भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है इसका भय अौर चिन्ता,
भूत काल की यादें, दुख ….अफसोस ….पछतावा
क्या कुछ बदल सकता है ?
फिर क्यों नहीं चैन से साँस लिया जाय
अौर वर्तमान में …..
जिया जाये ? ?
भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है इसका भय अौर चिन्ता,
भूत काल की यादें, दुख ….अफसोस ….पछतावा
क्या कुछ बदल सकता है ?
फिर क्यों नहीं चैन से साँस लिया जाय
अौर वर्तमान में …..
जिया जाये ? ?
समय के साथ भागते हुए लगा – घङी की टिक- टिक हूँ…
तभी
किसी ने कहा – जरुरी बातों पर फोकस करो,
तब लगा कैमरा हूँ क्या?
मोबाइल…लैपटॉप…टीवी……..क्या हूँ?
सबने कहा – इन छोटी चीजों से अपनी तुलना ना करो।
हम बहुत आगे बढ़ गये हैं
देखो विज्ञान कहा पहुँच गया है………
सब की बातों को सुन, समझ नहीं आया
आगे बढ़ गये हैं , या उलझ गये हैं ?
अहले सुबह, उगते सूरज के साथ देखा
लोग योग-ध्यान में लगे
पीछे छूटे शांती-चैन की खोज में।