
ज़िंदगी के सफ़र में
अब जहाँ आ गए हैं।
बातें अब हम छुपाते नहीं।
लोगों के सिखाए
अदब के लिए,
अपनी ख्वाहिशें दबाते नहीं।
नक़ली सहानुभूति
दिखाने वालों से घबराते नहीं।
कड़वी बोली अब डराती नहीं।
गुनगुनी धूप
मुस्कुराना सिखाती है।
ख़ुद ज़िंदगी खुल कर
जीना सीखती है।








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