
रौशनी
सूरज डूबेगा नहीं,
तब निकलेगा कैसे?
चाँद अधूरा नहीं होगा,
तब पूरा कैसे होगा?
अँधेरा नहीं होगा,
तब रौशनी का मोल कैसे होगा?
अमावस नहीं होगा,
तब पूर्णिमा कैसे आएगी।
यही है ज़िंदगी।
इसलिय ग़र चमक कम हो,
रौशनी कम लगे।
बिना डरे इंतज़ार करो।
फिर रौशन होगी ज़िंदगी।









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