अतीत की स्मृतियों का बोझ दम घोटने लगता है . अौर उनमें जीने की चाहत भी होती है।
यह कोशिश, कुछ ऐसी बात है जैसे – आँधियाँ भी चलती रहें, और दिया भी जलता रहे..।
अतीत की स्मृतियों का बोझ दम घोटने लगता है . अौर उनमें जीने की चाहत भी होती है।
यह कोशिश, कुछ ऐसी बात है जैसे – आँधियाँ भी चलती रहें, और दिया भी जलता रहे..।
दुनिया की महफ़िलों से सीखने को कोशिश में हैं
दुनियादारी के क़ायदे और
इस दुनिया के शोर शराबे, कोलाहल के बीच,
मन और आत्मा में शांति बनाए रखने की रीत.

बहुत सी चीज़ें रख कर अक्सर भूल जातें है.
कई नाम, कई काम अक्सर भूल जातें हैं.
पर जो यादें मायूस करतीं हैं,
वे क्यों याद रहतीं हैं?
जबकि कई बातें अक्सर भूल जातें हैं.

अब स्याही वाली क़लम से लिखना छोड़ दिया है.
कब टपकते आँसुओं से
पन्ने पर पर अक्षर अौ शब्द फैल जाते हैं।
कब आँखें धुँधली हो जातीं हैं।
पता हीं नहीं चलता है।
कहते हैं, जो कुछ खोया हैं,
वह वापस आता है।
पर कब तक करें इंतज़ार यह तो बता दो?
Don’t grieve. Anything you lose comes round in another form.

Rumi ❤️
प्रतिपदा का कमज़ोर, क्षीण चाँद
थका हारा सा अपनी
पीली अल्प सी चाँदनी ,
पलाश के आग जैसे लाल फूलों पर
बिखेरता हुआ बोला –
बस कुछ दिनो की बात है .
मैं फिर पूर्ण हो जाऊँगा।
मेरी चाँदी सी चाँदनी हर अोर बिखरी होगी .
हमने खुद जल कर उजाला किया.
अमावास्या की अँधेरी रातों में,
बयार से लङ-झगङ कर…
तुम्हारी ख़ुशियों के लिए सोने सी सुनहरी रोशनी से जगमगाते रहे.
और आज उसी माटी में पड़े हैं…..
उसमें शामिल होने के लिए
जहाँ से जन्म लिया था.
यह थी हमारी एक रात की ज़िंदगी.
क्या तुम अपने को जला कर ख़ुशियाँ बिखेर सकते हो?
कुछ पलों में हीं जिंदगी जी सकते हो?
सीखना है तो यह सीखो।
Image courtesy- Aneesh
हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।
कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।
हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।
क्या हम आजाद हैं?
या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?
हमसे ना उम्मीद रखो सहारे की.
ख़ुद हीं लड़ रहे हैं नाउम्मीदी से.
वायदा है जिस दिन निकल आए,
पार कर लिया दरिया-ए-नाउम्मीद को.
सबसे बड़े मददगार बनेंगे.

You must be logged in to post a comment.