भुत और अनोखी  कोशिश हैं.

लौ दिलों में जलती रहे – महिलाओं के अपमान की कहानी सीता और द्रौपदी के काल से चली  आ रही हैं. पर आज़ इसका विकृत रुप डराने लगा हैं. इस पुस्तक का उद्देश्य हैं , हर जगह , हर काल में होनेवाली इस मानसिक विकृति को हम ना भूलें और इस जलती लौ को मशाल बना इसका सामना करे. इसके शिकार को नहीँ, दोषी को नीची नज़र से देखें. इसका सामना निर्भय हो कर करें.

24 देशों के 180 विचार लिखते कवि – नारी को सम्मान देनेवालों की कमी नहीँ हैं. इस संकलन में  दुनिया के दो  दर्जन देशों के विद्वानों -मनीषियों का योगदान हैं. उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति 250 से अधिक कविताओं के द्वारा हुई  हैं.

कवियों के दिल में अनछुए कोने में  झांकने का द्वार -” वेल्स हैलोज़ और शैकेल्स ” यह मार्मिक संकलन आपको उनके दिलों के दर्द भरे पहलुओं के करीब ले जायेगा. इसमें लिखने वालों में से बहुतों ने निसंकोच अपने जीवन की दर्द भरी दास्तान बयाँ की  हैं. यह वास्तव में बड़े हिम्मत की बात हैं. वरना अक्सर लोग ऐसी बातों को दबाने में यकीन रखते हैं.

पुरुषों की दुनिया  – अक्सर कुछ लोगों की गलतियों की वजह से सभी  पुरुषों पर प्रश्न चिन्ह लग जाता  हैं. पर यह महाकाव्य पुरुषों की  दुनियाँ के पुरुष कवियों की व्यथा भरी कवितायें भी सुनाता हैं उन्हीं की जुबानी. जिन महिलाओं के साथ दुर्घटनायें होती हैं.उनके परिवार के पुरुषों पर क्या बीतती हैं ?भुक्त भोगी के परिवारों और मित्रों की व्यथाएं  कैसी होती हैं ? क्या कभी ख़याल आया हैं ? उनकी वेदना और व्यथा को कविताओं का रुप दिया हैं, इस संकलन ने.

 प्रेरणा के श्रोत– दुनिया की वह आधी आबादी जिसे हम शक्ति ,दुर्गा , काली , मरियम या मदर मैरी कहते हैं.सभी और अनाम नारी इस महा रचना की प्रेरणा श्रोत हैं.

दो दूर और अलग संस्कृति के  देश के सम्पादको का सम्मिलित प्रयास  – आज़ पूरा विश्व  ग्लोबल या  वैश्विक हो गया  हैं. ऐसे में इस समस्या को  वैश्विव स्तर पर देखने का प्रयास वास्तव में प्रशंसनीय हैं.  यह पुस्तक देश , भाषा , धर्म, सम्प्रदाय, आदि के बंधन से ऊपर उठ कर महिलाओं की अनसुनी आवाज़ को बुलंदी  और हौसला देता हैं.   इस  के दोनों सम्पादक तारीफ़ के हकदार हैं.  चार्ल्स फिश्मैन और  स्मिता सहाय  वे दो नाम हैं.

 2013 में निर्भया ज्योति के गुजरने के बाद से यह वृहद अभियान शुरू हुआ. इसका गर्भ काल लम्बा था. 2016 अप्रैल में  इसका जन्म हुआ और यह पुस्तक सामने  आया. अब यह पुस्तक आमेजन पर उपलब्ध हैं – 25% की छूट के साथ.

विश्व की सर्वश्रेष्ठ कविताओं का खजाना – यह दुनिया के नामी और आम  कविओ के कविताओं का संकलन हैं. यह भुक्तभोगी कवियों  और  कवित्रियों की  दर्द भरी  वास्तविक कविताओं का संकलन हैं. जो पाठकों के दिलों में उतर जाता हैं.

अपने पैरों पर खड़ी  महाकाव्य – इस संकलन की विशेषता हैं , यह आरम्भ से अंत तक बिना किसी सहायता या अनुदान के तैयार की गई  हैं.  आज़ इस बात ज़रूरत हैं कि ऐसी पुस्तकों को शैक्षणिक संस्थानों में स्थान दिया जाये और ग्रांट व  अनुदान से प्रोत्साहित किया जाये. ताकि भविष्य में भी ऐसी पुस्तकें सामने आयें.
वैसे , सम्मान की बात हैं कि निर्भया  से उपजी यह व्यथा कविता संकलन को विदेशों में पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा हैं..

