
बसंती बयार




रक़्क़ासा, नगर वधू, नृत्यांगना कुछ भी बुला लो।
नारी का यह बाज़ार सजता है क्योंकि ख़रीदार है।
वरना नारी तो ईश्वर की सर्वोत्तम, पावन रचना है।
इतिहास गवाह है, वैशाली की राजनृत्यांगना
आम्रपाली, जिसके सौंदर्य पर मुग्ध थी दुनिया सारी,
भिक्षुणी बन त्याग दिया वैभव और दौलत।
रक़्क़ासा आम्रपाली की श्रद्धा, भक्ति, विरक्ति देख,
बुद्ध ने तोड़ दिया परम्परा धम्मसंघ में भिक्षुणियाँ
को नहीं शामिल करने की।

#YourQuoteTopic
कभी-कभी कुछ रिश्तों को
एक तरफ़ा चलाने को कोशिशें रोक दें,
तब वे रिश्ते मरने लगें।
कभी-कभी देखा है ,
कुछ बेज़ान रिश्ते ढोने से वे जी नहीं जाते।
दरअसल वे रिश्ते होते हीं नहीं।
ऐसे एक तरफ़ा रिश्ते को छोड़
आगे बढ़ जाना समझदारी है।

TopicByYourQuote

क़तरे आँसुओं के
दर्द , ग़ुस्सा आँसू पीते जाने से
रूह की प्यास मिटती नहीं है।
दर्द नासूर बन टीसने लगता है।
फिर भी अक्सर नज़र आतें हैं
दर्द छुपाते नक़ली मुस्कान भरे चेहरे,
मुस्कुराती आखें और आँखों में छुपे
झिलमिलाते क़तरे आँसुओं के।
Psychological fact – Denial is best known defense mechanisms, used when people are unable to face reality or admit an obvious truth to protect their ego.

चारो ओर छाया रात का रहस्यमय अंधेरा,
दिन के कोलाहल से व्यथित निशा का सन्नाटा,
गवाह है अपने को जलाते चराग़ों के सफ़र का।
कभी ये रातें बुला ले जाती है नींद के आग़ोश में ख़्वाबों के नगर।
कभी ले जातीं है शब-ए-विसाल और
कभी दर्द भरी जुदाई की यादों में ।
हर रात की अपनी दास्ताँ और अफ़साने होतें है,
और कहने वाले कह देतें हैं- रात गई बात गई !
शब-ए-विसाल – मिलन की रातें/ the night of union

#TopicByYourQuote
दुनिया है बड़ी अजीब।
तोड़ते हैं लोग दिल और वादे।
पकड़ते हैं बातों को।
तोड़ते-मरोडते हैं बात बनाने के लिए बातों को।
फिर भी चाहतें हैं,
लोग उनकी बातों पर यक़ीन करें।
उनके हाथों तोड़े अपने दिल में उन्हें जगह दें।
Psychological Fact – The manipulator deliberately creates an imbalance of power and exploits the victim to serve his or her agenda.
Symptoms of manipulators – lying. Excuse-making. Being two-faced. Blaming the victim for causing their own victimization. Deformation of the truth.

कितने ख़्वाब सजाती है रात।
लोगों के टूटते ख़्वाबों को देख रो देती रात।
कई अफ़साने-ए- इश्क़ बिखरते देख,
टूटे दिलों को, पीते अश्क देख,
रो देती है, अंधेरी से अंधेरी रात।
धोखा देने वालों की चैन की नींद देख,
रश्क से भर रो देती है चाँदनी रात।
हर पत्ते पर शबनम की बूँदें गवाह है
रजनी….रात के आँसुओं के, कि
दूसरों के दर्द से भर रो देती है रात।

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