पसंद

पसंद

हम चाहें ना चाहें,

सब हमें चाहें।

हम कबूलें या ना क़बूलें लोगों को,

पर हमें सब क़बूल करें।

यह ज़िद्द क्यों, सब पसंद करें तुम्हें?
क्या कायनात मे सभी पसंद हैं तुम्हें?

क्यों हर रास्ता

क्यों हर रास्ते चलते जातें हैं,

ज़िन्दगी की बहाव की तरह?

क्यों रास्तों के पेच-ओ-ख़म,

राहों की सख़्तियाँ ख़त्म होतीं नहीं है,

ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव की तरह?

मालूम नहीं हर रहगुज़र मंज़िल का पता दे कि ना दे,

पर राहों पर चलते जाना हीं सफ़र-ए-ज़िंदगी है।

हम सब हैं मुसाफ़िर, मंज़िल की तलाश में।

क्यों करें ऐतबार?

सच को जो झूठ बताए,

शोर मचा झूठ को सच बनाए।

सुन कर अनसुना करे,

ऐसे रिश्ते क्यों निभाएँ?

जाना नहीं उन राहों पर,

जहाँ मिले अपमान बारंबार।

जो बदले मौसम सा हर बार,

क्यों करना उस पर ऐतबार?

जिंदगी के रंग -204

जीवन है इसलिए परेशनियाँ हैं.

जीवन का अर्थ है सीखना अौर आगे बढ़ना ।

हम सजीव हैं, इसलिए चुनौतियाँ हैं.

बदलते रहते जीवन की चुनौती है हर पल में हौसला बनाये रखना।

हम हैं, क्योंकि अपनों ने हमें ऐसा बनाया.

अतः जीवन सार है अौरों की मदद करना।

दुःख है, इसलिए ख़ुशियों का मोल है.

जीवन का रहस्य है खुश रहना।

प्यार है इसलिए जीवन का अस्तित्व है.

अतः जीवन का सौंदर्य प्रेम है।

अपने को माफ करके तो देखिये Forgive yourself

 

अपने आप से नाराजगी, शिकायतें 

अपने आप से झगङा…..

क्यों हम करते  हैं हर  रोज़?

कभी अपने आप से  प्यार अौर दोस्ती

करके तो देखिये।

अपने को माफ करके तो देखिये……

कितना सुकून मिलेगा।