Veils, Halos & Shackles on Facebook

Veils, Halos & Shackles in Indian Express

 

 

 

मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #2

मोबाईल के छुट्टी माँगने के भयंकर सपने से जागते ही मैंने उसे अपने कलेजे से लगा लिया. अब  वह हमेशा मेरे दिल के करीब रहता. शर्ट के ऊपर के पाकेट में उसका आशियाना बन गया.

इतने पर भी मेरे दिल को  तसल्ली नहीँ हुई.  मोबाईल के छुट्टी पर जाने की कल्पना से अक्सर दिल डर से धड़कने लगता. लोगों ने कहा धडकी की बीमारी हो गई हैं मुझे. बड़ा टोना टोटका चला. किसी ने हौलदिल पहनने  कहा. मैं  सीधे डॉक्टर के पास पहुँचा.

दिल का हाल अच्छा नहीँ था. मुझे सख्त आराम का निर्देश देते हुये मेरी दुनिया और मोबाईल से मुझे अलग कर, अस्पताल में भर्ती कर दिया गया.

वहाँ सचमुच मुझे बड़ी शान्ति और सुकून मिला. ना बार बार की घंटी की आवाज़ ना उसे चार्ज करने का तनाव.

घर वापस आ कर  बार बार बजती मोबाईल मुझे बड़ी नागवार गुजरी. तभी मेरे मोबाईल ने बड़े व्यंग से पूछा – क्यों , अब समझ आया ? क्यों मैं छुट्टी माँग रहा था? या फिर से अस्पताल जाने और डाक्टर को पैसे देने की मर्जी हैं ?
  

 (हौलदिल – संग यशब नाम के चौकौर पत्थर के टुकडे   पर कुरान की  एक विशेष आयत खुदी  रहती हैं. इसे रोगोंबाधा  दूर करने के लिये पहना जाता हैं.)

 WHO and various institutions have found   negative effect of excessive use of mobile  on our health.

 

image from internet.

मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #1

-mobile-phone

मैंने जागते के साथ  बंद आँखों से अपने मोबाइल फोन की ओर हाथ बढ़ाया. हाथों में चुभन हुई. मेरी आँखें अपने आप खुल गई. आश्चर्य से देखा. मेरा मोबाइल गुस्से भरी लाल आँखों से मुझे देख रहा हैं. उसके शरीर पर काटें और सिर पर दो सींग उग आये हैं. उसके हाथों में एक बोर्ड हैं. जिस पर लिखा हैं -मेरा  छुट्टी दिवस.

उसने मुझे बड़ी बेरुखी से देखा और पूछा – मेरा रविवार कब हैं ? मुझे भी सप्ताह में एक दिन की छुट्टी चहिये.फिर वह अपने आप ही बुदबुदाने लगा -ना रात देखते , ना दिन. बस काम , काम और काम. मेरी ओर देख कर जोर से बोला -काम की अधिकता से मुझे बर्न   आऊट  सिंड्रोम हो गया हैं और उसकी सारी बत्तियां बुझ गई.

बिना मोबाईल मुझे दुनियाँ अंधकारमय लगने लगा. माथे पर पसीने की बूँदें छलक गई. अब क्या होगा ? सारी बातें तो इसी मोबाईल रूपी काले डब्बे में बंद हैं. मैं मोबाईल उठा पागलों की तरह चुभन के बाद भी बटन दबाने लगा और चिल्लाने लगा -तुम ऐसा नहीँ कर सकते हो.

तभी किसी ने कहा -नींद में इतना शोर क्यों मचा रहे हो ? मैं भयानक सपने से जाग गया.  ख़याल आया बात तो सही हैं. एक दिन फोन को , और हमें फोन से एक दिन की छुट्टी ले कर देखनी चाहिये.

 

 

images from internet.

शब्दों और  विचारों की खोज (लेखकों के  लिये प्रेरक )Searching words n ideas (Motivational though for writers) 

It is perfectly  normal for writers to fall short of words and ideas sometimes. In my experience reading is the best solution to develop a treasure of words and ideas. So  just keep reading and of course keep smiling.and yes keep writing too!

कुछ समय पहले मैंने अपने एक ब्लॉगर मित्र को दुविधाग्रस्त पाया. विचारों और शब्दों के जाल में उलझा पाया. मेरा ख्याल हैं , हम सब कभी ना कभी ऐस समय से गुजरते हैं. ऐसे में अध्ययन करना या पढ़ना मदद कर सकता हैं. इस से हमारे पास अपने आप शब्दों  और विचारों का भंडार बन जाता हैं. बस फिर इनसे हम अपनी दुनिया बना सकते हैं. लोगों को हँसा और रुला सकते हैं. पढ़ने के लिये हमारे पास ब्लॉग और पुस्तकों की अनमोल दुनिया हैं.

