एक उलझन नहीं सुलझ रही।
हैं ज़िंदगी ख़्वाबों में मसरूफ़,
ख़्वाबों की इबादत में मसरूफ़।
है ख़ूबसूरत नशीला वसंत,
कहकशाँ,, चाँद-तारो भरी रातें।
नींद भरी आँखें अपनी
दर्द भरी कहानी किसे सुनायें?

topic by yourquote
एक उलझन नहीं सुलझ रही।
हैं ज़िंदगी ख़्वाबों में मसरूफ़,
ख़्वाबों की इबादत में मसरूफ़।
है ख़ूबसूरत नशीला वसंत,
कहकशाँ,, चाँद-तारो भरी रातें।
नींद भरी आँखें अपनी
दर्द भरी कहानी किसे सुनायें?

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ज़िंदगी मिली है जीने के लिए,
गिरने-उठने और दमकने के लिए।
सब हैं अलग-अलग पर ख़ास।
तारीफ़ कीजिए बनाने वाले की।
ग़लतियाँ कीजिए और सीखते रहें
नए-नए सबक़-ए-ज़िंदगी।
बदलाव है अहम हिस्सा, मज़ा लीजिए
बदलते सफ़र-ए-ज़िंदगी का।
Happy Psychology / Positive Psychology Fact-
Keep trying new things as life gets boring
when we stay within the limits of know
activities. In such a case, we start working in
an autopilot mode. Which is not good for
our mental health.

तेरा अक़्स, मेरा अक़्स,
क्या करना है अब बात?
दिन और रात बीत गई,
बीत गई बात।
अब ना दर्द है ना ग़म,
कर दिया है जब हिसाब।
कर दिया है सबको माफ़।
अब बस है आइना-ए-ज़िंदगी।
नहीं रह गई अक्स की बंदगी।

मकतब-ए-ज़िंदगी ने सिखाया,
मुस्कुरा-मुस्कुरा कर
लोगों को ना कर इतना बर्दाश्त
कि वे हद से गुज़र जाएँ।
सितम सहन इतना ना कर,
कि लोग सीमा तोड़ जाए।
कि ख़ुद वे बर्दाश्त-ए-काबिल ना रह जायें।
Positive Psychology-
If someone is crossing your boundaries,
take action. At the same time, Be careful
with how much you tolerate. You are
teaching them how to treat you.

अधूरी कहानियों,नज़्मों..कविताओं को
मिल जाए अल्फ़ाज़, लय….तुकांत।
पूरी हो जायेंगी उनकी अधूरी वृतांत।
लिखने वाले की पूरी होगी
आरज़ू-ए-सफ़र,
शब्दों अल्फ़ाज़ों में ढूँढते
अपने वजूद-ए-ज़फ़र।
अर्थ: ज़फ़र – विजय, जीत,

सफलता के साँचे में
ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में
तपना और चलना होगा।

विजय उत्सव है दिवाली।
रावण महापंडित, शिव भक्त, नवग्रह गुलाम उसके।
उसके बल, बुद्धि, विद्या और ज्ञान पर संशय था नहीं।
फिर भी पराजित हुआ वानर सेना और राम से।
आखिर क्यों ?
यह जीत है अहंकार पर, अँधकार पर!
विजय उत्सव है दिवाली।

अनजानी चाह में,
ना दे बिसार जो है हाथ में।
कई धोखे…वहम भरी
आँख-मिचौली खेलती,
शोख़ ख्वाहिशें हम सब
उम्र भर रहते हैं तलाशते।
मिलने पर ग़र ना आए रास तो?
कहते हैं – हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी
कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन
फिर भी कम निकले।

कुछ लोग होते हैं
ख़ूबसूरत ख़ामोश किताब से।
दमकते सुनहरे अल्फ़ाज़ों में लिखे नाम से।
समय की बहती बयार जब छेड़-छाड कर
खोलती है जिस्म-ए-किताब,
वरक़ दर वरक़, पन्ने दर पन्ने .. …
ख़ुशियों औ ग़म-ए-ज़िंदगी की
खुल जाते है कई हिसाब।
हर एक लफ़्ज़, अल्फ़ाज़ औ
तहरीरे बोल उठतीं है,
गुफ़्तगू कर उठती है दास्तान-ए-ज़िंदगी।
Psychological fact- if we hold things tight
and hide them away . it will burst out
some day. bottled up emotions may affect
the mental health negatively too.

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