एक बात ज़िंदगी ने बता दी .
जब आप सच और सिर्फ़ सच बोलते हैं.
गोया साफ़ बोलते हैं.
कम बोलते हैं,पर काम का बोलते है
और आपका काम बोलता है .
तब सारी दुनिया नाराज़गी दिखलाती है .
एक बात ज़िंदगी ने बता दी .
जब आप सच और सिर्फ़ सच बोलते हैं.
गोया साफ़ बोलते हैं.
कम बोलते हैं,पर काम का बोलते है
और आपका काम बोलता है .
तब सारी दुनिया नाराज़गी दिखलाती है .
ज़िंदगी को देखने का नज़रिया
सबका अलग-अलग होता है .
हम सही है ,इसका मतलब यह नहीं
कि सामने वाला ग़लत ही हो .
ज़रूरत है सामने वाले की जगह पर जा कर
दुनिया को देखना उसके नज़रिए से …..


जिंदगी है या बोनसाई ?
मुट्ठी भर माटी में
लहलहाना है,
बढ़ना भी है।
हरे भी रहना है, खङे भी रहना है।
बङी अज़ीब सी है यह जिंदगी।
सूरज ङूबने वाला था,
ना जाने क्यों ठिठका ?
अपनी लालिमा के साथ कुछ पल बिता
पलट कर बोला – अँधेरे से ङरना मत ।
यह रौशनी-अधंकार कालचक्र है।
नया सवेरा लेकर
मैं कल फिर आऊँगा !!!!!
image by Rekha Sahay
कविता की अंतिम तीन पंक्तियाँ सआभार ब्लॉगर मित्र अभय के सौजन्य से ।
गैर मुकम्मल सी इस जिंदगी में समय अौर हालात तय करते हैं
सब अपने हैं !!
या
कोई अपना नहीं है !!
word meaning –
गैर मुकम्मल – Non-perfect
जिंदगी के रंग निराले
जो कभी खून करना चाहते थे, उन्हें खून देते देखा।
जो जान लेना चाहते थे, उन्हें जान देते देखा
जो लाखों लोगों का दिल धङकाते थे,
उन्हें एक-एक धङकन के लिये मोहताज़ होते देखा।
जिनके लिये लाखों दुआएँ मागीं , उन्हें बद्दुआ देते देखा।
दिल में जगह देनेवालों को दिल तोङते देखा।
इन सब के बाद भी जीने की जिद देखी।
बङी अजीब पर नशीली अौ हसीन है यह दुनिया…………….
ज़िंदगी मुझे
आज़माने की ज़िद ना कर।
तु इतनी ख़ूबसूरत है
कि
बन गई है जुनून मेरी।
तु वह आग है जो
जलाती है
और सिखाती भी है।
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