 

प्रकाश प्रदूषण- नविनतम खोज

light

अधिक कृत्रिम रोशनी प्रकाश प्रदूषण पैदा करता है। नविनतम खोज प्रकाश प्रदूषण गणना प्रस्तुत करते हैं। दुनिया के 80% से अधिक है और अमेरिका और यूरोपीय आबादी के 99% से अधिक लोग प्रकाश प्रदूषित माहौल में रहते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि मनुष्यता आज अपने ही बनाए प्रकाश की चादर में ढंक गई है। जो कोहरे की चादर जैसी हमारे चारों ओर छा गइ है। यह हमारी दृष्टि के लिए बाधा है।

विकसित माने जाने देशों में प्रकाश प्रदूषण सबसे ज़्यादा है. संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के देशों में 99 प्रतिशत लोगों के लिए आकाशगंगा अदृश्य हो चुकी है।

images from internet.

पूर्व नाज़ी गार्ड को ९४ साल के वयस में जेल

nazi

 

नाज़ियों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आउसवित्स शिविर में 11 लाख़ से ज्यादा लोगों की हत्या की थी जिनमें ज्यादातर यहूदी थे.

जर्मनी के पश्चिमी शहर डेटमॉल्ड में चार महीनों तक चले मुकदमे के बाद यह फ़ैसला आया है. 1942 से 1944 तक आउसवित्स में गार्ड रहे हनिंग ने शिविर में हुई घटनाओं की जानकारी होने की बात क़बूली . हनिंग ने कोर्ट को बताया – “मैं कहना चाहता हूं कि ये बात मुझे बहुत परेशान करती है कि मैं ऐसे आपराधिक संगठन का हिस्सा रहा. मैं शर्मिंदा हूं कि मैं अन्याय को देखता रहा और मैंने कुछ नहीं किया और इसके लिए मैं माफ़ी मांगता हूं. मुझे बहुत-बहुत खेद है.”

दक्षिण पोलैंड के आउसवित्स यातना शिविर में गार्ड रहे 94 साल के राइनहोल्ट हनिंग को पांच साल की जेल हुई है.
उन्हें एक लाख़ 70 हज़ार लोगों की हत्या में मदद करने का दोषी पाया गया है.

फ़ासिज़्म या राष्ट्रीय समाजवाद ,  जर्मनी की नाजी पार्टी के साथ जुड़ा राजनीतिक दल था। यह 1920 के दशक में शुरू हुई। पार्टी  ने 1933 में सत्ता हासिल किया तथा 1945 द्वितीय विश्व युद्ध तक जर्मनी में रही।  

 

images from internet.

जीन मैपिंग और सौंदर्य

dna

हर इंसान की जेनेटिक बनावट अलग होती है. जिसे जीन मैपिंग कहते हैँ। वजह से लोग अलग अलग दिखते हैं. अलग बीमारियों के शिकार होते हैं.किसी को दिल की बीमारी होती है तो किसी को डायबिटीज़ की.  कई लोगों ने इसकी मदद से ख़ुद के बारे में  विभिन्न जानकारियां हासिल की है.

आजकल जीन मैपिँग का इस्तेमाल लंदन, बर्लिन , न्यूयार्क , सिंगापुर , हांगकांग जैसे देशों में खूबसूरत बनाने के लिये किया जा रहा हैं.

कुछ कम्पनियाँ  जीन मैपिंग   और डीएनए  टेस्ट का काम करती है. इससे प्राप्त नतीजों के आधार पर ट्रीटमेंट  प्रदान किया जाता हैं.

 

images from internet.

मेरा ब्लॉग -“नरेटिवे ट्रांसपोट ” या “परिवहन कल्पना मॉडल” ( मेरे ब्लॉग के नाम के विषय में )

blue_ice_flower

मेरा ब्लॉग –“नरेटिवे ट्रांसपोटेशन ” या “परिवहन कल्पना मॉडल” के नाम से है।नाम कुछ अलग सा है। इसलिए मैं इस बारे में कुछ बातें करना चाहूंगी।


कभी-कभी हम किसी रचना को पढ़ कर उसमें डूब जाते हैं। उसमें  खो जाते हैं। उस में कुछ अपना सा लगने लगता है।

ऐसी कहानी या गाथा जो आप को अपने साथ बहा ले जाये।  इसे “कथा परिवहन अनुभव” या “नरेटिवे ट्रांसपोटेशन कहते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक  मनः  स्थिति होती है।

मैं चाहती हूँ कि मेरे रचनाओं को पढ़ने वाले पाठक भी ऐसा महसूस करें। इसमें हीं मेरे लेखनी की सार्थकता है। शब्दों का  ऐसा मायाजाल बुनना बहुत कठिन काम है। फिर भी मैं प्रयास करती रहती हूँ। अगर मेरा यह प्रयास थोड़ा भी पसंद आए। तब बताएं जरूर। यह मेरा हौसला  बढ़ाएगा।

story 1

बर्न-आउट ( एक सामान्य मनोवैज्ञानिक समस्या )

burn

बर्न-आउट क्या है ?

