कोर्स

कोर्स

ना प्यार सीखने का

कोर्स होता है ।

ना दर्द देने या

नफ़रत करने का।

यह तो ज़िंदगी सीखती है,

और दिल सीखता है।

सितारे

गीली पलकों पर

आँसुओं के चमकते

सितारे देख

आसमान के टिमटिमाते

सितारों ने झुक कर पूछा –

क्या जमीं पर नयनों से

सितारे बोना है?

क्यों है, मायूस चेहरा

और आँखों में आँसू ?

इनसे कुछ मिलेगा क्या?

नहीं ना?

अब ज़रा मुस्कुरा कर जी लो।

मान कर जियो कि

तुम्हारे पास मुस्कुरा कर

जीने के अलावा रास्ता नहीं।

फिर देखो,

ज़िंदगी, अँधेरा दूर कर

कैसे जलाती हैं

ख़ुशियों के चिराग़ ।

कभी-कभी It’s ok, not to be ok

कभी कभी ठीक नहीं

होना भी ठीक है।

ज़िंदगी में किसी को खो कर,

या किसी के कड़वाहटों से

कभी कभी मुस्कान

खो देना भी ठीक है।

कभी कभी धोखा खा कर

फिर से भरोसा

ना करना भी ठीक है।

अपनी हर भावना को

जैसे हैं, वैसे हीं

मान लेना ठीक है।

पहेली सी इस ज़िंदगी में,

बस अपने आप पर

भरोसा रखना ठीक है।

टूटने के बजाय हौसला से

आगे बढ़ना ठीक है।

क्योंकि उड़ान भरने

के लिए आसमाँ

और भी है।

मास्टरपीस

मुझ में किसी और

की ना खोज हो।

तुम में किसी

और की ना तलाश हो।

हम हम रहें,

तुम तुम रहो।

दूसरों की ज़िंदगी में अपनी

जगह ना बनाने की

कोशिश हो।

दूसरों को अपनी ज़िंदगी में

समाने की कोशिश ना हो।

किसी के साँचे में ना ढलो।

ना किसी और को

अपने साँचे में ढालो।

तुम तुम रहो, हम हम रहें,

ऊपर वाले ने कुछ

सोंच कर

हीं जतन से हर

मास्टरपीस बनाई होगी।

खोज

चले थे अपने आप को खोजने।

कई मिले राहों में।

पल-पल रंग बदलते

लोगों को खुश करने में,

अपने को बार-बार

नए साँचे में ढालते रहे।

ना किसी को खुश कर पाए,

ना अपने को खोज़ पाए।

दिल के अंदर झाँका,

तब समझ आया।

अपने आप को ख़ुश

रखने की ज़रूरत है।

दुनिया को नहीं…….।

रिश्ते

कुछ रिश्ते,

टूटे काँच की

तरह होते है।

जोड़ने की कोशिश में

चुभन मिलती है।

चाँद

हँस कर चाँद ने कहा –

यूँ गौर से ना देखो मुझे।

ज़िंदगी ऐसी हीं है।

सिर्फ़ मेरा हीं नहीं,

हर किसी का स्याह

समय आता है।

पर सबसे अच्छी बात है,

अपने आप को पूर्ण

करने की कोशिश

में लगे रहना !!

तुम हो ना ?

जब कभी जीवन समर से थकान होने लगती है।

तब ख्वाहिश होती है,

आँखे बंद कर  आवाज़ दे कर पूछूँ –

मेरे रथ के सारथी कृष्ण तुम साथ हो ना?

अौर आवाज़ आती है –

सच्चे दिल के भरोसे मैं नही तोड़ता

ख़्वाहिश करो ना करो। 

मैं यहीं हूँ।

डरो नहीं, अकेला नहीं छोड़ूँगा!

कोरोना से संघर्षरत हिंदुस्तान

Don’t shoot them with your camera !

Rate this:

यह कोरोना से थका-हारा, संघर्षरत हिंदुस्तान है।

मैदाने-जंग या फ़ोटोग्राफ़ी कॉम्पटिशन  नहीं!

गिद्ध और नन्ही  बच्ची की तस्वीर से

पुलित्ज़र पुरस्कार जीतने वाला

रॉबर्ट हेडली भी अपने अपराध बोध से जीत नहीं पाया।

सोंचो वास्तव में गिद्ध कौन है?

 

यहाँ सब ने किसी ना किसी को खोया है।

मदद करो!

पेश आओ  सहानुभूति और हमदर्दी से।

 

तांडव #Covid19

कहते हैं जीवन के अंतिम सत्य का एहसास श्मशान में होता है।
सचमुच यह सत्य महसूस हुआ बाँस घाट श्मशान के पास से गुजरते हुऐ,
अौर काशी में मणिकर्णिका घाट की अविराम जलतीं चितायें देख कर।
मोक्ष की आकांक्षा से खिंचे चले आते हैं लोग काशी।
अौर  चिता की अग्नि धधकती रहती है इस महाश्मशान में।
एक चिता की अग्नि बुझे ना बुझे
धधक उठतीं हैं दूसरी चिता की लाल-पीली लपटें ।
 
आज रोज़ मिल रहीं हैं किसी ना किसी के निर्वाण की दुखद खबरें। 
 बन गईं हैं सारी श्मशानें, महाश्मशान, ….
…निरंतर जलती,  हवा में अजीब गंध बिखेरती।
थके व्यथित  परिजन अस्पताल, ईलाज़, ऑक्सीजन , दवा की लाइनों 
के बाद पंक्ति बना रहें गुजरे स्वजनों  के  अंतशय्या के लिये मसानों में।
 बिजली और गैस शव दाह गृह, क्रेमाटोरियम 
की दीवारें, भट्टियां, लोहे गल रहे अनवरत जलती अपनी हीं आग में ।
क्या यह संहारक शिव का तांडव है?
या जल रहें हैं हम सब मानव,  
मानवता अौर नैतिकता भूल अपनी हीं गलतियों के आग में?