ख़ुशगवार ज़िंदगी

ज़माने की महफ़िल में मुस्कुरा कर

करते हो बातें।

अपनों से, जाने-अनजानों से।

कुछ अपनी फ़िक्र, अपना ख़याल करो।

ज़माने के रंज-औ-ग़म ना उतारो ख़ुद पर।

चाहिए ग़र ज़िंदगी ख़ुशगवार चुस्त।

अपने-आप से बातें करो वही जो हों दुरुस्त।

Interesting Psychological Fact – Self-talk is

our internal dialogue. It’s influenced by

our subconscious mind, and it reveals

our thoughts, beliefs, questions, and ideas.

Positive Self-talk can enhance your

performance and general well-being.

मैंने अक्सर देखा है !

होते हैं कुछ लोग

ख़ुशगवार-सुकुमार दिखते पीपल से।

दीवारों-छतों-घरों पर बिन बताए,

बिना अनुमति ऊग आये पीपल से।

नाज़ुक पत्तियों और हरीतिमा भरा पीपल।

समय दिखाता है,

इनके असली रंग।

गहरी जड़ें कैसे आहिस्ते-आहिस्ते गलातीं है,

उन्ही दरों-दीवारों को टूटने-बिखरने तक,

जहाँ मिला आश्रय उन्हें।

ज़िंदगी के रंग – 44

आज

क्या कुछ ख़ास बात है ?

नज़ारे ख़ूबसूरत लग रहे है,

लोग प्यारे लग रहे है,

मौसम ख़ुशगवार सा है

लगता है ……

शायद आज दिल ख़ुश है।