ज़िंदगी की भागम-भाग, तनाव, काम की अधिकता अक्सर हमे शारीरिक और मानसिक रूप से थका देती है। जब यह थकान और परेशानी काफी ऊंचे स्तर तक चला जाता है तब ऐसा लगने लगता है जैसे जिंदगी की सामान्य समस्याओ को भी सुलझाना कठिन हो गया है। बर्न-आउट मानसिक या शारीरिक कारणो से हो सकता है। यह लंबे दवाब तथा थकान का परिणाम होता है।बर्न-आउट कार्य-संबंधी या व्यक्तिगत या दोनों कारणो से हो सकता है। ऐसे में मानसिक तनाव व स्ट्रैस बढ़ जाता है। स्वभाव में चिड़चिड़Iपन बढ़ जाता है। व्यक्ति अपने को ऊर्जा-विहीन, असहाय व दुविधाग्रस्त महसूस करने लगता है।

बर्न-आउट कैसे पहचाने ?
ऐसे मे नकारात्मक सोच ज्यादा बढ़ जाती है। आत्मविश्वास व प्रेरणा मे कमी , अकेलापन, आक्रोश, नशे की लत, जिम्मेदारियो से भागने जैसे व्यवहार बढ़ जाते है। ऐसा व्यक्ति अपना फ्रस्टेशन दूसरों पर उतारने लगता है। ऐसे मे व्यक्ति हमेशा थका-थका व बीमार महसूस करता है। लगातार सिर और मांसपेशिओ मे दर्द, भूख व नींद मे कमी होने लगती है। अपने कार्य मे रुचि मे कमी, हमेशा असफलता का डर, अपना हर दिन बेकार लगने लगता है। ऐसे व्यक्ति दूसरों के साथ जरूरत से ज्यादा कठोर, असहनशील और चिड़चिड़ा हो जाता  है। गैस्ट्रिक व ब्लड-प्रेशर का उतार-चढ़ाओ असामान्य हो जा सकता है।
ऐसे परिवर्तनो का मतलब है कि अपने शारीरिक व मानसिक कार्य भार को सही तरीके से संभालने की जरूरत है। अगर संभव है तो कार्य-भार को कम कर देना चाहिए। साथ ही अपने लाइफ-स्टाइल को संयमित करना कहिए। अपनी आवश्यकताओ तथा समस्याओं को समझ कर उनका ध्यान रखना चाहिए।

समाधान-
ऐसी समस्याए अक्सर काम को लत (वर्कहोलिक) बना लेने वाले लोगों में ज्यादा पाया जाता है। इसलिए काम के साथ-साथ मनोरंजन, रचनात्मकता, मित्रों और परिवार के साथ समय बिताना भी जरूरी है। जीवन की खुशिया मानसिक तनाव काम करती है। हर काम का ध्येय सिर्फ जीत-हार, जल्दीबाजी या लक्ष्य-प्राप्ति नहीं रखना चाहिए। सकारात्मक सोच और दूसरों को समझने की कोशिश भी आवश्यक है। जिंदगी की परेशानियों  और समस्याओं  को सही नजरिए से समझना भी जरूरी है। समस्याओं  से बचने के बदले उनका सामना करना चाहिए। काल्पनिक दुनिया से हट कर वास्तविकता और जरूरत के मुताबिक कठिनाइयों  को सुलझाना चाहिए। कार्य-स्थल पर  टीम मे काम करना, अपनी समस्यओं  को बताना, नयी जिम्मेदारियों  को सीखना भी सहायक होती है। कुछ लोग ‘ना’ नहीं बोल पाने के कारण अपने को काम के भार तले दबा लेते है। ‘ना’कहना सीखना चाहिए।
प्राणायाम, योग, योगनिद्रा, ध्यान, मुद्रा आदि की  भी मदद  ली  जा सकती है। इससे तनावमुक्ति होती है। स्फूर्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह पूरे व्यक्तित्व को सकारात्मक और रचनात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। आयुर्वेद मे तुलसी को नर्व-टानिक तथा एंटि-स्ट्रैस कहा गया है। अतः इसका भी सेवन लाभदायक हो सकता है,पर गर्भावस्था में  बिना सलाह इसे ना लें।